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रुद्रप्रयाग की खाद्य सुरक्षा पौड़ी के भरोसे
Updated Tue, 04 Jul 2017 10:23 PM IST
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रुद्रप्रयाग। आम आदमी के स्वास्थ्य के साथ ही जिले की खाद्य सुरक्षा भी भगवान भरोसे चल रही है। विभाग का संचालन दो वर्ष से पौड़ी जिले से हो रहा है। ऐसे में मुख्य बाजार और यात्रा मार्ग से लगे बाजारों और पड़ावों में खाद्य सामग्री की नियमित जांच नहीं हो रही है।
जिला गठन के करीब दो दशक में भी खाद्य सुरक्षा विभाग अपने वास्तविक स्वरूप में नहीं आ पाया है। यहां, जिला मुख्यालय सहित तीनों ब्लॉक में विभागीय अधिकारी/कर्मचारियों के स्वीकृत सभी पद रिक्त हैं। इन परिस्थितियों में स्वास्थ्य विभाग के अधीन खाद्य सुरक्षा विभाग का संचालन शुरुआती वर्षों में चमोली और बीते दो वर्ष से पौड़ी जिले से संचालित हो रहा है। संबंधित अधिकारी दोनों जिलों का विस्तृत भौगोलिक क्षेत्रफल होने के कारण किसी खास पर्व या कार्यक्रम पर ही जिले के बाजारों में पहुंच पा रहे हैं, जिसका रुद्रप्रयाग सहित तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, गुप्तकाशी, ऊखीमठ, सोनप्रयाग, गौरीकुंड और केदारनाथ यात्रा पैदल मार्ग सहित तुंगनाथ व मद्महेश्वर धाम के रास्ते के बाजारों/दुकानों में मिलावट खोर खूब फायदा उठा रहे हैं। यहां कई दुकानदार मिलावटी और एक्सपायरी डेट की खाद्य सामग्री भी जमकर बेच रहे हैं। प्रशासन द्वारा कई बार चेकिंग की जा रही है, लेकिन विशेषज्ञ अधिकारियों/कर्मचारियों के अभाव में यह कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरा के समान हो रही है।
खाद्य सुरक्षा विभाग में स्थायी अधिकारी/कर्मचारियों के नहीं होने का खामियाजा होटल, ढाबे व खाद्य वस्तुओं के विक्रेताओं को भी भुगतना पड़ रहा है। इस समस्या से व्यापारियों का समय पर लाइसेंस का नवीनीकरण सहित अन्य कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है। वहीं, उन्हें नियमों की जानकारी भी नहीं मिल रही है।
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कोट
जनपद में खाद्य सुरक्षा विभाग में अभिहीत अधिकारी सहित तीनों ब्लॉक में एक-एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी की तैनाती को लेकर शासन को लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है। स्थायी अधिकारियों के नहीं होने से काफी दिक्कतें हो रही हैं। -डा. ओपी आर्य, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी रुद्रप्रयाग
जिला गठन के करीब दो दशक में भी खाद्य सुरक्षा विभाग अपने वास्तविक स्वरूप में नहीं आ पाया है। यहां, जिला मुख्यालय सहित तीनों ब्लॉक में विभागीय अधिकारी/कर्मचारियों के स्वीकृत सभी पद रिक्त हैं। इन परिस्थितियों में स्वास्थ्य विभाग के अधीन खाद्य सुरक्षा विभाग का संचालन शुरुआती वर्षों में चमोली और बीते दो वर्ष से पौड़ी जिले से संचालित हो रहा है। संबंधित अधिकारी दोनों जिलों का विस्तृत भौगोलिक क्षेत्रफल होने के कारण किसी खास पर्व या कार्यक्रम पर ही जिले के बाजारों में पहुंच पा रहे हैं, जिसका रुद्रप्रयाग सहित तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, गुप्तकाशी, ऊखीमठ, सोनप्रयाग, गौरीकुंड और केदारनाथ यात्रा पैदल मार्ग सहित तुंगनाथ व मद्महेश्वर धाम के रास्ते के बाजारों/दुकानों में मिलावट खोर खूब फायदा उठा रहे हैं। यहां कई दुकानदार मिलावटी और एक्सपायरी डेट की खाद्य सामग्री भी जमकर बेच रहे हैं। प्रशासन द्वारा कई बार चेकिंग की जा रही है, लेकिन विशेषज्ञ अधिकारियों/कर्मचारियों के अभाव में यह कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरा के समान हो रही है।
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खाद्य सुरक्षा विभाग में स्थायी अधिकारी/कर्मचारियों के नहीं होने का खामियाजा होटल, ढाबे व खाद्य वस्तुओं के विक्रेताओं को भी भुगतना पड़ रहा है। इस समस्या से व्यापारियों का समय पर लाइसेंस का नवीनीकरण सहित अन्य कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है। वहीं, उन्हें नियमों की जानकारी भी नहीं मिल रही है।
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जनपद में खाद्य सुरक्षा विभाग में अभिहीत अधिकारी सहित तीनों ब्लॉक में एक-एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी की तैनाती को लेकर शासन को लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है। स्थायी अधिकारियों के नहीं होने से काफी दिक्कतें हो रही हैं। -डा. ओपी आर्य, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी रुद्रप्रयाग