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गांवों में सिमट रही है मनरेगा
Updated Fri, 22 Jun 2018 10:52 PM IST
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यशवंत बडियारी
देवाल। गांवों में 100 दिन के रोजगार की गारंटी वाली योजना सिमटती जा रही है। स्थिति यह है कि योजना के तहत हर सौ दिन का रोजगार पाने वाले मजदूरों की संख्या में जहां कमी आ रही है वहीं योजना पर खर्च की जाने वाली धनराशि भी घट रही है।
ब्लाक के तहत 6033 परिवार मनेगा में पंजीकृत हैं, लेकिन महज 8 से 10 प्रतिशत जॉबकार्ड धारकों को ही 100 दिनों का रोजगार मिल पा रहा है। ब्लाक में मनरेगा के आंकड़ों के तहत वर्ष 2016-17 में जहां 2635 योजनाओं के काम पर 1288 लाख खर्च किए गए, जिसमें 419254 मानव दिवसों का सृजन किया गया। पंजीकृत 6033 जॉबकार्ड धारकों में से केवल 430 जॉबकार्ड धारकों को ही 100 दिनों का रोजगार मिल पाया। यही नहीं वर्ष 2017-18 में योजना में और गिरावट दर्ज हुई। इस वर्ष यहां महज 1421 योजनाएं ही धरातल पर उतरीं, जिसमें 361928 मानव दिवसों का सृजन कर 1170 लाख रुपये खर्च किए गए, जबकि इन योजनाओं से महज 358 परिवारों को ही 100 दिनों का रोजगार मिल पाया। ब्लाक प्रमुख उर्मिला बिष्ट का कहना है कि मनरेगा में ऑनलाइन प्रक्रिया, बजट का समय से न मिलना, श्रमिक और सामग्री अंश में भुगतान लंबित होना सहित कई कारण ऐसे हैं जिससे मनरेगा प्रभावित हो रही है। वहीं बीडीओ विक्रम लाल शाह का कहना है कि मनरेगा में गति लाने के लिए जल्द बैठक की जाएगी। मनरेगा में गति लाने और अधिक से अधिक लोगों को 100 दिनों का रोजगार देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके लिए इस वित्तीय वर्ष में विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
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देवाल। गांवों में 100 दिन के रोजगार की गारंटी वाली योजना सिमटती जा रही है। स्थिति यह है कि योजना के तहत हर सौ दिन का रोजगार पाने वाले मजदूरों की संख्या में जहां कमी आ रही है वहीं योजना पर खर्च की जाने वाली धनराशि भी घट रही है।
ब्लाक के तहत 6033 परिवार मनेगा में पंजीकृत हैं, लेकिन महज 8 से 10 प्रतिशत जॉबकार्ड धारकों को ही 100 दिनों का रोजगार मिल पा रहा है। ब्लाक में मनरेगा के आंकड़ों के तहत वर्ष 2016-17 में जहां 2635 योजनाओं के काम पर 1288 लाख खर्च किए गए, जिसमें 419254 मानव दिवसों का सृजन किया गया। पंजीकृत 6033 जॉबकार्ड धारकों में से केवल 430 जॉबकार्ड धारकों को ही 100 दिनों का रोजगार मिल पाया। यही नहीं वर्ष 2017-18 में योजना में और गिरावट दर्ज हुई। इस वर्ष यहां महज 1421 योजनाएं ही धरातल पर उतरीं, जिसमें 361928 मानव दिवसों का सृजन कर 1170 लाख रुपये खर्च किए गए, जबकि इन योजनाओं से महज 358 परिवारों को ही 100 दिनों का रोजगार मिल पाया। ब्लाक प्रमुख उर्मिला बिष्ट का कहना है कि मनरेगा में ऑनलाइन प्रक्रिया, बजट का समय से न मिलना, श्रमिक और सामग्री अंश में भुगतान लंबित होना सहित कई कारण ऐसे हैं जिससे मनरेगा प्रभावित हो रही है। वहीं बीडीओ विक्रम लाल शाह का कहना है कि मनरेगा में गति लाने के लिए जल्द बैठक की जाएगी। मनरेगा में गति लाने और अधिक से अधिक लोगों को 100 दिनों का रोजगार देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके लिए इस वित्तीय वर्ष में विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
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