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कला संस्कृति को ऋषि मुनियों ने दिया बढ़ावा : ममगाईं
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
उत्तराखंड संस्कृति का स्रोत है। ऋषि मुनियों ने भी प्रदेश की कला संस्कृति को बढ़ावा दिया है। इतना ही नहीं संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए रुद्रप्रयाग में नारद के द्वारा संगीत विद्यालय खोला गया था।
ये बातें सोमवार को बंजारावाला के टी एस्टेट में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने कहीं। कथा वाचक आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने वृंदावन में मुरली की तान से पशु, पक्षी, जीव, जंतु और गोपियों के प्रभावित होने के प्रसंग का वर्णन किया। इस मौके पर द्वारिका नौटियाल के लोक गीत पिंगला का विमोचन किया गया। इस मौके पर संजय राणा, संगीता, जगदीश नौटियाल, प्रकाश भट्ट, महेश भट्ट, हरीश जोशी, गंभीर असवाल, नागेंद्र, अमर सिंह, शांति रावत, संदीप बहुगुणा, अजय मिश्र आदि मौजूद रहेे।
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उत्तराखंड संस्कृति का स्रोत है। ऋषि मुनियों ने भी प्रदेश की कला संस्कृति को बढ़ावा दिया है। इतना ही नहीं संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए रुद्रप्रयाग में नारद के द्वारा संगीत विद्यालय खोला गया था।
ये बातें सोमवार को बंजारावाला के टी एस्टेट में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने कहीं। कथा वाचक आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने वृंदावन में मुरली की तान से पशु, पक्षी, जीव, जंतु और गोपियों के प्रभावित होने के प्रसंग का वर्णन किया। इस मौके पर द्वारिका नौटियाल के लोक गीत पिंगला का विमोचन किया गया। इस मौके पर संजय राणा, संगीता, जगदीश नौटियाल, प्रकाश भट्ट, महेश भट्ट, हरीश जोशी, गंभीर असवाल, नागेंद्र, अमर सिंह, शांति रावत, संदीप बहुगुणा, अजय मिश्र आदि मौजूद रहेे।
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