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खतरे की जद में झलिया गांव के 22 मकान

Tue, 13 Mar 2018 10:04 PM IST
Updated Tue, 13 Mar 2018 10:04 PM IST
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खतरे की जद में झलिया गांव के 22 मकान

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देवाल। ब्लाक के दूरस्थ गांव झलिया में पहाड़ी से लगातार भूस्खलन हो रहा है। भूस्खलन की जद में गांव के 22 मकान हैं। गांव का दौरा कर लौटे नायब तहसीलदार ओमवीर के अनुसार गांव का विस्थापन किया जाना जरूरी है। ग्रामीण रात में गांव से दूर छानियों में रात बिता रहे हैं। ग्रामीणों ने मंगलवार को 20 किमी पैदल दूरी नापकर थराली तहसील प्रशासन ने विस्थापन की मांग की।

नायब तहसीलदार ओमवीर ने बताया कि भूस्खलन से गांव में 1 गोशाला क्षतिग्रस्त हो गई है, जबकि एक मवेशी की दबने से मौत हो गई। किसानों के कई खेत भी मलबे से पटे हैं। साथ ही गांव के 22 घर भूस्खलन की जद में हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण गांव से एक किमी दूर छानियों में रात बिता रहे हैं। लगातार हो रहे पहाड़ी से भूस्खलन की रिपोर्ट देने और राहत-बचाव की मांग को लेकर मंगलवार को झलिया के ग्रामीण 20 किमी पैदल चलकर खेता गांव पहुंचे। इसके बाद यहां से थराली पहुंचकर ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन ने मदद की गुहार लगाई। गांव के पूर्व प्रधान भाग चंद्र सिंह, हरमल के प्रधान पुष्कर सिंह गड़िया, प्रेम सिंह आदि ने तहसीलदार माणिक लाल भेंतवाल को बताया कि मंगलवार की सुबह पहाड़ी से आया मलबा तीन मकानों में घुस गया है। ऐसे में गांव खतरे से खाली नहीं है। ग्रामीणों ने विस्थापन की मांग की है। तहसीलदार माणिक लाल भेंतवाल ने बताया कि मामले में कार्रवाई की जा रही है।
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