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आसमानी आफत ने काश्तकारों के अरमानों पर फेरा पानी

Mon, 14 May 2018 02:04 AM IST
Updated Mon, 14 May 2018 02:04 AM IST
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आसमानी आफत ने काश्तकारों के अरमानों पर फेरा पानी
ब्यूरो/अमर उजाला/त्यूनी/साहिया/चकराता।
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मौसम की बदली रंगत ने एक बार फिर काश्तकारों के अरमानों पर पानी फेर दिया। पहाड़ी अंचलों में तेज बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने काश्तकारों की कमर तोड़ दी है। क्षेत्र के तीन दर्जन से अधिक गांवों में ओलावृष्टि से शीतोष्ण फलों के साथ ही नकदी फसलों को नुकसान पहुंचा है। 10 दिन में यह सातवीं बार है जब तेज आंधी और बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है। वहीं काश्तकारों का आरोप है कि आए दिन आसमानी आफत काश्तकारों की कमर तोड़ रही है, लेकिन अब तक तहसील प्रशासन ने मुआवजे के लिए क्षतिपूर्ति के आंकलन की तैयारियां शुरू नहीं की है।
स्थानीय निवासी काश्तकार कुंदन सिंह, दीवान सिंह चौहान, आनंद सिंह तोमर, कलम सिंह राय आदि का कहना है कि ओलावृष्टि से फसलें खेतों में लेट गई हैं। कड़ी मेहनत के बाद काश्तकारों ने महंगा लोन लेकर खेतों में टमाटर, मिर्च, अरबी, फरासबीन, लौकी, तोरई, भिंडी आदि की फसलें बोई थी, लेकिन बीते 10 दिन से क्षेत्र में आए दिन ओलावृष्टि हो रही है। उससे काश्तकारों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। ज्यादातर फसल नष्ट हो चुकी है। शीतोष्ण फलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं मैदानी इलाकों में आम और लीची की बागवानी प्रभावित हुई है। आरोप लगाया कि पटवारी चौकियों में नहीं बैठ तहसील में डेरा लगाए रहते हैं। ऐसे में उनकी समस्या की कोई सुध लेने वाला भी नहीं है।
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इन फसलों को नुकसान
ओलावृष्टि से शीतोष्ण फल पुलम, चुल्लू, खुमानी, नाशपाती, अखरोट के साथ ही आम, लीची और नकदी फसलें टमाटर, मिर्च, अरबी, फरासबीन, धनिया, बैंगन, तोरई, लौकी, भिंडी, टींडा आदि फसलों को भारी मात्रा में नुकसान पहुंचा है।
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यहां हुई ओलावृष्टि
कालसी क्षेत्र अंतर्गत नराया, लोरली, अस्टाड़, बोहा, सलगा, कोथी ,अस्टी, जामुवा, टिमरा, चंदोऊ, खमरोली, आरा, कोठा, तारली, कोटी, कोरूवा, हाजा, दसऊ में जमकर ओलावृष्टि हुई।


सभी पटवारियों को क्षतिपूर्ति का आंकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि अब तक क्षेत्र में आंकलन के लिए सर्वे शुरू नहीं हुआ है तो पटवारियों का जवाब तलब किया जाएगा।
- बीके तिवारी, एसडीएम, कालसी/त्यूनी/चकराता
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