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हीमोडायलिसिस मशीन का परीक्षण सफल
Updated Thu, 10 May 2018 02:28 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला
डोईवाला।
अब देश में ही निर्मित हीमोडायलिसिस मशीन से मरीजों का डायलिसिस कराना आसान होगा। बंगलूरू की रैनालक्सि कंपनी ने डायलिसिस की पहली स्वदेशी मशीन तैयार की हैं। मशीन बनाने में एसआरएचयू के बायोमेडिकल र्साइंटिस्ट डॉ. प्रकाश कैशवय्या का अहम योगदान रहा है।
स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी के कुलपति सलाहकार और बायोमेडिकल सांईटिस्ट डा प्रकाश कैशवय्या ने डायलिसिस की स्वदेशी मशीन तैयार करने से लेकर सफल परीक्षण तक मुख्य भूमिका का निर्वहन किया हैं। डॉ. प्रकाश कैशवय्या ने बताया कि मरीज के लिए डायलिसिस बहुत पीड़ादायक होता हैं और इसके लिए कई जगहों पर जाने के लिए विवश होना पड़ता हैं। बताया कि विदेशी मशीनों की तुलना में यह करीब 30 प्रतिशत सस्ती हैं। कीमत कम होने से बेसिक स्पेशियलिटी अस्पताल भी खरीद सकेंगे।
गौरतलब है कि डा. प्रकाश ने कई पेटेंट अपने नाम किए हैं। इसमें मुख्य रूप से उनके द्वारा डायलेजर के मल्टीपूल यूज के लिए बनाई गई डिवाईस हैं। डायलिसिस के दौरान डायलेजर ब्लड का फिल्ट्रेशन करता हैं। डायलेजर का इस्तेमाल सिर्फ एक ही बार किया जा सकता हैं। इसके कारण ही डायलिसिस की कीम बढ़ जाती हैं। डॉ. प्रकाश ने इस मुश्किल का हल निकाला। रिसर्च के बाद डायलेजर के लिए वो डिवाईस बनाई जिससे उसे क्लीनिंग, टेस्टिंग के बाद स्टीयराइल्ज कर संक्रमण के खतरे से बचाया जा सकता हैं। इससे एक डायलेजर को कम से कम आठ से दस बार डायलिसिस किया जा सकता हैं। डॉ. प्रकाश कैशवय्या एचआईएचटी के संस्थापक डॉ. स्वामीराम के अनुयायी हैं। निशुल्क स्वैच्छिक सेवा के मकसद से जौलीग्रांट आ गए।
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डोईवाला।
अब देश में ही निर्मित हीमोडायलिसिस मशीन से मरीजों का डायलिसिस कराना आसान होगा। बंगलूरू की रैनालक्सि कंपनी ने डायलिसिस की पहली स्वदेशी मशीन तैयार की हैं। मशीन बनाने में एसआरएचयू के बायोमेडिकल र्साइंटिस्ट डॉ. प्रकाश कैशवय्या का अहम योगदान रहा है।
स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी के कुलपति सलाहकार और बायोमेडिकल सांईटिस्ट डा प्रकाश कैशवय्या ने डायलिसिस की स्वदेशी मशीन तैयार करने से लेकर सफल परीक्षण तक मुख्य भूमिका का निर्वहन किया हैं। डॉ. प्रकाश कैशवय्या ने बताया कि मरीज के लिए डायलिसिस बहुत पीड़ादायक होता हैं और इसके लिए कई जगहों पर जाने के लिए विवश होना पड़ता हैं। बताया कि विदेशी मशीनों की तुलना में यह करीब 30 प्रतिशत सस्ती हैं। कीमत कम होने से बेसिक स्पेशियलिटी अस्पताल भी खरीद सकेंगे।
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गौरतलब है कि डा. प्रकाश ने कई पेटेंट अपने नाम किए हैं। इसमें मुख्य रूप से उनके द्वारा डायलेजर के मल्टीपूल यूज के लिए बनाई गई डिवाईस हैं। डायलिसिस के दौरान डायलेजर ब्लड का फिल्ट्रेशन करता हैं। डायलेजर का इस्तेमाल सिर्फ एक ही बार किया जा सकता हैं। इसके कारण ही डायलिसिस की कीम बढ़ जाती हैं। डॉ. प्रकाश ने इस मुश्किल का हल निकाला। रिसर्च के बाद डायलेजर के लिए वो डिवाईस बनाई जिससे उसे क्लीनिंग, टेस्टिंग के बाद स्टीयराइल्ज कर संक्रमण के खतरे से बचाया जा सकता हैं। इससे एक डायलेजर को कम से कम आठ से दस बार डायलिसिस किया जा सकता हैं। डॉ. प्रकाश कैशवय्या एचआईएचटी के संस्थापक डॉ. स्वामीराम के अनुयायी हैं। निशुल्क स्वैच्छिक सेवा के मकसद से जौलीग्रांट आ गए।
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