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जल संस्थान ने मृतकों के नाम बांट दिये गांव में पानी के बिल
Updated Fri, 05 Jan 2018 10:58 PM IST
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गोपेश्वर। टंगसा गांव में जिस पेयजल योजना पर 22 सालों से पानी नहीं आया जल संस्थान ने उस योजना के नाम से ग्रामीणों को पानी के बिल भेज दिए। एक दशक पहले भी संस्थान की ओर से ग्रामीणों को पानी के बिल भेजे गए थे, तब ग्रामीणों के विरोध के बाद बिल माफ हो गए थे। अब दोबारा विलंब शुल्क के साथ पानी के बिल ग्रामीणों को थमा दिए गए हैं। जल संस्थान की इस कारस्तानी से ग्रामीण आक्रोशित हैं। बिल कई ऐसे ग्रामीणों के नाम पर भी भेजे गए हैं, जो जीवित ही नहीं हैं।
टंगसा गांव में मौजूदा समय में 35 परिवार रहते हैं। वर्ष 1975 में ग्रामीणों की मांग पर जल संस्थान ने बासुकी-टंगसा पेयजल योजना का निर्माण किया था। गांव में दो सार्वजनिक स्थानों पर पानी के स्टैंड पोस्ट बनाए गए। पेयजल सप्लाई शुरू होने के बाद नियमानुसार योजना को ग्राम पंचायत के सुपुर्द कर दिया गया। शुरुआत में योजना पर पानी की सुचारु आपूर्ति हुई, लेकिन वर्ष 1995 में भूस्खलन के कारण पेयजल लाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई। पेयजल आपूर्ति के लिए ग्राम पंचायत ने वर्ष 1995 में ही गांव के समीप ही प्राकृतिक पेयजल स्रोत से एकल पेयजल योजना का निर्माण किया, जिससे आज भी गांव में पेयजल आपूर्ति हो रही है। अब जल संस्थान की ओर से ग्रामीणों को बासुकी-टंगसा पेयजल योजना के पानी के बिल भेजे गए हैं। गांव के प्रति परिवार पर 60 से लेकर पंद्रह सौ रुपये के बिल भेजे हैं। नौ बिल कई ऐसे ग्रामीणों के नाम पर भी हैं जिनकी मृत्यु हुए कई साल हो गए। टंगसा गांव की प्रधान सुनीता देवी, संदीप तिवारी, मनोज तिवारी, सरोज सिंह और सुरेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है कि वर्ष 2007 में भी जल संस्थान की ओर से पानी के बिल भेजे गए थे। लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण बिल माफ हो गए। अब दस साल बाद फिर ग्रामीणों को पानी के बिल भेजे गए हैं, जो विभागीय लापरवाही को दर्शाता है। इधर, जल संस्थान के ईई प्रवीण सैनी का कहना है कि ग्राम पंचायत टंगसा में वितरित बिलों की जांच की जाएगी। यदि पेयजल योजना पर पानी की सप्लाई नहीं है तो ग्रामीणों को बिल कैसे भेजे गए, इसे दिखवाया जाएगा।
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टंगसा गांव में मौजूदा समय में 35 परिवार रहते हैं। वर्ष 1975 में ग्रामीणों की मांग पर जल संस्थान ने बासुकी-टंगसा पेयजल योजना का निर्माण किया था। गांव में दो सार्वजनिक स्थानों पर पानी के स्टैंड पोस्ट बनाए गए। पेयजल सप्लाई शुरू होने के बाद नियमानुसार योजना को ग्राम पंचायत के सुपुर्द कर दिया गया। शुरुआत में योजना पर पानी की सुचारु आपूर्ति हुई, लेकिन वर्ष 1995 में भूस्खलन के कारण पेयजल लाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई। पेयजल आपूर्ति के लिए ग्राम पंचायत ने वर्ष 1995 में ही गांव के समीप ही प्राकृतिक पेयजल स्रोत से एकल पेयजल योजना का निर्माण किया, जिससे आज भी गांव में पेयजल आपूर्ति हो रही है। अब जल संस्थान की ओर से ग्रामीणों को बासुकी-टंगसा पेयजल योजना के पानी के बिल भेजे गए हैं। गांव के प्रति परिवार पर 60 से लेकर पंद्रह सौ रुपये के बिल भेजे हैं। नौ बिल कई ऐसे ग्रामीणों के नाम पर भी हैं जिनकी मृत्यु हुए कई साल हो गए। टंगसा गांव की प्रधान सुनीता देवी, संदीप तिवारी, मनोज तिवारी, सरोज सिंह और सुरेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है कि वर्ष 2007 में भी जल संस्थान की ओर से पानी के बिल भेजे गए थे। लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण बिल माफ हो गए। अब दस साल बाद फिर ग्रामीणों को पानी के बिल भेजे गए हैं, जो विभागीय लापरवाही को दर्शाता है। इधर, जल संस्थान के ईई प्रवीण सैनी का कहना है कि ग्राम पंचायत टंगसा में वितरित बिलों की जांच की जाएगी। यदि पेयजल योजना पर पानी की सप्लाई नहीं है तो ग्रामीणों को बिल कैसे भेजे गए, इसे दिखवाया जाएगा।
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