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मिशन में कर्मचारियों के मानदेय वृद्धि के नाम पर खेल
Updated Fri, 16 Feb 2018 01:36 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला /देहरादून।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कर्मचारियों, अधिकारियों की मानदेय वृद्धि के नाम पर विभाग खेल कर रहा है। नियमानुसार किसी कर्मचारी के एक साल के कार्य के मूल्यांकन के आधार पर वेतन वृद्धि की जानी चाहिए, लेकिन विभाग ने कर्मचारियों को तीन महीने, छह महीने और 11 महीने के अनुबंध पर रखा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेशभर में 2800 से अधिक कर्मचारियों, अधिकारियों को अनुबंध के आधार पर नियुक्ति दी गई है। कोई कर्मचारी व अधिकारी नियमित नियुक्त का दावा न कर सके विभाग ने इसका तोड़ निकालते हुए कर्मचारियों को एक साल के अनुबंध के आधार पर रखने के बजाय कुछ को तीन महीने, छह महीने और कुछ को 11 महीने के अनुबंध पर रखा है। इस अनुबंध के समाप्त होने के बाद फिर से इन्हें नए अनुबंध पर सेवा विस्तार दिया जाता है। इससे मानदेय को लेकर जहां विसंगति पैदा हो गई है। वहीं विभाग का बड़ा खेल सामने आया है। कर्मचारियों का कहना है कि इस साल सालाना वेतन वृद्धि एवं रिवाइज्ड वेतनमान बजट में स्वीकृति के बाद भी नहीं मिला है। एनएचएम संविदा कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुनील भंडारी ने कहा कि कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाना चाहिए। केंद्र सरकार कर्मचारियों को राज्य के अधीन मानती है और राज्य सरकार कर्मियों को प्रोजेक्ट के अधीन। बहरहाल स्वास्थ्य मिशन से जुड़े होने के बावजूद कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवाओं का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में काम के लिए कर्मचारियों को अनुबंध पर रखा गया है। कर्मचारियों के काम का मूल्यांकन कर नियमानुसार मानदेय वृद्धि की जा रही है।
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-बीएस टोलिया, निदेशक एचआर एनएचएम
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कर्मचारियों, अधिकारियों की मानदेय वृद्धि के नाम पर विभाग खेल कर रहा है। नियमानुसार किसी कर्मचारी के एक साल के कार्य के मूल्यांकन के आधार पर वेतन वृद्धि की जानी चाहिए, लेकिन विभाग ने कर्मचारियों को तीन महीने, छह महीने और 11 महीने के अनुबंध पर रखा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेशभर में 2800 से अधिक कर्मचारियों, अधिकारियों को अनुबंध के आधार पर नियुक्ति दी गई है। कोई कर्मचारी व अधिकारी नियमित नियुक्त का दावा न कर सके विभाग ने इसका तोड़ निकालते हुए कर्मचारियों को एक साल के अनुबंध के आधार पर रखने के बजाय कुछ को तीन महीने, छह महीने और कुछ को 11 महीने के अनुबंध पर रखा है। इस अनुबंध के समाप्त होने के बाद फिर से इन्हें नए अनुबंध पर सेवा विस्तार दिया जाता है। इससे मानदेय को लेकर जहां विसंगति पैदा हो गई है। वहीं विभाग का बड़ा खेल सामने आया है। कर्मचारियों का कहना है कि इस साल सालाना वेतन वृद्धि एवं रिवाइज्ड वेतनमान बजट में स्वीकृति के बाद भी नहीं मिला है। एनएचएम संविदा कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुनील भंडारी ने कहा कि कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाना चाहिए। केंद्र सरकार कर्मचारियों को राज्य के अधीन मानती है और राज्य सरकार कर्मियों को प्रोजेक्ट के अधीन। बहरहाल स्वास्थ्य मिशन से जुड़े होने के बावजूद कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवाओं का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में काम के लिए कर्मचारियों को अनुबंध पर रखा गया है। कर्मचारियों के काम का मूल्यांकन कर नियमानुसार मानदेय वृद्धि की जा रही है।
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-बीएस टोलिया, निदेशक एचआर एनएचएम