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ऋषिकेश को जिला बनाए सरकार
Updated Mon, 04 Jun 2018 02:19 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला
ऋषिकेश।
देवभूमि लोक संस्कृति विरासतीय शोभायात्रा समिति की ओर से तीर्थों का महात्म्य एवं लोक व्यवहार विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने तीर्थस्थलों को पर्यटक स्थल के तौर पर विकसित किए जाने पर विरोध जताया। इस दौरान ऋषिकेश को जिला बनाने की मांग भी की गई।
रविवार को चार धाम यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड स्थित एक होटल में आयोजित संगोष्ठी का पूर्व काबीना मंत्री व समिति के अध्यक्ष मोहन सिंह रावत गांववासी और संरक्षक शिक्षाविद् विद्यादत्त रतूड़ी ने किया। इसके बाद गांववासी ने कहा कि सरकार तीर्थों को पर्यटन स्थलों के तौर पर विकसित कर रही है, जिससे धार्मिक स्थल पिकनिक स्पॉट बन जाएंगे। यह धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ है। जबकि सरकार को तीर्थों, मंदिरों व सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए कदम उठाने चाहिए। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गंगा और यमुना साफ नहीं हो सकी हैं। धीरेंद्र रांगड़ ने तीन जिलों में बंटे ऋषिकेश को प्रशासनिक सुविधाओं के लिहाज से जिला बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह मांग काफी समय से की जा रही है लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है।
इस अवसर पर योगी राकेश नाथ, संयुक्त रोटेशन के अध्यक्ष जीत सिंह पटवाल, संजय शास्त्री, कुंवर सिंह रावत, चंदन पंवार, विनय सारस्वत, भगतराम कोठारी, मधु जोशी, ज्योति सजवाण, लक्ष्मी सजवाण, ऊषा रावत, आशुतोष जुगलाण, करण सिंह, मनोहर रौतेला, राजकुमार अग्रवाल, ललित मोहन मिश्रा, शिव प्रसाद बहुगुणा, नरेंद्र, आरके पोखरियाल, तेजराम सेमवाल, द्वारिका प्रसाद भट्ट, विश्वप्रकाश बौड़ाई, भगवान सिंह रांगड़, विजयपाल सिंह, धनसिंह रांगड़, गजेंद्र कंडियाल, मदन शर्मा, रवि जैन, ऊषा भंडारी, महिपाल बिष्ट, सुरेश उनियाल, विनोद बिजल्वाण आदि मौजूद थे।
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ऋषिकेश।
देवभूमि लोक संस्कृति विरासतीय शोभायात्रा समिति की ओर से तीर्थों का महात्म्य एवं लोक व्यवहार विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने तीर्थस्थलों को पर्यटक स्थल के तौर पर विकसित किए जाने पर विरोध जताया। इस दौरान ऋषिकेश को जिला बनाने की मांग भी की गई।
रविवार को चार धाम यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड स्थित एक होटल में आयोजित संगोष्ठी का पूर्व काबीना मंत्री व समिति के अध्यक्ष मोहन सिंह रावत गांववासी और संरक्षक शिक्षाविद् विद्यादत्त रतूड़ी ने किया। इसके बाद गांववासी ने कहा कि सरकार तीर्थों को पर्यटन स्थलों के तौर पर विकसित कर रही है, जिससे धार्मिक स्थल पिकनिक स्पॉट बन जाएंगे। यह धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ है। जबकि सरकार को तीर्थों, मंदिरों व सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए कदम उठाने चाहिए। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गंगा और यमुना साफ नहीं हो सकी हैं। धीरेंद्र रांगड़ ने तीन जिलों में बंटे ऋषिकेश को प्रशासनिक सुविधाओं के लिहाज से जिला बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह मांग काफी समय से की जा रही है लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है।
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इस अवसर पर योगी राकेश नाथ, संयुक्त रोटेशन के अध्यक्ष जीत सिंह पटवाल, संजय शास्त्री, कुंवर सिंह रावत, चंदन पंवार, विनय सारस्वत, भगतराम कोठारी, मधु जोशी, ज्योति सजवाण, लक्ष्मी सजवाण, ऊषा रावत, आशुतोष जुगलाण, करण सिंह, मनोहर रौतेला, राजकुमार अग्रवाल, ललित मोहन मिश्रा, शिव प्रसाद बहुगुणा, नरेंद्र, आरके पोखरियाल, तेजराम सेमवाल, द्वारिका प्रसाद भट्ट, विश्वप्रकाश बौड़ाई, भगवान सिंह रांगड़, विजयपाल सिंह, धनसिंह रांगड़, गजेंद्र कंडियाल, मदन शर्मा, रवि जैन, ऊषा भंडारी, महिपाल बिष्ट, सुरेश उनियाल, विनोद बिजल्वाण आदि मौजूद थे।
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