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सरकारी अस्पताल में डेंगू रोगियों के लिए नहीं कोई इंतजाम
Updated Tue, 12 Sep 2017 01:03 AM IST
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डेंगू के डंक से बचाने को डॉक्टर ही नहीं तैनात
-- फिजिशियन नहीं होने से राजकीय चिकित्सालय में बना वार्ड पड़ा है खाली
-- उपचार न मिलने से निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
डेंगू के डंक से लोगों को बचाने के लिए एसपीएस राजकीय चिकित्सालय ने कोई इंतजाम ही नहीं किए। अस्पताल में रोगियों की जांच के लिए न तो कोई फिजिशियन है और ना ही कोई टीम बनाई गई। ऐसे में संदिग्ध केसों को दाखिल करने से अस्पताल मना करता आ रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने डेंगू वार्ड तो बनाया लेकिन सुविधाएं न होने से वार्ड पूरा खाली पड़ा हुआ है।
अस्पताल प्रशासन की मानें तो राजकीय चिकित्सालय में बीते अगस्त माह में डेंगू बुखार से ग्रसित चार मरीज भर्ती हुए थे। उस दौरान यहां फिजिशियन डा. सुदेश कोटियाल तैनात थे, जिनके द्वारा रोगियों को उपचार दिया गया। जबकि उसके बाद फिजिशियन डा. कोटियाल की विभागीय स्तर से एक महीने के लिए सोनप्रयाग में ड्यूटी पर भेजा गया है। वह इस माह वहीं तैनाती पर रहेंगे। फिजिशियन के अभाव में रोगियों की निगरानी ठीक से नहीं हो पाने के चलते अस्पताल प्रशासन ने यहां डेंगू ग्रस्त रोगियों को भर्ती करना बंद कर दिया है। जिसके कारण अस्पताल में डेंगू प्रभावित मरीजों के लिए आरक्षित छह बैड खाली पड़े हैं।
क्या कहते हैं सीएमएस
इन दिनों डेंगू के मामले तेजी से बढ़े हैं। अस्पताल में फिजिशियन की तैनाती नहीं होने की वजह से डेंगू रोगियों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। क्योंकि डेंगू मरीजों को चिकित्सक की निगरानी में रहना अनिवार्य है। अस्पताल में तैनात फिजिशियन को विभाग द्वारा सीजनल ड्यूटी पर भेजा गया है। जिसके बाद मुख्यालय को कई दफा प्रस्ताव भेजकर फिजिशियन को तैनात करने की मांग की जा चुकी है, मगर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। एम्स के सहयोग से एक फिजिशियन अस्पताल में ओपीडी व्यवस्था देख रहे हैं।
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डा. एनएस तोमर, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, एसपीएस राजकीय चिकित्सालय।
इंसेट
निजी अस्पताल में बढ़ रहे डेंगू रोगी
मायाकुंड स्थित निर्मल आश्रम अस्पताल में भर्ती होने वाले डेंगू रोगियों की संख्या पखवाड़े भर में बढ़ गई है। अस्पताल के प्रशासक विक्रमजीत सिंह ने बताया कि बीते माह 28 अगस्त से बीते शनिवार तक अस्पताल में 17 डेंगू बुखार से ग्रस्त रोगियों को भर्ती कराया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इनमें से कुछ रोगियों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। वर्तमान में निर्मल आश्रम अस्पताल में करीब एक दर्जन रोगी उपचार करा रहे हैं। प्रशासन ने बताया कि अस्पताल में डेंगू रोगियों के उपचार के लिए मुकम्मल व्यवस्थाएं की गई हैं। इसके अलावा नगर और आसपास के अन्य निजी अस्पतालों में भी कई डेंगू रोगी अपना उपचार करा रहे हैं।
निकायों में फॉगिंग व्यवस्था चौपट
शहर और आसपास के इलाकों में इन दिनों डेंगू रोग के मामले बढ़ रहे हैं। बावजूद इसके नगर निकायों ने फॉगिंग की कोई व्यवस्था नहीं की हुई है। जिसके कारण डेंगू मच्छरों का प्रकोप और अधिक बढ़ रहा है। इस मामले में नगर पालिका ऋषिकेश, मुनिकीरेती व नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक का रवैया एक सा है। रेलवे रोड निवासी ज्योति वर्मा, लक्ष्मणझूला रोड निवासी सीएस पुंडीर, राकेश चौहान, संजय अग्रवाल आदि का कहना है कि क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। मगर न तो नगर निकाय की ओर से नियमित रूप से फॉगिंग कराई जा रही है और न ही नालियों में साफ सफाई और चूना छिड़काव ही किया जा रहा है। लिहाजा लोगों को डेंगू और अन्य जानलेवा बीमारियों से ग्रसित होने का भय सताने लगा है।
