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भाजपा-कांग्रेस की प्रतिष्ठा का सवाल बना छात्रसंघ चुनाव

Fri, 25 Aug 2017 01:59 AM IST
Updated Fri, 25 Aug 2017 01:59 AM IST
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भाजपा-कांग्रेस की प्रतिष्ठा का सवाल बना छात्रसंघ चुनाव
मूंछ का सवाल बना छात्रसंघ चुनाव
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-- चार डिग्री कॉलेजों के चुनाव परिणामों ने रोचक किया मुकाबला
-- एबीवीपी और एनएसयूआई के प्रत्याशियों के साथ मैदान में उतरे पार्टी कार्यकर्ता
राव राशिद
ऋषिकेश। शुक्रवार को होने वाले सूबे के एकमात्र पीजी ऑटोनामस कॉलेज छात्रसंघ चुनाव को भाजपा-कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। हाल में प्रदेश के कई महाविद्यालयों में एबीवीपी की शिकस्त की भरपाई कार्यकर्ता ऋषिकेश से पीजी ऑटोनामस कॉलेज में जीत दर्ज कराकर करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने प्रचार और जनसंपर्क में जान फूंक दी है। वहीं, चार महाविद्यालयों में जीत के बाद कांग्रेस और एनएसयूूआई के कार्यकर्ताओं का मनोबल भी खासा बढ़ा हुआ है।
पीजी ऑटोनामस कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में जीत के लिए भाजपा समर्थित छात्र संगठन एबीवीपी और कांग्रेस के एनएसयूआई के बीच महासचिव पद को छोड़कर अन्य पदों पर सीधा मुकाबला है। पिछले चुनाव में अध्यक्ष पद पर एबीवीपी का कब्जा था, लेकिन इस बार एनएसयूआई ने जीत के लिए खुद के घोषित प्रत्याशी को हटाकर निर्दलीय को समर्थन दिया है। ऋषिकेश में कांग्रेस किसी भी तरह से एबीवीपी को अध्यक्ष पद पर काबिज होने से रोकना चाहती है, और इसे इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। लिहाजा जीत के लिए दोनों संगठनों के बीच जोर आजमाइश का दौर जारी है। भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ता भी प्रचार के मैदान में उतर गए हैं। चाहे वह डोर-टू-डोर कैंपेन में शामिल होना हो या फिर जुलूस प्रदर्शन आदि में कदमताल। दोनों दलों के कार्यकर्ता ऋषिकेश के छात्रसंघ चुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बना चुके हैं। हालांकि, किसकी जीत होगी और किसकी हार, इसका फैसला शुक्रवार शाम तक हो जाएगा।
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चुनाव पर वरिष्ठ नेताओं की भी नजर
पीजी ऑटोनामस कॉलेज में शुक्रवार को होने वाले छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी और एनएसयूआई के प्रत्याशियों पर भाजपा-कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी नजर बनाए हुए हैं। नेता चुनाव प्रभारियों व कार्यकर्ताओं से पल-पल की फीडबैक ले रहे हैं। डोर-टू-डोर कैंपेन में भी स्थानीय कार्यकर्ताओं को शामिल होने के लिए कहा गया है। उधर, शुक्रवार को होने वाले चुनाव और उसके बाद परिणाम को लेकर प्रत्याशियों की दिल की धड़कने भी बढ़ गई हैं।
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महासचिव पद पर ही आर्यन का फोकस
आर्यन ग्रुप पिछले पांच वर्षों से सिर्फ महासचिव पद पर ही अपना फोकस किए हुए है। इस दौरान उनके दो प्रत्याशी वर्ष 2015 में सागर सिंह और 2016 में दीपक रावत महासचिव निर्वाचित हुए थे। इस बार भी आर्यन ग्रुप ने चुनाव में सिर्फ महासचिव पद पर ही ताल ठोकी है। ग्रुप ने शिवम भंडारी पर अपना दांव खेला है।
यह रहे छात्रसंघ अध्यक्ष
2011- विवेक शर्मा आर्यन ग्र्रुप
2012- सुमित त्यागी एनएसयूआई
2013- गौरव राणा एबीवीपी
2014- विपुल पोखरियाल एनएसयूआई
2015- संदीप शर्मा एनएसयूआई
2016- अमित पंवार एबीवीपी
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