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दिल्ली एम्स के रेट पर होगा ऋषिकेश में इलाज
Updated Mon, 06 Nov 2017 01:58 AM IST
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विरोध के बाद एम्स प्रशासन ने वापस लिया बढ़ाया गया शुल्क, अब दिल्ली के बराबर ही लिया जाएगा शुल्क
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
सेंट्रल गर्वमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) के बढ़े शुल्क लागू करने के बाद एम्स प्रशासन ने यू-टर्न लिया है। विरोध के चलते एम्स प्रशासन ने सीजीएचएस रेट को वापस ले लिया है। अब यहां भी दिल्ली एम्स के अनुसार ही लोगों से इलाज, मेडिकल और सर्जिकल प्रक्रियाओं का शुल्क वसूला जाएगा।
रविवार को एम्स के उप निदेशक प्रोफेसर डा. अंशुमान गुप्ता और मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर डा. मुकेश त्रिपाठी ने प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लोगों के विरोध के चलते एम्स में लागू सीजीएचएस रेट को वापस लेने का निर्णय लेने के बाद इसका आदेश जारी कर दिया गया है। अब संस्थान में मरीजों से दिल्ली एम्स में लागू रेट के मुताबिक ही शुल्क वसूला जाएगा। इस मौके पर डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. बलरामजी आमर, पीआरओ हरीश थपलियाल आदि मौजूद थे।
ये है सीजीएचएस
सेंट्रल गर्वमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) के तहत सरकारी कर्मचारियों को निजी और अन्य अस्पतालों में उपचार कराने की सुविधा मिलती है। इसके लिए प्राइवेट अस्पतालों की सहमति से बीमारियों के हिसाब से इलाज का शुल्क तय किया जाता है, जिसके तहत उपचार पर आने वाले खर्च का भुगतान सरकार करती है। एम्स में इस स्कीम को लागू किया गया था।
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वित्तीय स्थिति मजबूत करने को बढ़ाए थे शुल्क
एम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. मुकेश त्रिपाठी ने सीजीएचएस रेट लागू करने पर सफाई दी। बताया कि ऋषिकेश एम्स प्रोजेक्ट मोड़ से बाहर आ रहा है। संस्थान में यूजर चार्ज वसूलने, संसाधनों के रखरखाव और रोजगार विकसित करने के लिए सीजीएचएस रेट को लागू किया गया था। जिसकी स्वीकृति स्थायी वित्त समिति ने दी थी। समिति के अध्यक्ष केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव होते हैं। एम्स के निदेशक इसमें सचिव हैं और राज्य के मुख्य सचिव और सांसद आदि भी समिति में शामिल हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
सेंट्रल गर्वमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) के बढ़े शुल्क लागू करने के बाद एम्स प्रशासन ने यू-टर्न लिया है। विरोध के चलते एम्स प्रशासन ने सीजीएचएस रेट को वापस ले लिया है। अब यहां भी दिल्ली एम्स के अनुसार ही लोगों से इलाज, मेडिकल और सर्जिकल प्रक्रियाओं का शुल्क वसूला जाएगा।
रविवार को एम्स के उप निदेशक प्रोफेसर डा. अंशुमान गुप्ता और मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर डा. मुकेश त्रिपाठी ने प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लोगों के विरोध के चलते एम्स में लागू सीजीएचएस रेट को वापस लेने का निर्णय लेने के बाद इसका आदेश जारी कर दिया गया है। अब संस्थान में मरीजों से दिल्ली एम्स में लागू रेट के मुताबिक ही शुल्क वसूला जाएगा। इस मौके पर डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. बलरामजी आमर, पीआरओ हरीश थपलियाल आदि मौजूद थे।
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ये है सीजीएचएस
सेंट्रल गर्वमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) के तहत सरकारी कर्मचारियों को निजी और अन्य अस्पतालों में उपचार कराने की सुविधा मिलती है। इसके लिए प्राइवेट अस्पतालों की सहमति से बीमारियों के हिसाब से इलाज का शुल्क तय किया जाता है, जिसके तहत उपचार पर आने वाले खर्च का भुगतान सरकार करती है। एम्स में इस स्कीम को लागू किया गया था।
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वित्तीय स्थिति मजबूत करने को बढ़ाए थे शुल्क
एम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. मुकेश त्रिपाठी ने सीजीएचएस रेट लागू करने पर सफाई दी। बताया कि ऋषिकेश एम्स प्रोजेक्ट मोड़ से बाहर आ रहा है। संस्थान में यूजर चार्ज वसूलने, संसाधनों के रखरखाव और रोजगार विकसित करने के लिए सीजीएचएस रेट को लागू किया गया था। जिसकी स्वीकृति स्थायी वित्त समिति ने दी थी। समिति के अध्यक्ष केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव होते हैं। एम्स के निदेशक इसमें सचिव हैं और राज्य के मुख्य सचिव और सांसद आदि भी समिति में शामिल हैं।