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पुलिस ने ठंडे बस्ते में डाल दी राशन कालाबाजारी की जांच
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पुलिस ने ठंडे बस्ते में डाल दी राशन कालाबाजारी की जांच
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। क्लेमेंटटाउन थाना क्षेत्र में पकड़े गए 30 बोरे सरकारी खाद्यान्न के मामले की जांच पुलिस ने भी ठंडे बस्ते में डाल दी। मामले में जिला आपूर्ति अधिकारी ने 29 दिन पहले दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन पुलिस ने मामले में अभी जांच तक शुरू नहीं की है। इससे पहले विभागीय जांच में भी मामले में लीपापोती कर दी गई थी।
क्लेमेंटटाउन पुलिस ने आठ फरवरी की रात टर्नर रोड पर एक वाहन पकड़ा था। जिसमें सरकारी राशन के 30 कट्टे चावल लदे हुए थे। पुलिस ने वाहन चालक विजयपाल से राशन के बारे में पूछताछ की तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका था। ऐसे में पुलिस ने कालाबाजारी का राशन बताते हुए आपूर्ति अधिकारी को जानकारी दी थी। साथ ही मौके पर पूर्ति निरीक्षक विभूति जुयाल को भी बुलाया गया था। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए रीजनल फूड कंट्रोलर (आरएफसी) चंद्रसिंह धर्मशक्तू ने जांच के निर्देश दिए थे। इस पर जिला आपूर्ति अधिकारी (डीएसओ) विपिन कुमार ने पूर्ति निरीक्षक विभूति जुयाल को जांच सौंपी लेकिन 14 दिनों तक वे भी मामले को दबाए रहे। मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था जिस पर खानापूर्ति कर आननफानन में अगले दिन जांच रिपोर्ट डीएसओ को सौंप दी थी, लेकिन जांच रिपोर्ट में कोई नतीजा नहीं निकल सका था। इसके बाद डीएसओ की ओर से 27 फरवरी को क्लेमेंटटाउन थाने में चालक विजयपाल और एक अज्ञात के खिलाफ राशन की कालाबाजारी का मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसकी जांच एसआई सुनील कुमार को सौंपी गई थी लेकिन उन्होंने अभी तक मामले में जांच ही शुरू नहीं की है। इस बाबत विवेचक सुनील कुमार का कहना है कि जल्द मामले में जांच की शुरू की जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले भी टीपीनगर स्थित आरएफसी गोदाम में से 10 हजार बोरे से अधिक खाद्यान्न गायब होने का मामला उजागर हुआ था, जिसमें गोदाम प्रभारी व चार कर्मचारी निलंबित किए गए थे।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। क्लेमेंटटाउन थाना क्षेत्र में पकड़े गए 30 बोरे सरकारी खाद्यान्न के मामले की जांच पुलिस ने भी ठंडे बस्ते में डाल दी। मामले में जिला आपूर्ति अधिकारी ने 29 दिन पहले दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन पुलिस ने मामले में अभी जांच तक शुरू नहीं की है। इससे पहले विभागीय जांच में भी मामले में लीपापोती कर दी गई थी।
क्लेमेंटटाउन पुलिस ने आठ फरवरी की रात टर्नर रोड पर एक वाहन पकड़ा था। जिसमें सरकारी राशन के 30 कट्टे चावल लदे हुए थे। पुलिस ने वाहन चालक विजयपाल से राशन के बारे में पूछताछ की तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका था। ऐसे में पुलिस ने कालाबाजारी का राशन बताते हुए आपूर्ति अधिकारी को जानकारी दी थी। साथ ही मौके पर पूर्ति निरीक्षक विभूति जुयाल को भी बुलाया गया था। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए रीजनल फूड कंट्रोलर (आरएफसी) चंद्रसिंह धर्मशक्तू ने जांच के निर्देश दिए थे। इस पर जिला आपूर्ति अधिकारी (डीएसओ) विपिन कुमार ने पूर्ति निरीक्षक विभूति जुयाल को जांच सौंपी लेकिन 14 दिनों तक वे भी मामले को दबाए रहे। मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था जिस पर खानापूर्ति कर आननफानन में अगले दिन जांच रिपोर्ट डीएसओ को सौंप दी थी, लेकिन जांच रिपोर्ट में कोई नतीजा नहीं निकल सका था। इसके बाद डीएसओ की ओर से 27 फरवरी को क्लेमेंटटाउन थाने में चालक विजयपाल और एक अज्ञात के खिलाफ राशन की कालाबाजारी का मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसकी जांच एसआई सुनील कुमार को सौंपी गई थी लेकिन उन्होंने अभी तक मामले में जांच ही शुरू नहीं की है। इस बाबत विवेचक सुनील कुमार का कहना है कि जल्द मामले में जांच की शुरू की जाएगी।
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गौरतलब है कि इससे पहले भी टीपीनगर स्थित आरएफसी गोदाम में से 10 हजार बोरे से अधिक खाद्यान्न गायब होने का मामला उजागर हुआ था, जिसमें गोदाम प्रभारी व चार कर्मचारी निलंबित किए गए थे।
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