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पहाड़ में फूलों की खेती की अपार संभावनाएं
Updated Sun, 20 May 2018 02:24 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
दून बिजनेस स्कूल में चल रहे ‘तकनीकी एवं प्रबंधकीय सहयोग से किसानों की आय दोगुना करना’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार का शनिवार को समापन हो गया। अंतिम दिन देश के विभिन्न संस्थानों और यूनिवर्सिटी से आए शोधार्थियों और वैज्ञानिकों ने जल संसाधन, फूलों की खेती, कृषि वानिकी, पर्यावरण संरक्षण, मृदा परीक्षण, बागवानी, सामाजिक आर्थिक मुद्दों, प्रबंधकीय एवं विपणन विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किए।
दून बिजनेस स्कूल मनीष कुमार ने कहा पहाड़ी राज्यों में फूलों की खेती की अपार संभावनाएं है। यूपी में किसानों से जुड़े प्रयोगों पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। कहा यूपी के सहारनपुर, मिर्जापुर, अलीगढ़, बिजनौर, रामपुर, मुरादाबाद के जिलों के किसानों ने गेहूं, ज्वार, धान की फसलों के साथ पापुलर, सागौन, शीशम, आम के पेेड़ लगाए। जिससे किसानों की आय में वृद्धि हुई। निदेशक डॉ. बीपी पेठिया ने गैर लकड़ी वन परियोजना के अंतर्गत उड़ीसा राज्य के जनजातियोें पर किए गए प्रयोगों पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। जिसमें स्थानीय लोगों ने जंगल से फूल, पत्ती, बीज, गम जैसे उत्पादों से पत्तल, दोने एवं अन्य उत्पाद बनाकर लाभ कमाया। इससे कई क्षेत्र के काश्तकारों ने अपनी आर्थिकी को दुगना किया है।
इस मौके पर वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. साई राम, डॉ. हरिराम, संयोजक डॉ. आईजेगुलाटी, डॉ. एमसी पोरवाल, डॉ.जीएन पांडेय, कपिल सांघी, डॉ. एचएस गिनेवाल आदि मौजूद रहे।
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दून बिजनेस स्कूल में चल रहे ‘तकनीकी एवं प्रबंधकीय सहयोग से किसानों की आय दोगुना करना’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार का शनिवार को समापन हो गया। अंतिम दिन देश के विभिन्न संस्थानों और यूनिवर्सिटी से आए शोधार्थियों और वैज्ञानिकों ने जल संसाधन, फूलों की खेती, कृषि वानिकी, पर्यावरण संरक्षण, मृदा परीक्षण, बागवानी, सामाजिक आर्थिक मुद्दों, प्रबंधकीय एवं विपणन विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किए।
दून बिजनेस स्कूल मनीष कुमार ने कहा पहाड़ी राज्यों में फूलों की खेती की अपार संभावनाएं है। यूपी में किसानों से जुड़े प्रयोगों पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। कहा यूपी के सहारनपुर, मिर्जापुर, अलीगढ़, बिजनौर, रामपुर, मुरादाबाद के जिलों के किसानों ने गेहूं, ज्वार, धान की फसलों के साथ पापुलर, सागौन, शीशम, आम के पेेड़ लगाए। जिससे किसानों की आय में वृद्धि हुई। निदेशक डॉ. बीपी पेठिया ने गैर लकड़ी वन परियोजना के अंतर्गत उड़ीसा राज्य के जनजातियोें पर किए गए प्रयोगों पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। जिसमें स्थानीय लोगों ने जंगल से फूल, पत्ती, बीज, गम जैसे उत्पादों से पत्तल, दोने एवं अन्य उत्पाद बनाकर लाभ कमाया। इससे कई क्षेत्र के काश्तकारों ने अपनी आर्थिकी को दुगना किया है।
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इस मौके पर वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. साई राम, डॉ. हरिराम, संयोजक डॉ. आईजेगुलाटी, डॉ. एमसी पोरवाल, डॉ.जीएन पांडेय, कपिल सांघी, डॉ. एचएस गिनेवाल आदि मौजूद रहे।
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