फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   राम मंदिर की लहर में परवान चढ़ी सावन की कांवड़ यात्रा .. ..

राम मंदिर की लहर में परवान चढ़ी सावन की कांवड़ यात्रा .. ..

Mon, 10 Jul 2017 10:47 PM IST
Updated Mon, 10 Jul 2017 10:47 PM IST
विज्ञापन
राम मंदिर की लहर में परवान चढ़ी सावन की कांवड़ यात्रा .. ..
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
सावन मास की कांवड़ यात्रा करीब 25 वर्षोँ से परवान चढ़ी है। पहले फागुन मास में निकलने वाली कांवड़ यात्रा ही प्रमुख थी। सावन में कम श्रद्धालु जल भरने पहुंचते थे। वर्ष 1990 से चली राम लहर के दौरान सावन की कांवड़ यात्रा परवान चढ़ी। शिव भक्तों ने इसी हरिद्वार में संकल्प लिया था कि अपमान के प्रतीक चिह्नों को मिटा देंगे।
उत्तर प्रदेश में मुलायम शासन के दौरान विश्व हिंदू परिषद ने कार सेवकों के माध्यम से अयोध्या का विवादित ढांचा ढहाने का आंदोलन शुरू किया था। यह आंदोलन धीरे-धीरे जोर पकड़ता रहा और वर्ष 1992 में हरिद्वार में धर्मसंसद में केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल, रामजन्म भूमि, न्यास समिति तथा संतों की धर्म संसद में छह दिसंबर से कार सेवा का निर्णय ले लिया था। इस निर्णय के बाद पड़े सावन में भारी संख्या में कांवड़िए गंगाजल भरने हरिद्वार पहुंचे। यह कांवड़िए ये ार सेवक भी थे। उन्होंने इसी गंगा के घाट पर संकल्प लिया था कि वे अपमान के प्रति अयोध्या, काशी और मथुरा के प्रतीक चिह्नों ं को मिटा देंगे। धर्म संसद गंगा के तट पर लिया गया संकल्प रंग लाया और 6 दिसंबर को कार सेवकों ने तमाम प्रतिबंधों के बावजूद विवादित ढांचा ध्वस्त कर दिया। तब से प्रतिवर्ष सावन मास की कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों की भीड़ बढ़ती चली गई है। शुरूआती वर्षों में कांवड़ियों की संख्या करीब 40 लाख रहती थी। जबकि राम लहर से पूर्व सावन में करीब 5 लाख और फागुन में 40 से 50 लाख कांवड़िए गंगाजल भरने आते थे।
विज्ञापन

ढांचा ध्वस्तीकरण ने कैलेंडर बदल दिया। अब फागुन में कम और सावन में अधिक कांवड़िए आने लगे। धीरे-धीरे यह संख्या 60 लाख, 80 लाख होते हुए एक करोड़ से पार हो गई। पिछले वर्षों से करोड़ों कांवड़िए जल भरने आते हैं। यद्यपि कांवड़ियों की युवा पीढ़ी 1992 के उस संकल्प को भूल गई किंतु कांवड़ियों की संख्या कभी कम न हुई। कांवड़ यात्रा एक मात्र ऐसी यात्रा है जो कभी भी विफल नहीं रही। वर्ष दर वर्ष आने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह सभी कांवड़िए शिव और गंगा के प्रति असीम आस्था लेकर आते हैं। उनकी आस्था को किसी भी पैमाने पर तोला नहीं जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed