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15 हजार की आबादी को पानी का संकट
Updated Fri, 30 Mar 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/त्यूनी।
गर्मियां शुरू होते ही चकराता प्रखंड के ज्यादातर गांवों में पानी का संकट गहराया हुआ है। क्षेत्र में करीब 50 बूढ़ी पेयजल योजनाएं ऐसी हैं जिनकी लंबे समय से मरम्मत नहीं हुई है। ऐसे में अब इन योजनाओं का गांवों तक पानी पहुंचाने में दम फूलने लगा है। नतीजतन, ग्रामीणों को पानी के संकट से दो-चार होना पड़ रहा है। लोगों को गाड-गदेरों से पानी ढोना पड़ रहा है। गर्मियां होने से अब जलस्रोतों में भी पानी का स्तर कम हो गया है। इसके चलते करीब 15 हजार की आबादी के सामने पानी का संकट बना हुआ है।
स्थानीय निवासी मोहन लाल, रामलाल, वीरेंद्र, बलवीर आदि का कहना है कि क्षेत्र के ज्यादातर गांवों में 30-35 साल पूर्व पेयजल लाइन बिछाई गई है, लेकिन अब यह लाइनें आबादी के हिसाब से छोटी पड़ गई है। कई जगहों पर पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त पड़ी है। इससे लो प्रेशर की भी समस्या बनी रहती है। लोगों को दो किमी दूर खड्ड से पानी ढोना पड़ रहा है। ऐसे में शिकायत के बाद भी जल संस्थान लाइनों की मरम्मत नहीं करा रहा है। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे गर्मियां बढ़ेगी वैसे ही गांव में पानी का संकट भी गहराता जाएगा।
इन गांवों की लाइनें है क्षतिग्रस्त
क्षेत्र की अपर कुल्हा, भ्यूलोग, रड़ू, कथियान, हरटाड़, चौरालाणी, भाटगढ़ी, कूणा, बागी, मेंद्रथ, पुरटाड़, ट्यूटाड़, कांडा, नीनूस, चौसाल, मेघाटू, प्यूनल, कोटी, रिसाणू, ठारठा, पुनिंग, नोहरा, कावा, पिंगवा, सावड़ा, दारागाड़ समेत 50 गांवों की पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं।
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क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों की रिपोर्ट मांगी गई है। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं।
- एसके श्रीवास्तव, सहायक अभियंता, जल संस्थान
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गर्मियां शुरू होते ही चकराता प्रखंड के ज्यादातर गांवों में पानी का संकट गहराया हुआ है। क्षेत्र में करीब 50 बूढ़ी पेयजल योजनाएं ऐसी हैं जिनकी लंबे समय से मरम्मत नहीं हुई है। ऐसे में अब इन योजनाओं का गांवों तक पानी पहुंचाने में दम फूलने लगा है। नतीजतन, ग्रामीणों को पानी के संकट से दो-चार होना पड़ रहा है। लोगों को गाड-गदेरों से पानी ढोना पड़ रहा है। गर्मियां होने से अब जलस्रोतों में भी पानी का स्तर कम हो गया है। इसके चलते करीब 15 हजार की आबादी के सामने पानी का संकट बना हुआ है।
स्थानीय निवासी मोहन लाल, रामलाल, वीरेंद्र, बलवीर आदि का कहना है कि क्षेत्र के ज्यादातर गांवों में 30-35 साल पूर्व पेयजल लाइन बिछाई गई है, लेकिन अब यह लाइनें आबादी के हिसाब से छोटी पड़ गई है। कई जगहों पर पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त पड़ी है। इससे लो प्रेशर की भी समस्या बनी रहती है। लोगों को दो किमी दूर खड्ड से पानी ढोना पड़ रहा है। ऐसे में शिकायत के बाद भी जल संस्थान लाइनों की मरम्मत नहीं करा रहा है। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे गर्मियां बढ़ेगी वैसे ही गांव में पानी का संकट भी गहराता जाएगा।
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इन गांवों की लाइनें है क्षतिग्रस्त
क्षेत्र की अपर कुल्हा, भ्यूलोग, रड़ू, कथियान, हरटाड़, चौरालाणी, भाटगढ़ी, कूणा, बागी, मेंद्रथ, पुरटाड़, ट्यूटाड़, कांडा, नीनूस, चौसाल, मेघाटू, प्यूनल, कोटी, रिसाणू, ठारठा, पुनिंग, नोहरा, कावा, पिंगवा, सावड़ा, दारागाड़ समेत 50 गांवों की पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं।
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क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों की रिपोर्ट मांगी गई है। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं।
- एसके श्रीवास्तव, सहायक अभियंता, जल संस्थान