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...तो नृसिंह मंदिर के दर्शनों के बिना ही होगी बदरीनाथ की तीर्थयात्रा
Updated Fri, 24 Nov 2017 10:38 PM IST
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जोशीमठ। ऑलवेदर रोड योजना के तहत बदरीनाथ हाईवे का निर्माण यदि हेलंग से मारवाड़ी तक होता है तो तीर्थयात्री प्रसिद्ध नृसिंह मंदिर के दर्शनों से भी वंचित हो जाएंगे। केदारखंड के अनुसार, चार धामों में सर्वश्रेष्ठ बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा बिना नृसिंह मंदिर के दर्शनों के पूर्ण नहीं मानी जाती है, ऐसे में बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा को पूर्ण करने के लिए तीर्थयात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर आना होगा।
जोशीमठ धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण नगर है। यहां वर्षभर पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की आवाजाही बनी रहती है। जोशीमठ में प्राचीन नृसिंह मंदिर के साथ ही आदि गुरु शंकराचार्य का गद्दी स्थल भी है। जब शीतकाल में बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा थम जाती है तो शंकराचार्य की गद्दी के दर्शन जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में ही होते हैं। प्राचीन काल से चली आ रही धार्मिक परंपराओं के अनुसार, बदरीनाथ की तीर्थयात्रा पर आने वाले तीर्थयात्री सबसे पहले जोशीमठ नृसिंह मंदिर में मत्था टेकने पहुंचते हैं और यहीं से अपनी तीर्थयात्रा शुरू करते हैं।
नृसिंह मंदिर को ही बदरीनाथ यात्रा का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। बदरीनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित ऋषि प्रसाद सती का कहना है कि केदारखंड के प्रथम अध्याय के 42, 43 और 44वें पेज पर उल्लेख है कि बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा नृसिंह मंदिर के दर्शनों के बिना अधूरी है। जब बदरीनाथ हाईवे का निर्माण हेलंग से मारवाड़ी तक हो जाएगा तो तीर्थयात्री सीधे बदरीनाथ धाम पहुंच जाएंगे। जिन तीर्थयात्रियों को नृसिंह मंदिर की महत्ता की जानकारी होगी, वही यात्री जोशीमठ तक पहुंच पाएंगे। लिहाजा योजना के तहत जोशीमठ शहर का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
जोशीमठ धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण नगर है। यहां वर्षभर पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की आवाजाही बनी रहती है। जोशीमठ में प्राचीन नृसिंह मंदिर के साथ ही आदि गुरु शंकराचार्य का गद्दी स्थल भी है। जब शीतकाल में बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा थम जाती है तो शंकराचार्य की गद्दी के दर्शन जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में ही होते हैं। प्राचीन काल से चली आ रही धार्मिक परंपराओं के अनुसार, बदरीनाथ की तीर्थयात्रा पर आने वाले तीर्थयात्री सबसे पहले जोशीमठ नृसिंह मंदिर में मत्था टेकने पहुंचते हैं और यहीं से अपनी तीर्थयात्रा शुरू करते हैं।
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नृसिंह मंदिर को ही बदरीनाथ यात्रा का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। बदरीनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित ऋषि प्रसाद सती का कहना है कि केदारखंड के प्रथम अध्याय के 42, 43 और 44वें पेज पर उल्लेख है कि बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा नृसिंह मंदिर के दर्शनों के बिना अधूरी है। जब बदरीनाथ हाईवे का निर्माण हेलंग से मारवाड़ी तक हो जाएगा तो तीर्थयात्री सीधे बदरीनाथ धाम पहुंच जाएंगे। जिन तीर्थयात्रियों को नृसिंह मंदिर की महत्ता की जानकारी होगी, वही यात्री जोशीमठ तक पहुंच पाएंगे। लिहाजा योजना के तहत जोशीमठ शहर का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
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