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जिला पंचायत में कांग्रेस की राजनीति में उबाल
Updated Mon, 25 Dec 2017 12:34 AM IST
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रुड़की। जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी को निलंबित किए जाने के बाद शासन की ओर से नामित तीन सदस्यीय संचालन समिति की ओर से बुलाई बोर्ड की पहली बैठक में विधायक ममता राकेश और काजी निजामुद्दीन के शामिल होने पर कांग्रेस की राजनीति गरमा गई है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चौधरी राजेंद्र सिंह ने दोनों विधायकों के इस कदम को पार्टी को कमजोर करने वाला बताते हुए हाईकमान से दोनों की शिकायत की। जबकि विधायकों का दावा है कि वह चौधरी राजेंद्र का विरोध करने नहीं गए थे बल्कि विकास के एजेंडे पर वार्ता करने बैठक में गए थे।
जिला पंचायत अध्यक्ष की तीन सदस्यीय संचालन समिति की ओर से शनिवार को बोर्ड की पहली बैठक बुलाई थी। इसमें भाजपा नेताओं के सामने जहां बैठक में कोरम पूरा करने की चुनौती थी वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष इस उम्मीद में थी कि बहुमत उनके पास है। ऐसे में बैठक खुद ब खुद स्थगित हो जाएगी लेकिन, बैठक में कई ऐसे जिला पंचायत सदस्य भी शामिल हुए जो सविता चौधरी खेमे के थे। इतना ही नहीं कांग्रेस के तीन में से दो विधायक काजी निजामुद्दीन और ममता राकेश भी बैठक में पहुंच गए। इससे जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी और उनके जेठ राजेंद्र चौधरी के खेमे को भारी झटका लगा है।
रविवार को जिला पंचायत के अतिथि गृह में पत्रकारवार्ता के दौरान जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष चौधरी राजेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने काजी निजामुद्दीन का कभी विरोध नहीं किया। भगवानपुर की विधायक ममता राकेश के विधानसभा चुनाव में भी ईमानदारी से काम किया। बावजूद इसके दोनों विधायक जिला पंचायत संचालन समिति की ओर से बुलाई बैठक में शामिल हुए। इससे कांग्रेस को झटका लगा है। इन विधायकों को बताना चाहिए कि वे कांग्रेस को कहां ले जाना चाहते हैं। उन्होंने इसकी शिकायत पार्टी हाईकमान से कर दी है।
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इस संबंध में विधायक काजी निजामुद्दीन का कहना है कि वे बैठक में किसी का समर्थन करने नहीं गए थे बल्कि क्षेत्र की समस्याएं रखने गए थे। अगर पार्टी का ऐसा कोई नीतिगत फैसला या निर्देश होता कि उन्हें बैठक में शामिल नहीं होना है तो वे नहीं जाते। भविष्य में भी अगर उन्हें ऐसी बैठकों में जाना पड़ा तो वे जरूर जाएंगे। भगवानपुर की विधायक ममता राकेश का भी कहना है कि वे भी विकास के एजेंडे को लेकर बैठक में शामिल हुई थी। इसे राजनीतिक आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। जहां तक पार्टी का सवाल है वे हर स्तर पर पार्टी के साथ हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के मामले में मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। जो फैसला आएगा उसका सम्मान करेंगे।
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जिला पंचायत अध्यक्ष की तीन सदस्यीय संचालन समिति की ओर से शनिवार को बोर्ड की पहली बैठक बुलाई थी। इसमें भाजपा नेताओं के सामने जहां बैठक में कोरम पूरा करने की चुनौती थी वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष इस उम्मीद में थी कि बहुमत उनके पास है। ऐसे में बैठक खुद ब खुद स्थगित हो जाएगी लेकिन, बैठक में कई ऐसे जिला पंचायत सदस्य भी शामिल हुए जो सविता चौधरी खेमे के थे। इतना ही नहीं कांग्रेस के तीन में से दो विधायक काजी निजामुद्दीन और ममता राकेश भी बैठक में पहुंच गए। इससे जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी और उनके जेठ राजेंद्र चौधरी के खेमे को भारी झटका लगा है।
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रविवार को जिला पंचायत के अतिथि गृह में पत्रकारवार्ता के दौरान जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष चौधरी राजेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने काजी निजामुद्दीन का कभी विरोध नहीं किया। भगवानपुर की विधायक ममता राकेश के विधानसभा चुनाव में भी ईमानदारी से काम किया। बावजूद इसके दोनों विधायक जिला पंचायत संचालन समिति की ओर से बुलाई बैठक में शामिल हुए। इससे कांग्रेस को झटका लगा है। इन विधायकों को बताना चाहिए कि वे कांग्रेस को कहां ले जाना चाहते हैं। उन्होंने इसकी शिकायत पार्टी हाईकमान से कर दी है।
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इस संबंध में विधायक काजी निजामुद्दीन का कहना है कि वे बैठक में किसी का समर्थन करने नहीं गए थे बल्कि क्षेत्र की समस्याएं रखने गए थे। अगर पार्टी का ऐसा कोई नीतिगत फैसला या निर्देश होता कि उन्हें बैठक में शामिल नहीं होना है तो वे नहीं जाते। भविष्य में भी अगर उन्हें ऐसी बैठकों में जाना पड़ा तो वे जरूर जाएंगे। भगवानपुर की विधायक ममता राकेश का भी कहना है कि वे भी विकास के एजेंडे को लेकर बैठक में शामिल हुई थी। इसे राजनीतिक आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। जहां तक पार्टी का सवाल है वे हर स्तर पर पार्टी के साथ हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के मामले में मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। जो फैसला आएगा उसका सम्मान करेंगे।