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सरकारी स्कूलों के खिलाडिय़ों के लिए सरकार के हाथ तंग
Updated Sun, 17 Sep 2017 09:43 PM IST
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संदीप थपलियाल
श्रीनगर। शिक्षा विभाग को चार दिवसीय जिला स्तरीय बेसिक क्रीड़ा प्रतियोगिता (मिनी गढ़देवा) के लिए मात्र 45 हजार रुपये मिले, जबकि स्याह हकीकत यह है कि 50 हजार रुपये से ऊपर खिलाड़ियों को पुरस्कार वितरण में ही खर्च हो रहे हैं। खाने का खर्चा ही साढ़े सात लाख रुपये बैठ रहा है।
खेल मैदान की तैयारी, खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था, टैंट और साउंड सिस्टम और आने-जाने का खर्चा जोड़े तो 10 लाख रुपये तक खर्च हो रहे हैं। ऐसे में सरकार सिर्फ 45 हजार रुपये देकर इतिश्री कर रही है। अगर मददगारों से सहायता न मिले तो क्रीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन संभव नहीं है। प्रदेश सरकार की ओर से प्रत्येक वर्ष क्रीड़ा आयोजन के लिए बेसिक शिक्षा विभाग को 25 लाख रुपये मिलते हैं। इस धनराशि से ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। शिक्षा विभाग 13 जिलों को 45-45 हजार और 95 ब्लॉकों को 8-8 हजार रुपये देता है। संकुल स्तर की प्रतियोगिता के लिए एक धेला नहीं मिलता। उक्त धनराशि से विद्यालयों को प्रतियोगिताएं संपन्न करानी पड़ती हैं। इन दिनों श्रीनगर में पौड़ी जिले की बेसिक विद्यालयों की क्रीड़ा प्रतियोगिताओं की तैयारी चल रही हैं। इस प्रतियोगिता में जिले के 15 ब्लॉकों के लगभग 1500 खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं। इसके अलावा, 100 से ऊपर शिक्षक भी आएंगे। चार दिन की प्रतियोगिता मेें लगभग 10 लाख रुपये का खर्च आ रहा है। यदि एक खिलाड़ी के खाने पर प्रतिदिन 100 रुपये व्यय आता है, तो 4 दिन में 6 लाख रु. की जरूरत पड़ती है। प्रतियोगिता में बालक-बालिका वर्ग की 58 स्पर्धाएं होनी हैं। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल करने पर मेडल दिए जाएंगे। ये मेडल लगभग 50 हजार रुपये के आ रहे हैं। खिलाड़ियों के आने-जाने में भी हजारों रुपये व्यय हो रहा है। सरकार की ओर से सिर्फ 45 हजार रु. मिलने पर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और व्यवसायियों की मदद से आयोजन कराया जा रहा है।
संकुल स्तर पर नहीं मिलता बजट
श्रीनगर। संकुल स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए एक भी रुपये नहीं मिलता है। दिक्कत यह है कि बेसिक स्तर पर फीस माफ है। ऐसे में छात्र-छात्राओं से भी फीस नहीं ली जा सकती है। मजबूरी में शिक्षक ही पूरा खर्च उठाते हैं, जबकि संकुल स्तर की प्रतियोगिता के आयोजन में 10 हजार रुपये खर्च आ जाता है। ब्लॉक स्तर पर 8 हजार रुपये मिलते हैं। इस मामूली रकम में प्रतियोगिता आयोजन, खिलाड़ियों का आवागमन और रहने-ठहरने का खर्च उठाना असंभव है।
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हरीश सरकार की घोषणा पर नहीं हुआ अमल
श्रीनगर। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने क्रीड़ा आयोजन की धनराशि दोगुनी करने यानी 50 लाख रुपये करने की घोषणा की थी। यह घोषणा धरातल में नहीं उतरी। हर साल की तरह इस साल भी मात्र 25 लाख रुपये ही मिले।
25 लाख और मिलेंगे
क्रीड़ा आयोजन के लिए बहुत कम राशि मिलने की बात सरकार के समक्ष रखी गई थी। इस पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि 25 लाख रुपये और दिए जाएंगे। यह धनराशि सप्लीमेंटरी बजट में मिल जाएगी। -डा. राकेश कुंवर, शिक्षा निदेशक उत्तराखंड
