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पत्रकारिता व समाज में धर्मानंद उनियाल के योगदान को बताया अभूतपूर्व
Updated Mon, 14 Aug 2017 10:15 PM IST
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श्रीनगर। वरिष्ठ पत्रकार स्व. धर्मानंद उनियाल की 8वीं पुण्य तिथि पर शहर में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने पत्रकारिता व समाज में उनके योगदान को अभूतपूर्व बताया।
अपर बाजार में स्थित पुस्तकालय में आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता पूर्व पालिका अध्यक्ष कृष्णानंद मैठानी ने कहा कि धर्मानदं उनियाल एक साहित्यकार, पत्रकार होने के साथ-साथ एक कर्मठ सामाजिक कार्यकर्ता रहे। बलि प्रथा, नशामुक्ति के आंदोलनों में स्वामी मनमंथन के साथ अमूल्य सहयोग दिया। मैठाणी ने कहा कि स्व. धर्मानंद उनियाल की गढ़वाल विवि आंदोलन व उत्तराखंड राज्य आंदोलन में प्रभावी भूमिका रही। वहीं गंगा असनोड़ा थपलियाल ने कहा कि उनियाल एक कर्मठ व्यक्तित्व थे, जिनके भीतर गढ़वाल का इतिहास और भूगोल हिलोरे मारते दिखाई देता था। उत्तराखंड के मठ मंदिरों पर उन्होंने 8 पुस्तकें प्रकाशित की। और उत्तराखंड में आज जो बड़े दैनिक अखबार हैं उनको श्रीनगर क्षेत्र में विस्थापित कराने में बड़ी भूमिका रही। उनियाल ने जिस दौर में पत्रकारिता की वह विशुद्ध रूप से मिशनरी पत्रकारिता का दौर था। इस दौरान डा. राकेश भट़्ट, मनोज उनियाल, दिनेश उनियाल, मुकेश सेमवाल मनीषा सेमवाल, पूजा भंडारी, कुसुम पांडे आदि मौजूद थे।
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अपर बाजार में स्थित पुस्तकालय में आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता पूर्व पालिका अध्यक्ष कृष्णानंद मैठानी ने कहा कि धर्मानदं उनियाल एक साहित्यकार, पत्रकार होने के साथ-साथ एक कर्मठ सामाजिक कार्यकर्ता रहे। बलि प्रथा, नशामुक्ति के आंदोलनों में स्वामी मनमंथन के साथ अमूल्य सहयोग दिया। मैठाणी ने कहा कि स्व. धर्मानंद उनियाल की गढ़वाल विवि आंदोलन व उत्तराखंड राज्य आंदोलन में प्रभावी भूमिका रही। वहीं गंगा असनोड़ा थपलियाल ने कहा कि उनियाल एक कर्मठ व्यक्तित्व थे, जिनके भीतर गढ़वाल का इतिहास और भूगोल हिलोरे मारते दिखाई देता था। उत्तराखंड के मठ मंदिरों पर उन्होंने 8 पुस्तकें प्रकाशित की। और उत्तराखंड में आज जो बड़े दैनिक अखबार हैं उनको श्रीनगर क्षेत्र में विस्थापित कराने में बड़ी भूमिका रही। उनियाल ने जिस दौर में पत्रकारिता की वह विशुद्ध रूप से मिशनरी पत्रकारिता का दौर था। इस दौरान डा. राकेश भट़्ट, मनोज उनियाल, दिनेश उनियाल, मुकेश सेमवाल मनीषा सेमवाल, पूजा भंडारी, कुसुम पांडे आदि मौजूद थे।
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