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मां गंगा व अन्य नदियों के प्रति समर्पण ही सबसे बड़ा तर्पण
Updated Wed, 06 Jun 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला,मुनिकीरेती ।
विश्व पर्यावरण दिवस पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि मोक्षदायिनी के संरक्षण के लिए अब जय गंगे के साथ-साथ जैविक गंगे का उद्घोष आवश्यक है। मां गंगा और देश की अन्य नदियों के प्रति समर्पण ही सबसे बड़ा तर्पण है। परमार्थ निकेतन में आयोजित मानस कथा के मौके पर आश्रमाध्यक्ष ने कहा कि मां के गर्भ से लेकर मरघट तक मनुष्य के पूरे जीवनकाल में वृक्षों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कथा में मौजूद श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वह जीवन में चिंतन करें और गंगा के तट से प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प लेकर जाएं। उन्होंने कहा कि अब पौधारोपण कर धरती का कुछ कर्ज चुकाने का समय आ गया है। कहा कि इसी से हमारा और हमारी आने वाली पीढ़ियों का जीवन सुरक्षित रह सकता है।
श्री राम कथा के समापन अवसर पर संत मुरलीधर महाराज ने कहा कि ईश्वर को पाने के लिए मन की निर्मलता व तन की स्वच्छता की आवश्यकता होती है। कहा कि सभी श्रद्धालु श्रोता मां गंगा के तट पर आयोजित कथा से प्राप्त दिव्य ऊर्जा को श्रेष्ठ कार्यों में लगाएं, यही कथा का सार है और यही परमात्मा, प्रकृति और पर्यावरण के लिए उपयुक्त उपहार भी है। धार्मिक अनुष्ठान में साध्वी भगवती सरस्वती, नंदिनी त्रिपाठी, आचार्य संदीप शास्त्री, आचार्य दीपक शर्मा, लक्की सिंह, नरेंद्र सिंह बिष्ट, भगत सिंह, राजेश दीक्षित आदि शामिल हुए।
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विश्व पर्यावरण दिवस पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि मोक्षदायिनी के संरक्षण के लिए अब जय गंगे के साथ-साथ जैविक गंगे का उद्घोष आवश्यक है। मां गंगा और देश की अन्य नदियों के प्रति समर्पण ही सबसे बड़ा तर्पण है। परमार्थ निकेतन में आयोजित मानस कथा के मौके पर आश्रमाध्यक्ष ने कहा कि मां के गर्भ से लेकर मरघट तक मनुष्य के पूरे जीवनकाल में वृक्षों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कथा में मौजूद श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वह जीवन में चिंतन करें और गंगा के तट से प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प लेकर जाएं। उन्होंने कहा कि अब पौधारोपण कर धरती का कुछ कर्ज चुकाने का समय आ गया है। कहा कि इसी से हमारा और हमारी आने वाली पीढ़ियों का जीवन सुरक्षित रह सकता है।
श्री राम कथा के समापन अवसर पर संत मुरलीधर महाराज ने कहा कि ईश्वर को पाने के लिए मन की निर्मलता व तन की स्वच्छता की आवश्यकता होती है। कहा कि सभी श्रद्धालु श्रोता मां गंगा के तट पर आयोजित कथा से प्राप्त दिव्य ऊर्जा को श्रेष्ठ कार्यों में लगाएं, यही कथा का सार है और यही परमात्मा, प्रकृति और पर्यावरण के लिए उपयुक्त उपहार भी है। धार्मिक अनुष्ठान में साध्वी भगवती सरस्वती, नंदिनी त्रिपाठी, आचार्य संदीप शास्त्री, आचार्य दीपक शर्मा, लक्की सिंह, नरेंद्र सिंह बिष्ट, भगत सिंह, राजेश दीक्षित आदि शामिल हुए।
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