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गीता ही है आतंकवाद से आध्यात्मवाद की राह:स्वामी चिदानंद
Updated Fri, 01 Dec 2017 01:57 AM IST
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फोटो फाइल नेम-
गीता अध्यात्मवाद की राह : स्वामी चिदानंद
ऋषिकेश।
परमार्थ निकेतन में गीता जयंती महोत्सव का आयोजन कया गया, जिसमें करीब 35 देशों के श्रद्धालुओें ने शिरकत की। इस अवसर पर आश्रमाध्यक्ष व ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस के सह-संस्थापक स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने श्री सत्य साईं बाबा के संदेशों व विचारों को प्रतिभाषित व प्रसारित करने वाले मधुसूदन नायडू को भागवत गीता महाग्रंथ भेंट किया। परमार्थ निकेतन में आयोजित गीता जयंती महोत्सव में जीमयत उलेमा ए-हिन्द के उपाध्यक्ष मौलाना अब्दुल वसी, बिहार से मौलाना हाफिज नेहाल अहमद खान समेत दुनियाभर के देशों से आए श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग किया। आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि पांच हजार साल पहले द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा मोक्षदा शुल्क एकादशी के दिन अर्जुन को कुरुक्षेत्र के मैदान में जो गीता का संदेश दिया गया था, वह आज भी प्रासंगिक है। गीता महज एक धर्मग्रंथ नहीं बल्कि धर्म और कर्म के सम्यक स्वरूप का प्रेरणाप्रद उदाहरण है। कहा कि गीता ही आतंकवाद से अध्यात्मवाद की ओर जाने की राह बताती है। मौलाना अब्दुल वसी साहब ने कहा कि गीता और कुरान अल्लाह और ईश्वर के गुणानुवाद के ग्रन्थ हैं जो हमें मिलकर रहने का संदेश देते है। इस दौरान आश्रमाध्यक्ष चिदानंद मुनि ने मौलाना हाफिज नेहाल अहमद खान व मौलाना अब्दुल वसी को कौमी एकता का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।
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गीता अध्यात्मवाद की राह : स्वामी चिदानंद
ऋषिकेश।
परमार्थ निकेतन में गीता जयंती महोत्सव का आयोजन कया गया, जिसमें करीब 35 देशों के श्रद्धालुओें ने शिरकत की। इस अवसर पर आश्रमाध्यक्ष व ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस के सह-संस्थापक स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने श्री सत्य साईं बाबा के संदेशों व विचारों को प्रतिभाषित व प्रसारित करने वाले मधुसूदन नायडू को भागवत गीता महाग्रंथ भेंट किया। परमार्थ निकेतन में आयोजित गीता जयंती महोत्सव में जीमयत उलेमा ए-हिन्द के उपाध्यक्ष मौलाना अब्दुल वसी, बिहार से मौलाना हाफिज नेहाल अहमद खान समेत दुनियाभर के देशों से आए श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग किया। आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि पांच हजार साल पहले द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा मोक्षदा शुल्क एकादशी के दिन अर्जुन को कुरुक्षेत्र के मैदान में जो गीता का संदेश दिया गया था, वह आज भी प्रासंगिक है। गीता महज एक धर्मग्रंथ नहीं बल्कि धर्म और कर्म के सम्यक स्वरूप का प्रेरणाप्रद उदाहरण है। कहा कि गीता ही आतंकवाद से अध्यात्मवाद की ओर जाने की राह बताती है। मौलाना अब्दुल वसी साहब ने कहा कि गीता और कुरान अल्लाह और ईश्वर के गुणानुवाद के ग्रन्थ हैं जो हमें मिलकर रहने का संदेश देते है। इस दौरान आश्रमाध्यक्ष चिदानंद मुनि ने मौलाना हाफिज नेहाल अहमद खान व मौलाना अब्दुल वसी को कौमी एकता का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।