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-- फिजिशियन नहीं होने से राजकीय चिकित्सालय में बना वार्ड पड़ा है खाली
-- उपचार न मिलने से निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
डेंगू के डंक से लोगों को बचाने के लिए एसपीएस राजकीय चिकित्सालय ने कोई इंतजाम ही नहीं किए। अस्पताल में रोगियों की जांच के लिए न तो कोई फिजिशियन है और ना ही कोई टीम बनाई गई। ऐसे में संदिग्ध केसों को दाखिल करने से अस्पताल मना करता आ रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने डेंगू वार्ड तो बनाया लेकिन सुविधाएं न होने से वार्ड पूरा खाली पड़ा हुआ है।
अस्पताल प्रशासन की मानें तो राजकीय चिकित्सालय में बीते अगस्त माह में डेंगू बुखार से ग्रसित चार मरीज भर्ती हुए थे। उस दौरान यहां फिजिशियन डा. सुदेश कोटियाल तैनात थे, जिनके द्वारा रोगियों को उपचार दिया गया। जबकि उसके बाद फिजिशियन डा. कोटियाल की विभागीय स्तर से एक महीने के लिए सोनप्रयाग में ड्यूटी पर भेजा गया है। वह इस माह वहीं तैनाती पर रहेंगे। फिजिशियन के अभाव में रोगियों की निगरानी ठीक से नहीं हो पाने के चलते अस्पताल प्रशासन ने यहां डेंगू ग्रस्त रोगियों को भर्ती करना बंद कर दिया है। जिसके कारण अस्पताल में डेंगू प्रभावित मरीजों के लिए आरक्षित छह बैड खाली पड़े हैं।
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क्या कहते हैं सीएमएस
इन दिनों डेंगू के मामले तेजी से बढ़े हैं। अस्पताल में फिजिशियन की तैनाती नहीं होने की वजह से डेंगू रोगियों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। क्योंकि डेंगू मरीजों को चिकित्सक की निगरानी में रहना अनिवार्य है। अस्पताल में तैनात फिजिशियन को विभाग द्वारा सीजनल ड्यूटी पर भेजा गया है। जिसके बाद मुख्यालय को कई दफा प्रस्ताव भेजकर फिजिशियन को तैनात करने की मांग की जा चुकी है, मगर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। एम्स के सहयोग से एक फिजिशियन अस्पताल में ओपीडी व्यवस्था देख रहे हैं।
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डा. एनएस तोमर, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, एसपीएस राजकीय चिकित्सालय।
इंसेट
निजी अस्पताल में बढ़ रहे डेंगू रोगी
मायाकुंड स्थित निर्मल आश्रम अस्पताल में भर्ती होने वाले डेंगू रोगियों की संख्या पखवाड़े भर में बढ़ गई है। अस्पताल के प्रशासक विक्रमजीत सिंह ने बताया कि बीते माह 28 अगस्त से बीते शनिवार तक अस्पताल में 17 डेंगू बुखार से ग्रस्त रोगियों को भर्ती कराया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इनमें से कुछ रोगियों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। वर्तमान में निर्मल आश्रम अस्पताल में करीब एक दर्जन रोगी उपचार करा रहे हैं। प्रशासन ने बताया कि अस्पताल में डेंगू रोगियों के उपचार के लिए मुकम्मल व्यवस्थाएं की गई हैं। इसके अलावा नगर और आसपास के अन्य निजी अस्पतालों में भी कई डेंगू रोगी अपना उपचार करा रहे हैं।
निकायों में फॉगिंग व्यवस्था चौपट
शहर और आसपास के इलाकों में इन दिनों डेंगू रोग के मामले बढ़ रहे हैं। बावजूद इसके नगर निकायों ने फॉगिंग की कोई व्यवस्था नहीं की हुई है। जिसके कारण डेंगू मच्छरों का प्रकोप और अधिक बढ़ रहा है। इस मामले में नगर पालिका ऋषिकेश, मुनिकीरेती व नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक का रवैया एक सा है। रेलवे रोड निवासी ज्योति वर्मा, लक्ष्मणझूला रोड निवासी सीएस पुंडीर, राकेश चौहान, संजय अग्रवाल आदि का कहना है कि क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। मगर न तो नगर निकाय की ओर से नियमित रूप से फॉगिंग कराई जा रही है और न ही नालियों में साफ सफाई और चूना छिड़काव ही किया जा रहा है। लिहाजा लोगों को डेंगू और अन्य जानलेवा बीमारियों से ग्रसित होने का भय सताने लगा है।