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विदेशी बोले चौरासी कुटिया का शुल्क कम हो
Updated Mon, 20 Nov 2017 01:34 AM IST
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फोटो फाइल नेम-
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महर्षि योगी की तपस्थली चौरासी कुटिया
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चौरासी कुटिया में शांति अपार, असुविधाओं की भरमार
-- महर्षि योगी के शंकराचार्य नगर चौरासी कुटिया का दीदार करना नहीं भूलते विदेशी पर्यटक
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
तीर्थनगरी के स्वर्गाश्रम क्षेत्र स्थित भावातीय ध्यान योग के प्रणेता महर्षि महेश योगी की तपस्थली चौरासी कुटिया विश्व प्रसिद्ध बैंड ग्रुप बीटल्स बैंड की बीती सदी में यहां आगमन को लेकर विदेशियों की खासी पसंद रही है। गंगा दर्शन, आध्यात्मिक उन्नयन, योग की तालीम लेने तीर्थनगरी पहुंचने वाले अधिकांश विदेशी पर्यटक महर्षि महेश योगी के शंकराचार्य नगर चौरासी कुटिया का दीदार करना नहीं भूलते। राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र में पड़ने वाली कुटिया वर्षों बंद रहने के बाद 2015 में दोबारा देशी विदेशी सैलानियों के लिए खोली गई। बावजूद इसके करीब दो साल बाद भी राज्य सरकार व राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन यहां सैलानियों के लिए मुकम्मल सुविधाएं नहीं जुटा पाया है। खासकर पार्क प्रशासन द्वारा आश्रम के लिए प्रवेश शुल्क रखा है, लेकिन पर्यटन स्थल में पेयजल व्यवस्था तक नहीं है।
ऋषिकेश। तीर्थनगरी की विश्व प्रसिद्ध चौरासी कुटिया में वर्ष भर देशी विदेशी पर्यटकों की आमद बनी रहती है। बावजूद इसके राज्य सरकार व राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन यहां कुटिया के दर्शन, भ्रमण के लिए आने वाले सैलानियों के लिए मुकम्मल सुविधाएं नहीं जुटा पाया है, जिससे पर्यटकों को तरह तरह की दिक्कतों से दोचार होना पड़ रहा है। पार्क प्रशासन यहां सैलानियों से प्रवेश शुल्क तो वसूल रहा है मगर पर्यटक सुविधाओं पर धेला भी खर्च नहीं कर रहा। स्वर्गाश्रम से चौरासी कुटिया तक जाने वाला संपर्क मार्ग वेद निकेतन धाम आश्रम के बाद अत्यधिक खराब है। लिहाजा सैलानियों को रेतीली सड़क से होकर कुटिया तक पहुंचना पड़ता है। खासकर ग्रीष्मकाल में उन्हें रेत की तपिस भी झेलनी पड़ती है।
कुटिया में प्रवेश करने वाले सैलानियों के लिए भीतर पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। लिहाजा उन्हें प्यासा भटकना पड़ता है। यहां भ्रमण को आने वाले सैलानियों के लिए गिने चुने यूरिनल बनाए गए हैं, जबकि शौचालय की सुविधा मुकम्मल नहीं है। चौरासी कुटिया परिसर में जगह-जगह यात्रियों के सुस्ताने के लिए बैंच लगाई गई हैं, मगर विश्राम शेड एक भी नहीं बनाया गया है, जिससे ग्रीष्मकाल में लोग खुले आसमान के नीचे लगी बैंच में सुस्ताने को मजबूर होते हैं। उधर चौरासी कुटिया के प्रभारी मनोज चौहान ने बताया कुटिया के भीतर पर्यटकों के लिए पानी की सप्लाई लाइन पर कार्य किया जा रहा है। बताया कि फिलहाल पर्यटकों के लिए प्रवेश द्वार पर पेयजल व्यवस्था की गई है। विदेशी पर्यटक शुल्क से भी खफा हैं। उनका मानना है कि प्रकृति से जुड़े स्थलों में प्रवेश मुफ्त किया जाना चाहिए या फिर प्रवेश शुल्क को कम किया जाना चाहिए। विदेशी पर्यटकों ने चौरासी कुटिया को शानदार और मन को शांति देने वाला प्रकृति का अभिन्न व पवित्र स्थान भी बताया।
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मैं पहली बार चौरासी कुटिया को देखने आया हूं। बीटल्स बैंड से जुड़ी यादों को देखने का अलग ही अनुभव महसूस हुआ है।
- डेविड, पर्यटक इंग्लैंड।
मैं चौरासी कुटिया पहली बार अपने दोस्तों केे साथ आई हूं। चौरासी कुटिया शानदार और मनमोहक जगह है, लेकिन विदेशी सैलानियों के लिए 600 रुपये प्रवेश शुल्क अधिक रखा गया है, इसे कम किया जाना चाहिए।
- मरियाना, पर्यटक इंग्लैंड
मुझे मेरे दोस्तों ने चौरासी कुटिया के बारे में बताया था, जिसके बाद मैं यहां अपने दोस्तों के साथ आई हूं। कुटिया में विदेशी पर्यटकों के लिए निर्धारित किए गए प्रवेश शुल्क को कम किया जाना चाहिए।
- समनता, पर्यटक इटली
मैं पहली बार अपने दोस्तों के कहने पर चौरासी कुटिया देखने आई हूं। यहां आकर मुझे मन को शांति देने वाली अनुभूति प्राप्त हुई है। विदेशी पर्यटकों के लिए यहां लिया जा रहा प्रवेश शुल्क कम किया जाना चाहिए।
