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चौकियां जर्जर, कैसे होगी वनों की रक्षा
Updated Fri, 16 Feb 2018 01:33 AM IST
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ब्यूरो/त्यूनी/साहिया।
15 फरवरी से फायर सीजन शुरू हो चुका है। वन विभाग ने इस सीजन वनाग्नि से निपटने के लिए तमाम प्रकार के इंतजाम होने के दावे किए हैं, लेकिन धरातल पर हकीकत कोसो दूर नजर आ रही है। जिन चौकियों के भरोसे विभाग जंगलों की सुरक्षा के दावे कर रहा हैं। उनमें से कई चौकियां लंबे समय से जर्जरहाल पड़ी हैं। विभागीय उपेक्षा की शिकार इन चौकियों में से कई खंडहर में तब्दील हो गई हैं। ऐसे में फायर सीजन के दौरान किस तरह से वन विभाग वनों की रक्षा करेगा? यह बड़ा सवाल है।
जंगलों की रक्षा के लिए जौनसार बावर के कालसी और चकराता में ब्लॉक में कुल 49 वन चौकियां है। जिनका निर्माण ब्रिटिशकाल में किया गया था। लेकिन कई सालों से इन चौकियों की विभाग ने कोई सुध नहीं ली है। जिसके चलते यह चौकियां जर्जरहाल हो गई हैं। किसी चौकी में दरारें पड़ी हैं तो कहीं पर दरवाजें ही नहीं है। जिस कारण चौकियों में वन कर्मी रुकना नहीं चाहते। रात के समय जंगलों की सुरक्षा रामभरोसे हो जाती है। बीते साल भी चौकियां जर्जरहाल होने के कारण फायर सीजन के दौरान वन विभाग को खासा मशक्कत करनी पड़ी थी।
कई हेक्टेयर में फैला है जंगल
जौनसार बावर के 36 हेक्टयर भू-भाग में आरक्षित जंगल है। जिनमें बेशकीमती देवदार और साल के साथ ही जड़ी-बूटियों का खजाना भी छिपा है। इन्हीं वन चौकियों की मदद से जंगलों में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। लेकिन लंबे समय से यह चौकियां विभागीय उपेक्षा का शिकार बनी हुई है।
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ये चौकियां हैं खस्ताहाल
चातरा, प्यूनल, डेरसा, कथियान, कोटी, कनासर, बुधेर, पुनहा, पोखरी, माख्टी, नागथात, चुराड़ी, दुराड़ी, त्यूनी, कालसी, मुंडाली, खंडबा, कुनैन, थुईनोल, डेरसा, नागथात, साहिया, लालढांग, खाटुवा, खडंबा, कोठा तारली, दार्मिगाड़ समेत 49 वन चौकियां जर्जरहाल हैं।
जर्जर चौकियां की मरम्मत का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। लेकिन अब तक धनराशि अवमुक्त नहीं हो सकी है। बजट मिलते ही चौकियों की मरम्मत कराई जाएगी।
- एसके काला उप प्रभागीय वनाधिकारी
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15 फरवरी से फायर सीजन शुरू हो चुका है। वन विभाग ने इस सीजन वनाग्नि से निपटने के लिए तमाम प्रकार के इंतजाम होने के दावे किए हैं, लेकिन धरातल पर हकीकत कोसो दूर नजर आ रही है। जिन चौकियों के भरोसे विभाग जंगलों की सुरक्षा के दावे कर रहा हैं। उनमें से कई चौकियां लंबे समय से जर्जरहाल पड़ी हैं। विभागीय उपेक्षा की शिकार इन चौकियों में से कई खंडहर में तब्दील हो गई हैं। ऐसे में फायर सीजन के दौरान किस तरह से वन विभाग वनों की रक्षा करेगा? यह बड़ा सवाल है।
जंगलों की रक्षा के लिए जौनसार बावर के कालसी और चकराता में ब्लॉक में कुल 49 वन चौकियां है। जिनका निर्माण ब्रिटिशकाल में किया गया था। लेकिन कई सालों से इन चौकियों की विभाग ने कोई सुध नहीं ली है। जिसके चलते यह चौकियां जर्जरहाल हो गई हैं। किसी चौकी में दरारें पड़ी हैं तो कहीं पर दरवाजें ही नहीं है। जिस कारण चौकियों में वन कर्मी रुकना नहीं चाहते। रात के समय जंगलों की सुरक्षा रामभरोसे हो जाती है। बीते साल भी चौकियां जर्जरहाल होने के कारण फायर सीजन के दौरान वन विभाग को खासा मशक्कत करनी पड़ी थी।
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कई हेक्टेयर में फैला है जंगल
जौनसार बावर के 36 हेक्टयर भू-भाग में आरक्षित जंगल है। जिनमें बेशकीमती देवदार और साल के साथ ही जड़ी-बूटियों का खजाना भी छिपा है। इन्हीं वन चौकियों की मदद से जंगलों में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। लेकिन लंबे समय से यह चौकियां विभागीय उपेक्षा का शिकार बनी हुई है।
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ये चौकियां हैं खस्ताहाल
चातरा, प्यूनल, डेरसा, कथियान, कोटी, कनासर, बुधेर, पुनहा, पोखरी, माख्टी, नागथात, चुराड़ी, दुराड़ी, त्यूनी, कालसी, मुंडाली, खंडबा, कुनैन, थुईनोल, डेरसा, नागथात, साहिया, लालढांग, खाटुवा, खडंबा, कोठा तारली, दार्मिगाड़ समेत 49 वन चौकियां जर्जरहाल हैं।
जर्जर चौकियां की मरम्मत का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। लेकिन अब तक धनराशि अवमुक्त नहीं हो सकी है। बजट मिलते ही चौकियों की मरम्मत कराई जाएगी।
- एसके काला उप प्रभागीय वनाधिकारी