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मेजर दुर्गा मल्ल की शहादत जांबाजों के लिए प्रेरणा

Fri, 25 Aug 2017 01:59 AM IST
Updated Fri, 25 Aug 2017 01:59 AM IST
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मेजर दुर्गा मल्ल की शहादत जांबाजों के लिए प्रेरणा
फोटो : ------------
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शहीद दुर्गा मल्ल के बलिदान दिवस पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम
-- 25 अगस्त 1944 को अंग्रेजों ने तिहाड़ जेल में दी थी फांसी

अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला। शहीद दुर्गा मल्ल के बलिदान दिवस पर नगर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन से जुड़े लोगों ने देर शाम तक सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया। उत्तराखंड राज्य नेेपाली भाषा समिति देहरादून, शहीद दुर्गा मल्ल विकास समिति डोईवाला, हेल्प क्रास ट्रस्ट सोसायटी डोईवाला के संयुक्त तत्वाधान में कार्यक्रम का आयोजन होगा। नगर पालिका परिसर में मेजर दुर्गा मल्ल के स्मारक का जीर्णोद्धार , लोकार्पण और पुष्पांजलि के अलावा ऋषिकेश रोड स्थित आशीर्वाद वाटिका परिसर में मुख्य कार्यक्रम का आयोजन होगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, अति विशिष्ट अतिथि सांसद रमेश पोखरियाल निशंक और अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल करेंगे। कार्यक्रम सुबह साढे़ 10 बजे से प्रारंभ हो जाएगा।
जंग-ए-आजादी के निर्णायक संघर्ष में अपने जीवन को देश के लिए न्यौछावर करने वाले उत्तराखंड के महान सपूतों में से एक शहीद मेजर दुर्गा मल्ल भी थे। कई स्वतंत्रता सेनानियों की तरह उन्होंने भी देश की आन बान और शान की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। मेजर दुर्गा मल्ल का जन्म देहरादून जनपद के विकास खंड डोईवाला के एक साधारण परिवार में 1913 में हुआ था। 1930 में बाल्यावस्था में दुर्गा मल्ल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आंदोलन से बेहद प्रभावित हुए। उस समय में वह नौंवी कक्षा में पढ़ रह थे। वर्ष 1931 में दुर्गा मल्ल गोरखा राईफल में भर्ती हो गए। नेताजी सुभाष चंद बोस से प्रभावित होकर उन्होंने भारत को स्वतंत्र देखने के लिए ब्रिटिश फौज को छोड़कर 1942 में आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए।
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27 मार्च 1944 में कोहिमा मणिपुर में आजाद हिंद फौज के लिए जासूूसी करते हुए ब्रिटिश फौज ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अंग्रेज सरकार ने क्षमा मांगने और भूल स्वीकार करने पर फांसी की सजा माफ कर देने का प्रस्ताव दुर्गा मल्ल के सामने रखा। अंग्रेजी हुकूमत के प्रस्ताव को ठुकराते हुए उन्होंने कहा कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। 25 अगस्त 1944 को देशभक्त दुर्गा मल्ल को अंग्रेजी सरकार द्वारा तिहाड़ जेल में फांसी दी गई। मेजर दुर्गा मल्ल ने अपने जीवन बलिदान से उत्तराखंड ही नही संपूर्ण राष्ट्र को गौरवान्वित कर दिया। केंद्र सरकार ने शहीद दुर्गा मल्ल की शहादत को नमन करते हुए संसद भवन में उनकी कांस्य प्रतिमा स्थापित की। डोईवाला नगर पालिका में उनका स्मारक बना है। सरकार ने डोईवाला महाविद्यालय और नगर पालिका ने नगर चौक को उनका नाम दिया है।
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