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नगर निगम में लाखों का ईंधन घोटाला
Updated Tue, 19 Sep 2017 10:59 PM IST
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हरिद्वार।
नगर निगम में लाखों रुपये का ईंधन, डीजल-पेट्रोल का घोटाला किया जा रहा है। आश्चर्यजनक बात यह है कि शहर का कूड़ा केआरएल उठा रही है और डीजल-पेट्रोल नगर निगम की खाली गाड़ियां पी रही हैं। नगर निगम के आधे कूड़ा वाहन भी केआरएल के पास हैं फिर भी ईंधन खर्च घटना तो दूर लाखों रुपये के हिसाब से बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में जहां नगर निगम का डीजल-पेट्रोल का खर्च 66,35,682 रुपये था तो वहीं वित्तीय वर्ष 2016-17 में बढ़कर 83,99,842 रुपये हो गया है जो करीब 18 लाख रुपये की वार्षिक बढोतरी है।
नगर निगम के पास 46 कूड़ा गाड़ियां हैं, जिनमें से लगभग एक दर्जन गाड़ियां मरम्मत नहीं होने से कार्यशाला में खड़ी हैं। इसके साथ ही नगर निगम की अधिकतर कूड़ा गाड़ियों को केआरएल चला रही है। जिनका तेल खर्च भी कंपनी ही उठा रही है। इसके बावजूद ईंधन खर्च में करीब 18 लाख रुपये की बढ़ोतरी होना घोटाले की ओर इशारा करता है। इसका मतलब यह भी है कि नगरपालिका के समय जो डीजल-पेट्रोल का खेल होता था वह अब नगर निगम में फिर से शुरू हो गया है। नगरपालिका के समय डीजल-पेट्रोल का खर्च जब प्रतिमाह 12 लाख रुपये को पार कर गया था तो शासन के उच्चाधिकारी भी चौंक गए थे। तत्कालीन सचिव अनूप वधावन को जांच करानी पड़ी थी। परिवहन अधिकारियों से प्रत्येक कूड़ा गाड़ी का एवरेज भी निकलवाकर लगाम लगाने की कोशिश की थी। इसके बाद डीजल-पेट्रोल का 12 लाख रुपये प्रतिमाह पहुंचा खर्च घटकर 5 से 6 लाख रुपये तक गिर गया था। तब पूरे शहर का कूड़ा निस्तारण नगरपालिका ही करती थी। लेकिन लाखों का तेल पीने का ढर्रा फिर से रफ्तार पकड़ चुका है। यह स्थिति इसके बावजूद है कि मेयर मनोज गर्ग बोर्ड तथा कार्यकारिणी की बैठक में ईंधन खर्च पर लगाम लगाने को अधिकारियों को निर्देशित करते आ रहे हैं। सूचना का अधिकार में उपलब्ध कराई गई जानकारी से इस तेल घोटाले के खुलासा हुआ है।
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