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लामबगड़ भूस्खलन जोन पर एनएच ने शुरु किया क्रेट वायर लगाने का काम शुरू
Updated Wed, 26 Jul 2017 10:26 PM IST
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जोशीमठ। बदरीनाथ हाईवे पर नासूर बने लामबगड़ भूस्खलन का ट्रीटमेंट कार्य शुरू हो गया है। लोनिवि की एनएच इकाई की ओर से दरक रही लामबगड़ की चट्टान पर वायरक्रेट (तार का जाल) लगाई जा रही है। इससे काफी हद तक भूस्खलन रुकेगा जिससे हाईवे जल्द बंद नहीं हो सकेगा।
बदरीनाथ हाईवे पर लामबगड़ भूस्खलन जोन तीन दशक से बदरीनाथ धाम की सुचारु तीर्थयात्रा में खलल डाल रहा है। एनएच इकाई की ओर से यहां भूस्खलन वाली चट्टान पर वायरक्रेट लगाई जा रही है। इससे पत्थर और मलबे का छिटकना बंद हो जाएगा। लामबगड़ के ट्रीटमेंट पर एनएच इकाई की ओर से करीब 92 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यहां भूस्खलन वाली चट्टान पर करीब आठ सौ मीटर दायरे पर वायरक्रेट लगाने की योजना है। लामबगड़ चट्टान के सबसे खतरनाक हिस्से पर तीन सौ मीटर तक वायरक्रेट लगा भी दी गई है, जबकि नदी साइड से भी दीवार निर्माण किया जा रहा है। लोनिवि (एनएच) के ईई प्रवीण कुमार का कहना है कि मौसम खुलने के बाद भूस्खलन क्षेत्र का स्थायी समाधान कर लिया जाएगा। इधर, जोशीमठ के उप जिलाधिकारी योगेंद्र सिह ने बताया कि बदरीनाथ हाईवे के लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र में पहाड़ी से बार-बार आ रहा मलबा आवाजाही करने वाले वाहनों के लिए खतरे का सबब बना है। यहां अस्थायी तौर पर सुरक्षा को देखते हुए वायरक्रेट लगाई जा रही है।
बदरीनाथ हाईवे पर लामबगड़ भूस्खलन जोन तीन दशक से बदरीनाथ धाम की सुचारु तीर्थयात्रा में खलल डाल रहा है। एनएच इकाई की ओर से यहां भूस्खलन वाली चट्टान पर वायरक्रेट लगाई जा रही है। इससे पत्थर और मलबे का छिटकना बंद हो जाएगा। लामबगड़ के ट्रीटमेंट पर एनएच इकाई की ओर से करीब 92 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यहां भूस्खलन वाली चट्टान पर करीब आठ सौ मीटर दायरे पर वायरक्रेट लगाने की योजना है। लामबगड़ चट्टान के सबसे खतरनाक हिस्से पर तीन सौ मीटर तक वायरक्रेट लगा भी दी गई है, जबकि नदी साइड से भी दीवार निर्माण किया जा रहा है। लोनिवि (एनएच) के ईई प्रवीण कुमार का कहना है कि मौसम खुलने के बाद भूस्खलन क्षेत्र का स्थायी समाधान कर लिया जाएगा। इधर, जोशीमठ के उप जिलाधिकारी योगेंद्र सिह ने बताया कि बदरीनाथ हाईवे के लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र में पहाड़ी से बार-बार आ रहा मलबा आवाजाही करने वाले वाहनों के लिए खतरे का सबब बना है। यहां अस्थायी तौर पर सुरक्षा को देखते हुए वायरक्रेट लगाई जा रही है।
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