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्रामीणों ने खुद बनाई अपनी राह
Updated Tue, 06 Mar 2018 01:24 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला
विकासनगर। मदर्सू, कांडोई और भदोगी के ग्रामीणों ने सरकारी सिस्टम को आइना दिखाने का काम किया है। जब कई बार की गुहार के बाद भी विभाग ने इन तीनों गांवों तक सड़क निर्माण में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई तो ग्रामीण खुद ही बेलचा, फावड़ा और गैंती लेकर चल दिए सड़क निर्माण कार्य में।
कड़ी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने पहाड़ी का सीना चीर कर गांव तक पैदल और दुपहिया वाहनों के लिए मार्ग का निर्माण कर दिया। इन गांवों में 60 परिवार निवास करते हैं। ग्रामीण रमेश चंद आजाद, जयपाल सिंह तोमर, कपिल तोमर, सुधीर तोमर, दिनेश आदि का कहना है कि रास्ता न होने के कारण ग्रामीणों को पगडंडी के सहारे गांवों तक पहुंचना पड़ता था। राशन और अन्य जरूरी सामान भी पीठ पर लाद गांव तक पहुंचाना पड़ता था। मार्ग निर्माण के लिए कई बार ग्रामीणों ने विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष से गुहार लगाई लेकिन कोई राहत नहीं मिल सकी। अब उन्हें खुद ही मार्ग निर्माण करना पड़ा।
उधर इस संबंध में एसडीएम जितेंद्र कुमार ने कहा कि ग्रामीणों का प्रयास सराहनीय है। मार्ग के सुधारीकरण के प्रयास करने के लिए संबंधित विभाग को पत्र लिखा जाएगा।
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विकासनगर। मदर्सू, कांडोई और भदोगी के ग्रामीणों ने सरकारी सिस्टम को आइना दिखाने का काम किया है। जब कई बार की गुहार के बाद भी विभाग ने इन तीनों गांवों तक सड़क निर्माण में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई तो ग्रामीण खुद ही बेलचा, फावड़ा और गैंती लेकर चल दिए सड़क निर्माण कार्य में।
कड़ी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने पहाड़ी का सीना चीर कर गांव तक पैदल और दुपहिया वाहनों के लिए मार्ग का निर्माण कर दिया। इन गांवों में 60 परिवार निवास करते हैं। ग्रामीण रमेश चंद आजाद, जयपाल सिंह तोमर, कपिल तोमर, सुधीर तोमर, दिनेश आदि का कहना है कि रास्ता न होने के कारण ग्रामीणों को पगडंडी के सहारे गांवों तक पहुंचना पड़ता था। राशन और अन्य जरूरी सामान भी पीठ पर लाद गांव तक पहुंचाना पड़ता था। मार्ग निर्माण के लिए कई बार ग्रामीणों ने विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष से गुहार लगाई लेकिन कोई राहत नहीं मिल सकी। अब उन्हें खुद ही मार्ग निर्माण करना पड़ा।
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उधर इस संबंध में एसडीएम जितेंद्र कुमार ने कहा कि ग्रामीणों का प्रयास सराहनीय है। मार्ग के सुधारीकरण के प्रयास करने के लिए संबंधित विभाग को पत्र लिखा जाएगा।
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