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13 साल में मिली 983 मरीजों को राज्य व्याधि सहायता निधि
Updated Tue, 15 May 2018 02:24 AM IST
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परवान नहीं चढ़ पा रही है राज्य व्याधि सहायता निधि योजना
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले मरीजों को राज्य व्याधि सहायता निधि का भरपूर लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के ही आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2005 से लेकर 2018 में अब तक महज 983 मरीजों को ही योजना का लाभ मिल पाया है। जो योजना की अवधि और लाभार्थियों की संख्या को देखते हुए बहुत कम है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि योजना के तहत जो भी आवेदन आ रहे हैं उन्हें जल्द आर्थिक सहायता मुहैया करायी जा रही है।
उल्लेखनीय है कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को कैंसर, हृदय रोग, ब्रेन ट्यूमर, एड्स, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट, टोटल हिप रिप्लेसमेंट जैसी बीमारियों के इलाज के लिए केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक मरीज को डेढ़ लाख की आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाती है। अधिक से अधिक मरीजों को योजना का लाभ मिले, इसके लिए एम्स नई दिल्ली, पीजीआई लखनऊ व चंडीगढ़, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल देहरादून, जोलीग्रांट हॉस्पिटल, नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट, बत्रा हॉस्पिटल, सफदरजंग हॉस्पिटल नई दिल्ली, मिशन हॉस्पिटल बरेली समेत देश के 19 नामी अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है, लेकिन इतना सब कुछ होने के बावजूद 2005 से लेकर 2018 के बीच अब तक राज्य की 983 मरीजों को ही योजना का लाभ मिल पाया है। औसत के हिसाब से देखें एक साल में 75 मरीजोें को योजना का लाभ मिल पाया। जो बीपीएल परिवारों व मरीजों की संख्या को देखते हुए बेहद कम है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का बचाव में कहना है कि जिन परिवारों ने योजना के तहत आवेदन किया उन्हें आर्थिक सहायता मुहैया कराई गई। स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त निदेशक डॉ. मीतू शाह का कहना है कि योजना का अधिकतम लोगों को लाभ मिले, इसके लिए विभागीय स्तर पर व्यापक प्रचार किया जा रहा है।
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ऐसे पाएं योजना का लाभ
संयुक्त निदेशक डॉ. मीतू शाह का कहना है कि कैंसर ब्रेन ट्यूमर, स्पाइनल सर्जरी, मेजर वैस्कुलर सर्जरी, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए राज्य व्याधि सहायता निधि योजना का लाभ उठाया जा सकता है। योजना का लाभ पाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर से रेफर करवाकर एम्स समेत देश के 19 अस्पतालों में भर्ती होकर योजना का लाभ लिया जा सकता है। अस्पतालों के विशेषज्ञों को बीपीएल कार्ड दिखाकर उन्हें राज्य व्याधि सहायता निधि के तहत इलाज करने का अनुरोध किया जा सकता है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन शासन को भेजा जाता है और शासन स्तर पर गठित समिति के बाद धनराशि अस्पताल के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है।
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प्रक्रिया को आसान करने की तैयारी
संयुक्त निदेशक डॉ. शाह के मुताबिक योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया जटिल है, जिसे आसान करने की तैयारी है। शासन स्तर पर इसका प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक अब योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन पहले सीएमओ से स्वास्थ्य निदेशालय और वहां से शासन को भेजा जाता हैं। वहां से अनुमति मिलने पर ही धनराशि मिल पाती है। इस प्रक्रिया में काफी वक्त लग जाता है। नए प्रस्ताव के तहत आवेदन सीएमओ से सीधे जिलाधिकारी भेजा जाए। जो डीएम के स्तर से ही पास कर दिया जाए। उनकी अनुमति मिलते ही योजना का लाभ मरीज को दे दिया जाए। इस प्रक्रिया में कम दिन लगेंगे। इस संबंध में जल्द ही बैठक होने वाली है जिसमें कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले मरीजों को राज्य व्याधि सहायता निधि का भरपूर लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के ही आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2005 से लेकर 2018 में अब तक महज 983 मरीजों को ही योजना का लाभ मिल पाया है। जो योजना की अवधि और लाभार्थियों की संख्या को देखते हुए बहुत कम है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि योजना के तहत जो भी आवेदन आ रहे हैं उन्हें जल्द आर्थिक सहायता मुहैया करायी जा रही है।
उल्लेखनीय है कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को कैंसर, हृदय रोग, ब्रेन ट्यूमर, एड्स, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट, टोटल हिप रिप्लेसमेंट जैसी बीमारियों के इलाज के लिए केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक मरीज को डेढ़ लाख की आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाती है। अधिक से अधिक मरीजों को योजना का लाभ मिले, इसके लिए एम्स नई दिल्ली, पीजीआई लखनऊ व चंडीगढ़, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल देहरादून, जोलीग्रांट हॉस्पिटल, नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट, बत्रा हॉस्पिटल, सफदरजंग हॉस्पिटल नई दिल्ली, मिशन हॉस्पिटल बरेली समेत देश के 19 नामी अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है, लेकिन इतना सब कुछ होने के बावजूद 2005 से लेकर 2018 के बीच अब तक राज्य की 983 मरीजों को ही योजना का लाभ मिल पाया है। औसत के हिसाब से देखें एक साल में 75 मरीजोें को योजना का लाभ मिल पाया। जो बीपीएल परिवारों व मरीजों की संख्या को देखते हुए बेहद कम है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का बचाव में कहना है कि जिन परिवारों ने योजना के तहत आवेदन किया उन्हें आर्थिक सहायता मुहैया कराई गई। स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त निदेशक डॉ. मीतू शाह का कहना है कि योजना का अधिकतम लोगों को लाभ मिले, इसके लिए विभागीय स्तर पर व्यापक प्रचार किया जा रहा है।
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ऐसे पाएं योजना का लाभ
संयुक्त निदेशक डॉ. मीतू शाह का कहना है कि कैंसर ब्रेन ट्यूमर, स्पाइनल सर्जरी, मेजर वैस्कुलर सर्जरी, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए राज्य व्याधि सहायता निधि योजना का लाभ उठाया जा सकता है। योजना का लाभ पाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर से रेफर करवाकर एम्स समेत देश के 19 अस्पतालों में भर्ती होकर योजना का लाभ लिया जा सकता है। अस्पतालों के विशेषज्ञों को बीपीएल कार्ड दिखाकर उन्हें राज्य व्याधि सहायता निधि के तहत इलाज करने का अनुरोध किया जा सकता है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन शासन को भेजा जाता है और शासन स्तर पर गठित समिति के बाद धनराशि अस्पताल के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है।
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प्रक्रिया को आसान करने की तैयारी
संयुक्त निदेशक डॉ. शाह के मुताबिक योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया जटिल है, जिसे आसान करने की तैयारी है। शासन स्तर पर इसका प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक अब योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन पहले सीएमओ से स्वास्थ्य निदेशालय और वहां से शासन को भेजा जाता हैं। वहां से अनुमति मिलने पर ही धनराशि मिल पाती है। इस प्रक्रिया में काफी वक्त लग जाता है। नए प्रस्ताव के तहत आवेदन सीएमओ से सीधे जिलाधिकारी भेजा जाए। जो डीएम के स्तर से ही पास कर दिया जाए। उनकी अनुमति मिलते ही योजना का लाभ मरीज को दे दिया जाए। इस प्रक्रिया में कम दिन लगेंगे। इस संबंध में जल्द ही बैठक होने वाली है जिसमें कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।