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मुख्यमंत्री के आदेश पर भी नहीं मिला आईटीआई को भवन
Updated Sun, 15 Apr 2018 01:51 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान ढालवाला को तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अपना भवन नहीं मिल पाया है। लिहाजा आईटीआई का संचालन उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ के जीर्णशीर्ण गोदाम में किया जा रहा है। मजेदार बात यह है कि संस्थान को राज्य सरकार के उपक्रम हिल्ट्रान की खाली पड़ी बिल्डिंग में शिफ्ट करने को लेकर ढाई साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री की ओर से निदेशक प्रशिक्षण विभाग उत्तराखंड, हल्द्वानी को बाकायदा लिखित आदेश जारी कर चुके हैं।
इसके बावजूद भी आईटीआई हिल्ट्रान बिल्डिंग में शिफ्ट नहीं हो पाई है। गौरतलब है कि राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान ढालवाला को 1985 में मंजूरी मिली थी। मगर 33 वर्ष पुरानी आईटीआई को आज तक अपना भवन नहीं मिल पाया है। आईटीआई को शुरुआती 22 वर्षों तक मुनिकीरेती के चौदहबीघा स्थित एक निजी भवन में किराए पर संचालित किया गया। वर्ष 2007 में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान को ढालवाला स्थित उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ के खाली पड़े गोदाम में शिफ्ट कर दिया गया। बीते 11 साल से आईटीआई सहकारी संघ के जीर्णशीर्ण हो चुके गोदाम में जैसे तैसे संचालित हो रही है।
डीएम की संस्तुति और सीएम का आदेश ठेंगे पर
आईटीआई ढालवाला को हिल्ट्रान की बिल्डिंग में शिफ्ट करने के बाबत जिलाधिकारी टिहरी शासन को बाकायदा इसकी संस्तुति कर चुके हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस बाबत 10 दिसंबर-2015 को बाकायदा प्रशिक्षण तकनीकी शिक्षा विभाग के निदेशक को आईटीआई को हिल्ट्रान के भवन में शिफ्ट करने का आदेश जारी किया जा चुका है। मगर ढाई साल बाद आदेश पर अमल नहीं हो पाया।
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10 साल से नहीं मिली फॉरेस्ट की भूमि
हिल्ट्रान बिल्डिंग की मांग से पहले से आईटीआई के लिए संस्थान प्रशासन द्वारा वन विभाग से भवन निर्माण के लिए मांग कर रहा है। वर्ष 2008 से चली आ रही इस मांग के मद्देनजर आईटीआई प्रशासन ने नरेंद्रनगर वन प्रभाग के अंतर्गत शिवपुरी रेंज की कक्ष संख्या एक में वनभूमि को चिह्नित भी किया, जिसका बाकायदा दोनों विभागों के अधिकारी भूमि का संयुक्त निरीक्षण भी कर चुके हैं। मगर वर्षों बाद आईटीआई को उक्त भूमि भी हस्तांतरित नहीं हो पाई है।
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राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान ढालवाला को तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अपना भवन नहीं मिल पाया है। लिहाजा आईटीआई का संचालन उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ के जीर्णशीर्ण गोदाम में किया जा रहा है। मजेदार बात यह है कि संस्थान को राज्य सरकार के उपक्रम हिल्ट्रान की खाली पड़ी बिल्डिंग में शिफ्ट करने को लेकर ढाई साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री की ओर से निदेशक प्रशिक्षण विभाग उत्तराखंड, हल्द्वानी को बाकायदा लिखित आदेश जारी कर चुके हैं।
इसके बावजूद भी आईटीआई हिल्ट्रान बिल्डिंग में शिफ्ट नहीं हो पाई है। गौरतलब है कि राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान ढालवाला को 1985 में मंजूरी मिली थी। मगर 33 वर्ष पुरानी आईटीआई को आज तक अपना भवन नहीं मिल पाया है। आईटीआई को शुरुआती 22 वर्षों तक मुनिकीरेती के चौदहबीघा स्थित एक निजी भवन में किराए पर संचालित किया गया। वर्ष 2007 में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान को ढालवाला स्थित उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ के खाली पड़े गोदाम में शिफ्ट कर दिया गया। बीते 11 साल से आईटीआई सहकारी संघ के जीर्णशीर्ण हो चुके गोदाम में जैसे तैसे संचालित हो रही है।
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डीएम की संस्तुति और सीएम का आदेश ठेंगे पर
आईटीआई ढालवाला को हिल्ट्रान की बिल्डिंग में शिफ्ट करने के बाबत जिलाधिकारी टिहरी शासन को बाकायदा इसकी संस्तुति कर चुके हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस बाबत 10 दिसंबर-2015 को बाकायदा प्रशिक्षण तकनीकी शिक्षा विभाग के निदेशक को आईटीआई को हिल्ट्रान के भवन में शिफ्ट करने का आदेश जारी किया जा चुका है। मगर ढाई साल बाद आदेश पर अमल नहीं हो पाया।
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10 साल से नहीं मिली फॉरेस्ट की भूमि
हिल्ट्रान बिल्डिंग की मांग से पहले से आईटीआई के लिए संस्थान प्रशासन द्वारा वन विभाग से भवन निर्माण के लिए मांग कर रहा है। वर्ष 2008 से चली आ रही इस मांग के मद्देनजर आईटीआई प्रशासन ने नरेंद्रनगर वन प्रभाग के अंतर्गत शिवपुरी रेंज की कक्ष संख्या एक में वनभूमि को चिह्नित भी किया, जिसका बाकायदा दोनों विभागों के अधिकारी भूमि का संयुक्त निरीक्षण भी कर चुके हैं। मगर वर्षों बाद आईटीआई को उक्त भूमि भी हस्तांतरित नहीं हो पाई है।