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त्रिवेणी में स्थायी जलधारा लाने में सरकार की दिलचस्पी नहीं

Wed, 14 Feb 2018 02:12 AM IST
Updated Wed, 14 Feb 2018 02:12 AM IST
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त्रिवेणी में स्थायी जलधारा लाने में सरकार की दिलचस्पी नहीं
ब्यूरो/ऋषिकेश। त्रिवेणीघाट पर गंगा की स्थायी जलधारा लाने व श्रद्धालुओं की सुविधा की ओर सरकार अब तक कोई ध्यान नहीं दे पाई है। इसके लिए सिंचाई विभाग द्वारा कराई गई मॉडल स्टडी में कंसल्टेंसी एजेंसी ने प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। रिपोर्ट में त्रिवेणी से काफी दूर बह रही जलधारा को घाटों तक लाने के लिए उपाय भी सुझाए गए थे। महकमे की ओर से योजना को सैद्धांतिक स्वीकृति तो मिली मगर सरकार मंजूरी नहीं दे पाई। इसके बाद इसे केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना में रखा गया, मगर वहां से भी कुछ हाथ नहीं लगा। जिससे इसका क्रियान्वयन फिलहाल अटक गया है। अब महकमे ने इसे अर्द्धकुंभ मेले में प्रस्तावित किया है।
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त्रिवेणीघाट से गंगा की स्थायी जलधारा लगभग दो दशक से दूर बह रही है। साल के महज तीन महीने बरसात के दिनों को छोड़कर अवशेष नौ महीने जलधारा मुख्य घाटों से करीब सौ से डेढ़ मीटर दूर बहती है, जिसके कारण तीर्थयात्रियों को पर्व-त्योहारों और रोजमर्रा के दिनों में डुबकी लगाने, आचमन आदि मेें दिक्कतें आती हैं। इस बीच घाट और जलधारा के बीच पथरीला टापू बन जाने से खासकर महिलाओं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को इससे खासी दिक्कतें आती हैं।
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इतना ही नहीं 2011 से अब तक दो मुख्यमंत्री इसकी घोषणा कर चुके हैं, मगर बावजूद इसके योजना का कहीं अता पता नहीं है। सिंचाई विभाग द्वारा सीएम स्तर से घोषणा के बाद करीब पांच साल पहले जलधारा को स्थायी तौर पर घाट तक लाने के लिए पहली मर्तबा मॉडल स्टडी का प्रस्ताव बनाया था, जिसे किसी मंजूरी मिल पाई थी। कंसल्टेंसी एजेंसी पीकेएस इंफ्रा की रिपोर्ट के मुताबिक योजना को धरातल पर उतारने और गंगा की जलधारा को त्रिवेणी की ओर मोड़ने के लिए गंगा और चंद्रभागा नदी के मुहाने पर मायाकुंड क्षेत्र में नदी के किनारे कंक्रीट से आकर्षक स्पर तैयार किए जाने थे। जिनकी मदद से जलधारा बारों माह त्रिवेणीघाट से होकर गुजरती। महकमे ने इस योजना में अनुमानित ढाई करोड़ की लागत बताई थी, मगर इसके प्रस्ताव को राज्य सरकार से मंजूरी नहीं मिल पाई।
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कोट्स
विभागीय अधिशासी अभियंता डीके सिंह ने बताया कि योजना को राज्य सरकार व केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत वित्तीय मंजूरी नहीं मिल पाई है। लिहाजा अब इसे अर्द्धकुंभ मेले में प्रस्तावित किया गया है।
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