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सरकारी जमीन के 'मालिक' बने

Sat, 03 Aug 2013 09:34 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Sat, 03 Aug 2013 09:34 AM IST
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131 families is in problem

शिक्षकों को लीज पर मिले प्लाट पर बने मकान खरीदने वाले 131 परिवार अब मालिकाना हक के लिए भटक रहे हैं।

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मालिकाना हक के लिए तय लीज की दस साल की अवधि पूरी होने के बावजूद उनके मामले में पेच फंस गया है। पिछली सरकार के दौरान आए एक जीओ के बाद यहां मूल आवंटन वाले केवल 18 परिवार ही प्लाट पर मालिकाना हक पा सकते हैं।


गोविंदगढ़ स्थित टीचर्स कालोनी में सरकारी अध्यापकों के लिए लीज पर 149 प्लांट आवंटित हुए थे। वर्ष 2004 में तिवारी सरकार से जारी जीओ में तय हुआ कि इन प्लाटों की दस वर्ष की लीज पूरी होने के बाद शिक्षकों को मालिकाना हक दे दिया जाएगा।
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इस बीच 131 शिक्षक अपने मकान बेचकर अन्यत्र चले गए। अब यहां मूल आवंटी केवल 18 परिवार रह गए हैं। पिछली भाजपा सरकार की ओर से जारी जीओ में तय हुआ कि मालिकाना हक उन्हीं लोगों को मिलेगा, जो लीज के वक्त मूल निवासी होंगे। ऐसे में 131 परिवार अधर में हैं।
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शुक्रवार को अध्यापकों से मकान खरीदने वाले लोग स्थानीय पार्षद चरणजीत कौर संग मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से मिले। बताया कि सीएम ने मामले में निस्तारण का आश्वासन दिया है। मुलाकात करने वालों में अरुण बलूनी, धर्मेंद्र, गगन कौशल, रजत सोती, रोहित बहुणा, हिमांशु उनियाल शामिल रहे।


जीओ बदले तो मिले राहत
जानकारी के मुताबिक संबंधित परिवारों को शासनादेश में बदलाव की सूरत में ही राहत मिलने की उम्मीद है। वर्तमान जीओ में मूल लीज वालों को ही स्थायी आवंटन का हकदार माना गया है। ऐसे में प्रभावित लोगों की उम्मीदें सरकार पर टिकी हैं।

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