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जलापूर्ति नहीं हुई तो कहां खर्च हुआ लाखों का बजट
Updated Sat, 21 Apr 2018 02:24 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश।
करीब चार साल पहले यमकेश्वर में आई आपदा में क्षतिग्रस्त फूलचट्टी, रत्तापानी, घट्टूगाड़ पेयजल योजना मद में 12 लाख खर्चने के बावजूद जल निगम स्थानीय ग्रामीणों को पानी नहीं दे पाया। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी स्थानीय ग्रामीण सुदूर पेयजल स्रोतों और हेंवल नदी से पानी ढोने को मजबूर हैं। वर्ष 2012-13 में यमकेश्वर प्रखंड के करीब डेढ़ सौ परिवारों की पेयजल सुविधा के लिए जल निगम कोटद्वार डिवीजन ने ग्राम पंचायत मराल के खंड ग्राम घट्टूघाड़, रत्तापानी, फूलचट्टी के लिए पेयजल योजना तैयार की थी।
वर्ष 2014 के अगस्त माह में क्षेत्र में आई आपदा में उक्त पेयजल योजना कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसकी मरम्मत के लिए वर्ष 2015 में आपदा मद में जल निगम को 12 लाख की धनराशि मिली थी। विभाग का कहना है कि उक्त धनराशि पेयजल योजना की मरम्मत पर खर्च कर दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय लोगों को विभाग पानी नहीं मिल पा रहा है। पेयजल लाइनों पर जलापूर्ति नहीं होने से उन्हें सुदूर प्राकृतिक जल स्रोतों और हेंवल नदी से पानी ढोकर गुजर बसर करना पड़ रहा है।
जलापूर्ति की समस्या से उक्त तीनों गांवों के लगभग डेढ़ सौ परिवार और राजकीय प्राथमिक विद्यालय रत्तापानी व घट्टूगाड़ और उच्च प्राथमिक विद्यालय घट्टूगाड़ में अध्ययनरत बच्चे जूझ रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सत्यपाल सिंह राणा, रत्तापानी के नरेंद्र सिंह राणा, होशियार सिंह भंडारी, फूलचट्टी के मनोज सिंह नेगी, देवेंद्र नेगी, घट्टूगाड़ निवासी कलम सिंह राणा, मुकेश चौहान आदि का आरोप है कि विभाग ने मरम्मत के लिए आई धनराशि को ठिकाने लगा दिया गया है। पेयजल लाइनें अभी भी क्षतिग्रस्त हैं, जिसके कारण लोगों के घरों में जलापूर्ति नहीं हो पा रही है और उन्हें जरुरत का पानी बाहर से ढोकर लाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि अधिकांश परिवार हेंवल नदी का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि विभाग लाइनों की मरम्मत किए बिना धनराशि खर्च होने की बात कर रहा है।
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कोट्स
क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन की मरम्मत आपदा मद से करवा ली गई थी। यदि कहीं लाइनें क्षतिग्रस्त हुई हैं तो दो दिन में लाइनों का निरीक्षण कराकर मरम्मत कार्य कर लिया जाएगा।
- शत्रुघ्न त्यागी, अवर अभियंता जल निगम, कोटद्वार डिवीजन।
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करीब चार साल पहले यमकेश्वर में आई आपदा में क्षतिग्रस्त फूलचट्टी, रत्तापानी, घट्टूगाड़ पेयजल योजना मद में 12 लाख खर्चने के बावजूद जल निगम स्थानीय ग्रामीणों को पानी नहीं दे पाया। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी स्थानीय ग्रामीण सुदूर पेयजल स्रोतों और हेंवल नदी से पानी ढोने को मजबूर हैं। वर्ष 2012-13 में यमकेश्वर प्रखंड के करीब डेढ़ सौ परिवारों की पेयजल सुविधा के लिए जल निगम कोटद्वार डिवीजन ने ग्राम पंचायत मराल के खंड ग्राम घट्टूघाड़, रत्तापानी, फूलचट्टी के लिए पेयजल योजना तैयार की थी।
वर्ष 2014 के अगस्त माह में क्षेत्र में आई आपदा में उक्त पेयजल योजना कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसकी मरम्मत के लिए वर्ष 2015 में आपदा मद में जल निगम को 12 लाख की धनराशि मिली थी। विभाग का कहना है कि उक्त धनराशि पेयजल योजना की मरम्मत पर खर्च कर दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय लोगों को विभाग पानी नहीं मिल पा रहा है। पेयजल लाइनों पर जलापूर्ति नहीं होने से उन्हें सुदूर प्राकृतिक जल स्रोतों और हेंवल नदी से पानी ढोकर गुजर बसर करना पड़ रहा है।
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जलापूर्ति की समस्या से उक्त तीनों गांवों के लगभग डेढ़ सौ परिवार और राजकीय प्राथमिक विद्यालय रत्तापानी व घट्टूगाड़ और उच्च प्राथमिक विद्यालय घट्टूगाड़ में अध्ययनरत बच्चे जूझ रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सत्यपाल सिंह राणा, रत्तापानी के नरेंद्र सिंह राणा, होशियार सिंह भंडारी, फूलचट्टी के मनोज सिंह नेगी, देवेंद्र नेगी, घट्टूगाड़ निवासी कलम सिंह राणा, मुकेश चौहान आदि का आरोप है कि विभाग ने मरम्मत के लिए आई धनराशि को ठिकाने लगा दिया गया है। पेयजल लाइनें अभी भी क्षतिग्रस्त हैं, जिसके कारण लोगों के घरों में जलापूर्ति नहीं हो पा रही है और उन्हें जरुरत का पानी बाहर से ढोकर लाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि अधिकांश परिवार हेंवल नदी का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि विभाग लाइनों की मरम्मत किए बिना धनराशि खर्च होने की बात कर रहा है।
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क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन की मरम्मत आपदा मद से करवा ली गई थी। यदि कहीं लाइनें क्षतिग्रस्त हुई हैं तो दो दिन में लाइनों का निरीक्षण कराकर मरम्मत कार्य कर लिया जाएगा।
- शत्रुघ्न त्यागी, अवर अभियंता जल निगम, कोटद्वार डिवीजन।