- नतालिया, पर्यटक यूक्रेन
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महर्षि योगी की तपस्थली चौरासी कुटिया
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चौरासी कुटिया में शांति अपार, असुविधाओं की भरमार
-- महर्षि योगी के शंकराचार्य नगर चौरासी कुटिया का दीदार करना नहीं भूलते विदेशी पर्यटक
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
तीर्थनगरी के स्वर्गाश्रम क्षेत्र स्थित भावातीय ध्यान योग के प्रणेता महर्षि महेश योगी की तपस्थली चौरासी कुटिया विश्व प्रसिद्ध बैंड ग्रुप बीटल्स बैंड की बीती सदी में यहां आगमन को लेकर विदेशियों की खासी पसंद रही है। गंगा दर्शन, आध्यात्मिक उन्नयन, योग की तालीम लेने तीर्थनगरी पहुंचने वाले अधिकांश विदेशी पर्यटक महर्षि महेश योगी के शंकराचार्य नगर चौरासी कुटिया का दीदार करना नहीं भूलते। राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र में पड़ने वाली कुटिया वर्षों बंद रहने के बाद 2015 में दोबारा देशी विदेशी सैलानियों के लिए खोली गई। बावजूद इसके करीब दो साल बाद भी राज्य सरकार व राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन यहां सैलानियों के लिए मुकम्मल सुविधाएं नहीं जुटा पाया है। खासकर पार्क प्रशासन द्वारा आश्रम के लिए प्रवेश शुल्क रखा है, लेकिन पर्यटन स्थल में पेयजल व्यवस्था तक नहीं है।
ऋषिकेश। तीर्थनगरी की विश्व प्रसिद्ध चौरासी कुटिया में वर्ष भर देशी विदेशी पर्यटकों की आमद बनी रहती है। बावजूद इसके राज्य सरकार व राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन यहां कुटिया के दर्शन, भ्रमण के लिए आने वाले सैलानियों के लिए मुकम्मल सुविधाएं नहीं जुटा पाया है, जिससे पर्यटकों को तरह तरह की दिक्कतों से दोचार होना पड़ रहा है। पार्क प्रशासन यहां सैलानियों से प्रवेश शुल्क तो वसूल रहा है मगर पर्यटक सुविधाओं पर धेला भी खर्च नहीं कर रहा। स्वर्गाश्रम से चौरासी कुटिया तक जाने वाला संपर्क मार्ग वेद निकेतन धाम आश्रम के बाद अत्यधिक खराब है। लिहाजा सैलानियों को रेतीली सड़क से होकर कुटिया तक पहुंचना पड़ता है। खासकर ग्रीष्मकाल में उन्हें रेत की तपिस भी झेलनी पड़ती है।
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कुटिया में प्रवेश करने वाले सैलानियों के लिए भीतर पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। लिहाजा उन्हें प्यासा भटकना पड़ता है। यहां भ्रमण को आने वाले सैलानियों के लिए गिने चुने यूरिनल बनाए गए हैं, जबकि शौचालय की सुविधा मुकम्मल नहीं है। चौरासी कुटिया परिसर में जगह-जगह यात्रियों के सुस्ताने के लिए बैंच लगाई गई हैं, मगर विश्राम शेड एक भी नहीं बनाया गया है, जिससे ग्रीष्मकाल में लोग खुले आसमान के नीचे लगी बैंच में सुस्ताने को मजबूर होते हैं। उधर चौरासी कुटिया के प्रभारी मनोज चौहान ने बताया कुटिया के भीतर पर्यटकों के लिए पानी की सप्लाई लाइन पर कार्य किया जा रहा है। बताया कि फिलहाल पर्यटकों के लिए प्रवेश द्वार पर पेयजल व्यवस्था की गई है। विदेशी पर्यटक शुल्क से भी खफा हैं। उनका मानना है कि प्रकृति से जुड़े स्थलों में प्रवेश मुफ्त किया जाना चाहिए या फिर प्रवेश शुल्क को कम किया जाना चाहिए। विदेशी पर्यटकों ने चौरासी कुटिया को शानदार और मन को शांति देने वाला प्रकृति का अभिन्न व पवित्र स्थान भी बताया।
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मैं पहली बार चौरासी कुटिया को देखने आया हूं। बीटल्स बैंड से जुड़ी यादों को देखने का अलग ही अनुभव महसूस हुआ है।
- डेविड, पर्यटक इंग्लैंड।
मैं चौरासी कुटिया पहली बार अपने दोस्तों केे साथ आई हूं। चौरासी कुटिया शानदार और मनमोहक जगह है, लेकिन विदेशी सैलानियों के लिए 600 रुपये प्रवेश शुल्क अधिक रखा गया है, इसे कम किया जाना चाहिए।
- मरियाना, पर्यटक इंग्लैंड
मुझे मेरे दोस्तों ने चौरासी कुटिया के बारे में बताया था, जिसके बाद मैं यहां अपने दोस्तों के साथ आई हूं। कुटिया में विदेशी पर्यटकों के लिए निर्धारित किए गए प्रवेश शुल्क को कम किया जाना चाहिए।
- समनता, पर्यटक इटली
मैं पहली बार अपने दोस्तों के कहने पर चौरासी कुटिया देखने आई हूं। यहां आकर मुझे मन को शांति देने वाली अनुभूति प्राप्त हुई है। विदेशी पर्यटकों के लिए यहां लिया जा रहा प्रवेश शुल्क कम किया जाना चाहिए।
- नतालिया, पर्यटक यूक्रेन