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ब्लड बैंक में पांच पैथोलॉजिस्टों को दोबारा नियुक्ति
Updated Wed, 26 Sep 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
दून मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में तैनात पांच पैथोलॉजिस्टों को एक साल के लिए संविदा पर दोबारा नियुक्ति दे दी गई है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने ब्लड बैंक में पैथोलॉजिस्टों की भारी कमी को देखते हुए यह कदम उठाया है। पैथोलॉजिस्टों को संविदा पर दोबारा नियुक्त किए जाने से तमाम तरह की सुविधाएं बाधित नहीं होंगी।
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता ने बताया कि डॉ. डीसी ध्यानी, डॉ. जेएस नेगी, डॉ. वीएस पाल, डॉ. टीआर जोशी और डॉ. वीेके भट़्ट को दोबारा नियुक्ति दी गई है। प्राचार्य ने बताया कि सभी पैथोलॉजिस्ट का कार्यकाल समाप्त हो गया था और उनकी जगह नए डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं की जा सकी, ऐसे में उनको ही दोबारा नियुक्ति दिए जाने का प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा निदेशक को भेजा गया था। पैथोलॉजिस्टों की नियुक्ति से रक्तदान के साथ ही पैथोलॉजी जांच में भी आसानी होगी। उल्लेखनीय है कि राज्य के सभी ब्लड बैंकों में पहले से ही पैथोलॉजिस्टों और तकनीकी सहायकों की भारी कमी है। इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाआें पर पड़ रहा है। इस संबंध में कई बार चिकित्सा शिक्षा निदेशक और स्वास्थ्य महानिदेशक को सूचित किया जा चुका है। लेकिन, अभी भी स्टाफ की कमी बरकरार है।
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दून मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में तैनात पांच पैथोलॉजिस्टों को एक साल के लिए संविदा पर दोबारा नियुक्ति दे दी गई है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने ब्लड बैंक में पैथोलॉजिस्टों की भारी कमी को देखते हुए यह कदम उठाया है। पैथोलॉजिस्टों को संविदा पर दोबारा नियुक्त किए जाने से तमाम तरह की सुविधाएं बाधित नहीं होंगी।
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता ने बताया कि डॉ. डीसी ध्यानी, डॉ. जेएस नेगी, डॉ. वीएस पाल, डॉ. टीआर जोशी और डॉ. वीेके भट़्ट को दोबारा नियुक्ति दी गई है। प्राचार्य ने बताया कि सभी पैथोलॉजिस्ट का कार्यकाल समाप्त हो गया था और उनकी जगह नए डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं की जा सकी, ऐसे में उनको ही दोबारा नियुक्ति दिए जाने का प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा निदेशक को भेजा गया था। पैथोलॉजिस्टों की नियुक्ति से रक्तदान के साथ ही पैथोलॉजी जांच में भी आसानी होगी। उल्लेखनीय है कि राज्य के सभी ब्लड बैंकों में पहले से ही पैथोलॉजिस्टों और तकनीकी सहायकों की भारी कमी है। इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाआें पर पड़ रहा है। इस संबंध में कई बार चिकित्सा शिक्षा निदेशक और स्वास्थ्य महानिदेशक को सूचित किया जा चुका है। लेकिन, अभी भी स्टाफ की कमी बरकरार है।
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