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बैकुंठ चतुर्दशी मेले में व्यापारिक गतिविधियों पर व्यापारियों ने जताया आक्रोश
Updated Sun, 05 Nov 2017 10:30 PM IST
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श्रीनगर। बैकुंठ चतुर्दशी मेले में व्यापारिक गतिविधियों पर शहर के कुछ व्यापारियों ने आक्रोश जताया है। विरोध स्वरूप व्यापार सभा के एक पदाधिकारी सहित दो सदस्यों ने व्यापार सभा से इस्तीफा भी दे दिया है।
शहर में पालिका की ओर से 10 दिवसीय बैकुंठ चतुर्दशी मेले का आयोजन किया जा रहा है। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों व खेलकूद प्रतियोगिताओं के साथ ही स्थानीय जीआईएंडटीआई मैदान में दुकानें भी लगाई गई हैं। कुछ स्थानीय व्यापारियों ने मेले में दुकानें लगाए जाने पर आक्रोश जताया है। व्यापारी झाबर सिंह रावत का कहना है, कि श्रीनगर की व्यापार सभा केवल चुनाव कराने तक सीमित है। व्यापार सभा का व्यापारियों की हितों से कोई वास्ता नहीं है। मेले में व्यापारिक गतिविधियां संचालित की जा रही है, लेकिन व्यापार सभा इस संबंध में कुछ नहीं कर रही है। विरोध स्वरूप झाबर सिंह ने व्यापार सभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया है। वहीं मेले में व्यापारिक गतिविधियां संचालित किए जाने के विरोध में कुछ दिन पूर्व व्यापार सभा के उपाध्यक्ष संजय घिल्डियाल ने पद से अपना इस्तीफा दे दिया था। अध्यक्ष व्यापार सभा बासुदेव कंडारी का कहना है कि बैकुंठ चतुर्दशी मेला पौराणिक मेला है, जिसका स्वरूप पहले से तय है। फिर भी व्यापारियों के पक्ष को गंभीरता से लिया जाएगा।
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शहर में पालिका की ओर से 10 दिवसीय बैकुंठ चतुर्दशी मेले का आयोजन किया जा रहा है। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों व खेलकूद प्रतियोगिताओं के साथ ही स्थानीय जीआईएंडटीआई मैदान में दुकानें भी लगाई गई हैं। कुछ स्थानीय व्यापारियों ने मेले में दुकानें लगाए जाने पर आक्रोश जताया है। व्यापारी झाबर सिंह रावत का कहना है, कि श्रीनगर की व्यापार सभा केवल चुनाव कराने तक सीमित है। व्यापार सभा का व्यापारियों की हितों से कोई वास्ता नहीं है। मेले में व्यापारिक गतिविधियां संचालित की जा रही है, लेकिन व्यापार सभा इस संबंध में कुछ नहीं कर रही है। विरोध स्वरूप झाबर सिंह ने व्यापार सभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया है। वहीं मेले में व्यापारिक गतिविधियां संचालित किए जाने के विरोध में कुछ दिन पूर्व व्यापार सभा के उपाध्यक्ष संजय घिल्डियाल ने पद से अपना इस्तीफा दे दिया था। अध्यक्ष व्यापार सभा बासुदेव कंडारी का कहना है कि बैकुंठ चतुर्दशी मेला पौराणिक मेला है, जिसका स्वरूप पहले से तय है। फिर भी व्यापारियों के पक्ष को गंभीरता से लिया जाएगा।
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