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एनआईटी उतराखंड की पहल
Updated Mon, 30 Oct 2017 10:02 PM IST
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श्रीनगर। पहाड़ी राज्यों में सतत विकास के लिए रिसर्च कम्युनिटी और इंजीनियरिंग एजेंसी को एनआईटी एक मंच पर लाएगा। एनआईटी उत्तराखंड में 21 से 23 दिसंबर तक देश भर के शोधकर्ता, विशेषज्ञ और इंजीनियर जुटेंगे। यहां तीन दिन तक आयोजित होने वाले कांफ्रेंस में ‘इंफ्रास्ट्रक्चर सस्टेनबिलिटी इन हिली रिजन’ विषय पर शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण होगा।
पहाड़ी राज्यों में सतत विकास के लिए बनी ठोस योजना बने इसके लिए एनआईटी विषय विशेषज्ञों और इंजीनियर्स को एक मंच उपलब्ध करा रहा है। ताकि विषय विशेषज्ञ इसके लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सुझाव दे और इंजीनियर्स उसका क्रियान्वयन करें। संस्थान ने आईआईटी, एनआईटी, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, केन जियोटेक, एलएंडटी, मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस और सिंचाई विभाग के एक्सपर्ट की एडवायजरी कमेटी बनाई है। यह कमेटी देश भर के विभिन्न क्षेत्रों के शोधकर्ताओं, विशेषज्ञों और इंजीनियर्स के सुझावों को वैज्ञानिक कसौटी पर परखेगी। जो सुझाव महत्वपूर्ण होंगे, उनको कंपाइल कर भारत सरकार को भेजा जाएगा। एचओडी सिविल इंजीनियरिंग एनआईटी उत्तराखंड डा. आदित्य कुमार अनुपम का कहना है, कि पर्वतीय क्षेत्र भूस्खलन, भूकंप और त्वरित बाढ़ के प्रति बहुत संवेदनशील है। इसलिए यहां किसी भी निर्माण कार्य से पूर्व योजना का हर पहलू से परीक्षण होना जरूरी है। यहां स्लोप स्टेबिलिटी भी महत्वपूर्ण बिंदु है। इसी के मद्देनजर संस्थान समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है। कहा कि अगर शोधकर्ता और इंजीनियर्स आपस में मिलकर काम करे, तो बेहतर योजनाएं बन सकती हैं। ,
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पहाड़ी राज्यों में सतत विकास के लिए बनी ठोस योजना बने इसके लिए एनआईटी विषय विशेषज्ञों और इंजीनियर्स को एक मंच उपलब्ध करा रहा है। ताकि विषय विशेषज्ञ इसके लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सुझाव दे और इंजीनियर्स उसका क्रियान्वयन करें। संस्थान ने आईआईटी, एनआईटी, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, केन जियोटेक, एलएंडटी, मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस और सिंचाई विभाग के एक्सपर्ट की एडवायजरी कमेटी बनाई है। यह कमेटी देश भर के विभिन्न क्षेत्रों के शोधकर्ताओं, विशेषज्ञों और इंजीनियर्स के सुझावों को वैज्ञानिक कसौटी पर परखेगी। जो सुझाव महत्वपूर्ण होंगे, उनको कंपाइल कर भारत सरकार को भेजा जाएगा। एचओडी सिविल इंजीनियरिंग एनआईटी उत्तराखंड डा. आदित्य कुमार अनुपम का कहना है, कि पर्वतीय क्षेत्र भूस्खलन, भूकंप और त्वरित बाढ़ के प्रति बहुत संवेदनशील है। इसलिए यहां किसी भी निर्माण कार्य से पूर्व योजना का हर पहलू से परीक्षण होना जरूरी है। यहां स्लोप स्टेबिलिटी भी महत्वपूर्ण बिंदु है। इसी के मद्देनजर संस्थान समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है। कहा कि अगर शोधकर्ता और इंजीनियर्स आपस में मिलकर काम करे, तो बेहतर योजनाएं बन सकती हैं। ,
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