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अब भी नहीं चेते तो सांस लेना होगा मुश्किल

Thu, 15 Feb 2018 02:24 AM IST
Updated Thu, 15 Feb 2018 02:24 AM IST
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अब भी नहीं चेते तो सांस लेना होगा मुश्किल
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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राजधानी देहरादून प्रदूषण से जूझ रही है। पिछले छह वर्षों में यहां प्रदूषण दोगुना हो गया है। अगर अब भी नहीं चेते तो 2022 तक दून में भी सांस लेना मुश्किल हो जाएगा। यह नतीजा गति फाउंडेशन की ओर लगातार 10 दिन तक दून के 10 अलग-अलग जगहों पर खास मशीन के जरिये पीएम-2.5 और पीएम-10 की मात्रा के अध्ययन के बाद सामने आया है। बुधवार को गति फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि एक से 10 फरवरी तक बल्लीवाला चौक, सहारनपुर चौक, दून अस्पताल, रिस्पना पुल, आईएसबीटी, रायपुर, करनपुर, दिलाराम चौक, घंटाघर और बिंदाल पुल पर सुबह और शाम प्रदूषण का स्तर मापा गया। इसके चिंताजनक परिणाम सामने आए हैं। सफाई को लेकर तमाम अभियान चलाए गए, लेकिन कोई ठोक परिणाम धरातल पर देखने को नहीं मिला। ऐसे में राजधानी में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। कुछ मामलों में तो दून ने दिल्ली-एनसीआर को भी पीछे छोड़ दिया है।
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वर्तमान में दून पांच सबसे पॉल्यूटेड इकोलॉजिकली सेंसिटिव शहरों में से एक है। यह खुलासा केंद्रीय मंत्री डॉ.हर्षर्वधन ने पिछले वर्ष 15 सितंबर 2017 में लोकसभा में कि या था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जिन 100 शहरों में प्रदूषण के खिलाफ अभियान चलाने की घोषणा की है, उनमें दून शामिल नहीं है, यह चिंताजनक है। इसे लेकर जल्द ही फाउंडेशन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री से मिलेगा। इस दौरान आशुतोष कंडवाल, प्रेरणा रतूड़ी, ऋषभ श्रीवास्तव, प्यारेलाल मौजूद रहे।
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शहर में लगे एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम
अनूप नौटियाल ने कहा शहर में कम से कम 15 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम लगने चाहिए, ताकि पता चल सके कि प्रदूषण की स्थिति क्या है। इसके अलावा एयर क्वालिटी प्लान और इंडेक्स बनाया जाए, तभी प्रदूषण पर अंकुश लगेगा। उन्होंने कहा कि दून की आबादी 10 लाख है। वहीं, वाहनों की संख्या करीब साढ़े सात लाख है। ऐसे में सरकार को पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना चाहिए।
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पीएम-2.5 की स्थिति
इस अध्ययन में पीएम-2.5 की कुल 45 रीडिंग ली गई। मात्र छह रीडिंग यानी 10 प्रतिशत ही मानक या उससे कम यानी 60 से नीचे मिली। 85 प्रतिशत रीडिंग में पीएम 2.5 मानक से ज्यादा मिला। 22 रीडिंग में ये कण 60 से 120 के बीच, आठ में 120 से 180 के बीच, छह में 180 से 240, एक में 240 से 300 के बीच और दो रीडिंग में 300 से ज्यादा मिले।
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पीएम-10 की स्थिति
पीएम-10 का मानक 100 है, यानी हवा में 100 से ज्यादा पीएम-10 का होना हानिकारक है, लेकिन 44 रीडिंग में से मात्र 11 में ही पीएम-100 मानक या उससे कम मिला। 75 रीडिंग में यह 100 से 200, नौ में 200 से 300, पांच में 300 से 400 और दो रीडिंग में 400 से ज्यादा मिला। इससे पता चला कि केवल 25 प्रतिशत रीडिंग में ही पीएम-10 मानक के भीतर पाया गया, जबकि 75 प्रतिशत मामलों में यह मानक से अधिक पाया गया।

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आईएसबीटी और सहारनपुर चौक सर्वाधिक प्रदूषित
सहारनपुर चौक और आईएसबीटी की स्थिति सबसे खराब है। आईएसबीटी में पीएम-10 का स्तर 472 तक और पीएम-2.5 का स्तर 420 तक दर्ज किया गया। वहीं, सहारनपुर चौक पर पीएम-10 का स्तर 465 और पीएम-2.5 का स्तर अधिकतम 374 दर्ज किया गया है। दावा किया गया कि देहरादून में पहली बार पीएम-2.5 मापा गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड केवल पीएम-10 का ही मेजरमेंट करता है।
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