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स्थायी मेलाक्षेत्र में अस्थायी व्यवस्थाएं
Updated Tue, 13 Jun 2017 02:07 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
तीर्थनगरी में देश दुनिया के तीर्थाटकों, पर्यटकों की आमद सालभर रहती है। जो यहां गंगा स्नान, तीर्थदर्शन, सत्संग श्रवण, ध्यान-योग के अभ्यास, ट्रैकिंग, बीच कैंपिंग व गंगा में वाटर राफ्टिंग का लुत्फ उठाने के लिए उमड़ते हैं। यह क्रम वर्षभर रहता है। बावजूद इसके राज्य सरकार व प्रशासन यहां आने वाले श्रद्धालुओं, सैलानियों के लिए स्थायी व्यवस्थाएं जुटाने को लेकर गंभीर नहीं हैं। लिहाजा हर बार कुंभ मेला व श्रावण मास की कांवड़ यात्रा के समय कामचलाऊ अस्थायी व्यवस्थाओं से किसी तरह मेला निपटा दिया जाता है और वर्ष के शेष महीनों मेें आने वाले दुनियाभर के सैलानी यहां की असुविधाओं से जूझते हैं।
उत्तराखंड सरकार राज्य को विश्व का टूरिस्ट हब बनाने का मंसूबा पाले है। इसके लिए सभी सरकारें जोर-शोर से दावा और घोषणएं करती हैं। इसके बावजूद टूरिस्ट प्वाइंटो और तीर्थ स्थलों पर कामचलाऊ व्यवस्था ही की जाती है। सरकार व प्रशासन कुंभ मेला व हर साल आयोजित होने वाली श्रावण मास की कांवड़ यात्रा को लेकर बैठकें कर सुविधाएं जुटाने का दावा तो करता है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता है। पार्किंग, पेयजल, पथ प्रकाश, यातायात आदि कुछ गिनी-चुनी व्यवस्थाओं का फौरी इंतजाम करके जिम्मेदारी निभा दी जाती है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो तीर्थनगरी ऋषिकेश में वर्षभर में करीब एक करोड़ से अधिक सैलानी जुटते हैं। गतवर्ष का श्रावण मास में श्रद्धालुओं का आंकड़ा 44 लाख था।
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ऋषिकेश।
तीर्थनगरी में देश दुनिया के तीर्थाटकों, पर्यटकों की आमद सालभर रहती है। जो यहां गंगा स्नान, तीर्थदर्शन, सत्संग श्रवण, ध्यान-योग के अभ्यास, ट्रैकिंग, बीच कैंपिंग व गंगा में वाटर राफ्टिंग का लुत्फ उठाने के लिए उमड़ते हैं। यह क्रम वर्षभर रहता है। बावजूद इसके राज्य सरकार व प्रशासन यहां आने वाले श्रद्धालुओं, सैलानियों के लिए स्थायी व्यवस्थाएं जुटाने को लेकर गंभीर नहीं हैं। लिहाजा हर बार कुंभ मेला व श्रावण मास की कांवड़ यात्रा के समय कामचलाऊ अस्थायी व्यवस्थाओं से किसी तरह मेला निपटा दिया जाता है और वर्ष के शेष महीनों मेें आने वाले दुनियाभर के सैलानी यहां की असुविधाओं से जूझते हैं।
उत्तराखंड सरकार राज्य को विश्व का टूरिस्ट हब बनाने का मंसूबा पाले है। इसके लिए सभी सरकारें जोर-शोर से दावा और घोषणएं करती हैं। इसके बावजूद टूरिस्ट प्वाइंटो और तीर्थ स्थलों पर कामचलाऊ व्यवस्था ही की जाती है। सरकार व प्रशासन कुंभ मेला व हर साल आयोजित होने वाली श्रावण मास की कांवड़ यात्रा को लेकर बैठकें कर सुविधाएं जुटाने का दावा तो करता है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता है। पार्किंग, पेयजल, पथ प्रकाश, यातायात आदि कुछ गिनी-चुनी व्यवस्थाओं का फौरी इंतजाम करके जिम्मेदारी निभा दी जाती है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो तीर्थनगरी ऋषिकेश में वर्षभर में करीब एक करोड़ से अधिक सैलानी जुटते हैं। गतवर्ष का श्रावण मास में श्रद्धालुओं का आंकड़ा 44 लाख था।
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