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अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती के मौके पर संगम नगरी में पूजा-अर्चना
Updated Wed, 18 Apr 2018 10:40 PM IST
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देवप्रयाग। अक्षय तृतीया के मौके पर संगम नगरी देवप्रयाग में तीर्थ पुरोहित समाज ने भगवान बदरीनाथ का स्मरण कर सुरक्षित और सुगम चारधाम यात्रा की प्रार्थना की। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने संगम पर गंगा स्नान भी किया।
आचार्य भास्कर जोशी के अनुसार तीर्थ यात्री आज से ही भागीरथी और अलकनंदा नदी तट से चार धामों की यात्रा को प्रस्थान करते थे। संस्कृति महाविद्यालय के प्राचार्य डा. शैलेंद्र नारायण कोटियाल ने बताया कि अक्षय तृतीया पर देवप्रयाग तीर्थ में भगवान श्री रघुनाथ की 108 परिक्रमा की जाती है। मान्यता है कि महात्मा बाबा सुंदरनाथ ने अक्षय तृतीया को देवप्रयाग से ही भगवान बदरी विशाल को प्रसाद के रुप में चने की दाल, पंचमेवा व तुलसी के पत्ते चढ़ाने की परंपरा की शुरुआत की थी।
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लाइन परशुराम जयंती की खबर में जोड़नी है।
देवप्रयाग। परशुराम जयंती पर गंगा तट स्थित उनकी तपस्थली रामतीर्थ में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पूजन किया। शांता नदी तट स्थित मंगला माता मंदिर में भी साधु संतों , तीर्थपुरोहितों व श्रद्धालुओं ने निर्विघ्न तीर्थयात्रा के लिए विशेष हवन और पूजा अर्चना भी की।
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आचार्य भास्कर जोशी के अनुसार तीर्थ यात्री आज से ही भागीरथी और अलकनंदा नदी तट से चार धामों की यात्रा को प्रस्थान करते थे। संस्कृति महाविद्यालय के प्राचार्य डा. शैलेंद्र नारायण कोटियाल ने बताया कि अक्षय तृतीया पर देवप्रयाग तीर्थ में भगवान श्री रघुनाथ की 108 परिक्रमा की जाती है। मान्यता है कि महात्मा बाबा सुंदरनाथ ने अक्षय तृतीया को देवप्रयाग से ही भगवान बदरी विशाल को प्रसाद के रुप में चने की दाल, पंचमेवा व तुलसी के पत्ते चढ़ाने की परंपरा की शुरुआत की थी।
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लाइन परशुराम जयंती की खबर में जोड़नी है।
देवप्रयाग। परशुराम जयंती पर गंगा तट स्थित उनकी तपस्थली रामतीर्थ में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पूजन किया। शांता नदी तट स्थित मंगला माता मंदिर में भी साधु संतों , तीर्थपुरोहितों व श्रद्धालुओं ने निर्विघ्न तीर्थयात्रा के लिए विशेष हवन और पूजा अर्चना भी की।
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