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श्रीनगर। शिक्षा विभाग को चार दिवसीय जिला स्तरीय बेसिक क्रीड़ा प्रतियोगिता (मिनी गढ़देवा) के लिए मात्र 45 हजार रुपये मिले, जबकि स्याह हकीकत यह है कि 50 हजार रुपये से ऊपर खिलाड़ियों को पुरस्कार वितरण में ही खर्च हो रहे हैं। खाने का खर्चा ही साढ़े सात लाख रुपये बैठ रहा है।
खेल मैदान की तैयारी, खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था, टैंट और साउंड सिस्टम और आने-जाने का खर्चा जोड़े तो 10 लाख रुपये तक खर्च हो रहे हैं। ऐसे में सरकार सिर्फ 45 हजार रुपये देकर इतिश्री कर रही है। अगर मददगारों से सहायता न मिले तो क्रीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन संभव नहीं है। प्रदेश सरकार की ओर से प्रत्येक वर्ष क्रीड़ा आयोजन के लिए बेसिक शिक्षा विभाग को 25 लाख रुपये मिलते हैं। इस धनराशि से ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। शिक्षा विभाग 13 जिलों को 45-45 हजार और 95 ब्लॉकों को 8-8 हजार रुपये देता है। संकुल स्तर की प्रतियोगिता के लिए एक धेला नहीं मिलता। उक्त धनराशि से विद्यालयों को प्रतियोगिताएं संपन्न करानी पड़ती हैं। इन दिनों श्रीनगर में पौड़ी जिले की बेसिक विद्यालयों की क्रीड़ा प्रतियोगिताओं की तैयारी चल रही हैं। इस प्रतियोगिता में जिले के 15 ब्लॉकों के लगभग 1500 खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं। इसके अलावा, 100 से ऊपर शिक्षक भी आएंगे। चार दिन की प्रतियोगिता मेें लगभग 10 लाख रुपये का खर्च आ रहा है। यदि एक खिलाड़ी के खाने पर प्रतिदिन 100 रुपये व्यय आता है, तो 4 दिन में 6 लाख रु. की जरूरत पड़ती है। प्रतियोगिता में बालक-बालिका वर्ग की 58 स्पर्धाएं होनी हैं। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल करने पर मेडल दिए जाएंगे। ये मेडल लगभग 50 हजार रुपये के आ रहे हैं। खिलाड़ियों के आने-जाने में भी हजारों रुपये व्यय हो रहा है। सरकार की ओर से सिर्फ 45 हजार रु. मिलने पर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और व्यवसायियों की मदद से आयोजन कराया जा रहा है।
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संकुल स्तर पर नहीं मिलता बजट
श्रीनगर। संकुल स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए एक भी रुपये नहीं मिलता है। दिक्कत यह है कि बेसिक स्तर पर फीस माफ है। ऐसे में छात्र-छात्राओं से भी फीस नहीं ली जा सकती है। मजबूरी में शिक्षक ही पूरा खर्च उठाते हैं, जबकि संकुल स्तर की प्रतियोगिता के आयोजन में 10 हजार रुपये खर्च आ जाता है। ब्लॉक स्तर पर 8 हजार रुपये मिलते हैं। इस मामूली रकम में प्रतियोगिता आयोजन, खिलाड़ियों का आवागमन और रहने-ठहरने का खर्च उठाना असंभव है।
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हरीश सरकार की घोषणा पर नहीं हुआ अमल
श्रीनगर। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने क्रीड़ा आयोजन की धनराशि दोगुनी करने यानी 50 लाख रुपये करने की घोषणा की थी। यह घोषणा धरातल में नहीं उतरी। हर साल की तरह इस साल भी मात्र 25 लाख रुपये ही मिले।
25 लाख और मिलेंगे
क्रीड़ा आयोजन के लिए बहुत कम राशि मिलने की बात सरकार के समक्ष रखी गई थी। इस पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि 25 लाख रुपये और दिए जाएंगे। यह धनराशि सप्लीमेंटरी बजट में मिल जाएगी। -डा. राकेश कुंवर, शिक्षा निदेशक उत्तराखंड