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आयो रे आयो वसंत ऋतु आयो...
Updated Tue, 23 Jan 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला
त्यूनी/नागथात।
ऋतुराज वसंत के आगमन के साथ ही महासू नगरी हनोल में सोमवार को पांच दिवसीय वसंतोत्सव का शुभारंभ हो गया। मंदिर परिसर में लोक संस्कृति के कई रंग देखने को मिले। कार सेवकों ने लोक गीतों के माध्यम से महासू देवता की गाथाओं का बखान किया। देव परियों ने मंदिर परिसर में लोक नृत्य किया। प्रसाद स्वरूप श्रद्धालुओं को गेहूं की डाल भेंट की गई।
चातरा, हनोल, ठडियार, चातरीगाड समेत कई जगहों से लोग देव दर्शन के लिए महासू मंदिर हनोल पहुंचे। सुबह के समय देवता की विशेष पूजा-अर्चना की गई। देव परियों ने आयो रे आयो वसंत ऋतु आयो, मधुमति को लायो डारो रे मेरे अंगना में... समेत कई लोक गीतों पर नृत्य की प्रस्तुति दी। इस मौक पर बजीर दीवान सिंह, जयपाल सिंह, मोहन लाल सेमवाल, गोविंद राम, नारायण दास, भरमदास नाकचंद, अनिता, भद्रा आदि मौजूद रहे।
मैंद्रथ स्थित बाशिक देवता मंदिर, ठडियार स्थित पबाशी देवता में भी देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। ढोल-दमाऊ की थाप पर देवता की विशेष पूजा-अर्चना की गई। कार सेवकों ने गीतों के माध्यम से महासू देवता की उत्पत्ति पर प्रकाश डाला।
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लक्सियार, लखवाड़, बिसोई, थैना महासू देवता मंदिरों में भी देवता को हरियाली चढ़ाने को लोग आतुर नजर आए। देव परियों ने आंगन में नृत्य किया। माथा टेक कर सुख शांति की प्रार्थना की। इस मौके पर रघुवीर तोमर, भजन सिंह तोमर, गुमान सिंह तोमर, गजेंद्र तोमर, खेम सिंह, रोशन सिंह, सुशील, दीवान सिंह, महावीर, मोहन सिंह, देवमाली शूरवीर सिंह, कांतिराम, युद्धवीर सिंह, मिजान आदि मौजूद रहे।
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त्यूनी/नागथात।
ऋतुराज वसंत के आगमन के साथ ही महासू नगरी हनोल में सोमवार को पांच दिवसीय वसंतोत्सव का शुभारंभ हो गया। मंदिर परिसर में लोक संस्कृति के कई रंग देखने को मिले। कार सेवकों ने लोक गीतों के माध्यम से महासू देवता की गाथाओं का बखान किया। देव परियों ने मंदिर परिसर में लोक नृत्य किया। प्रसाद स्वरूप श्रद्धालुओं को गेहूं की डाल भेंट की गई।
चातरा, हनोल, ठडियार, चातरीगाड समेत कई जगहों से लोग देव दर्शन के लिए महासू मंदिर हनोल पहुंचे। सुबह के समय देवता की विशेष पूजा-अर्चना की गई। देव परियों ने आयो रे आयो वसंत ऋतु आयो, मधुमति को लायो डारो रे मेरे अंगना में... समेत कई लोक गीतों पर नृत्य की प्रस्तुति दी। इस मौक पर बजीर दीवान सिंह, जयपाल सिंह, मोहन लाल सेमवाल, गोविंद राम, नारायण दास, भरमदास नाकचंद, अनिता, भद्रा आदि मौजूद रहे।
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मैंद्रथ स्थित बाशिक देवता मंदिर, ठडियार स्थित पबाशी देवता में भी देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। ढोल-दमाऊ की थाप पर देवता की विशेष पूजा-अर्चना की गई। कार सेवकों ने गीतों के माध्यम से महासू देवता की उत्पत्ति पर प्रकाश डाला।
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लक्सियार, लखवाड़, बिसोई, थैना महासू देवता मंदिरों में भी देवता को हरियाली चढ़ाने को लोग आतुर नजर आए। देव परियों ने आंगन में नृत्य किया। माथा टेक कर सुख शांति की प्रार्थना की। इस मौके पर रघुवीर तोमर, भजन सिंह तोमर, गुमान सिंह तोमर, गजेंद्र तोमर, खेम सिंह, रोशन सिंह, सुशील, दीवान सिंह, महावीर, मोहन सिंह, देवमाली शूरवीर सिंह, कांतिराम, युद्धवीर सिंह, मिजान आदि मौजूद रहे।