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वार्डों के आरक्षण में सामने आया गड़बड़झाला
Updated Sun, 29 Apr 2018 02:36 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
वार्डों के आरक्षण में तमाम खामियां सामने आईं हैं। वार्ड 91 चंद्रबनी में पिछड़ी जाति के वोटरों का प्रतिशत अधिक होने के बावजूद सामान्य घोषित कर दिया गया। जबकि वार्ड 92 आरकेडिया-1 में पिछड़ी जाति के वोटरों का प्रतिशत कम होने पर इसे पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इसी की तरह कई अन्य वार्डों में यही खामियां सामने आईं है। यह आरक्षण की नियमावली 2013 के मानकों के विपरीत है। नियमावली के मुताबिक जहां जिस जाति के वोटरों प्रतिशत ज्यादा है, वहां उसी जाति के लिए आरक्षण तय किया जाना चाहिए था।
आरक्षण के लिए कराए गए ओबीसी रैपिड सर्वे के बाद कई वार्डों में नियत किए गए आरक्षण पर सवाल खड़े होने लगे हैं। चंद्रबनी वार्ड की बात करें तो यहां कुल वोटर 9,954 हैं, जिसमें पिछड़ी जाति के 2,858 वोटर हैं, जिनका कुल प्रतिशत 28.71 है। जबकि चंद्रबनी को सामान्य के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं, वार्ड 92 आरकेडिया-1 में कुल वोटर 10367 हैं। इसमें से 2229 वोटर पिछड़ी जाति के हैं, जिनका कुल प्रतिशत 21.50 है। इसके बावजूद आरक्षण में नियमावली के विपरीत आरकेडिया-1 वार्ड को पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
वार्ड-5 धौरण खास में अनुसूचित जाति के वोटरों का प्रतिशत 16.15 है। इसके बावजूद वार्ड को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं, वार्ड-17 चुक्खूमोहल्ला में अनुसूचित जाति के वोटरों का प्रतिशत 24.38 है, इसके बावजूद वार्ड को अनारक्षित रखा गया है। इसी तरह वार्ड-51 वाणी विहार में 21.22 फीसदी अनुसूचित जाति के वोटर है, फिर भी वार्ड को अनारक्षित रखा है। वार्ड-78 टर्नर रोड में 61.28 अनुसूचित जाति के वोटर है, इसके बावजूद वार्ड को सामान्य घोषित किया गया है।
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आरकेडिया-1 की मौजूदा उप प्रधान गीता बिष्ट का आरोप है कि राजनीतिक दबाव में वार्ड को पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित किया गया है।
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कोट::
आरक्षण को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय में सात दिन तक आपत्तियां सुनी जाएंगी। आरक्षण को लेकर लोग अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही अंतिम अधिसूचना जारी होगी।
विजय कुमार जोगदंडे, नगर आयुक्त
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वार्डों के आरक्षण में तमाम खामियां सामने आईं हैं। वार्ड 91 चंद्रबनी में पिछड़ी जाति के वोटरों का प्रतिशत अधिक होने के बावजूद सामान्य घोषित कर दिया गया। जबकि वार्ड 92 आरकेडिया-1 में पिछड़ी जाति के वोटरों का प्रतिशत कम होने पर इसे पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इसी की तरह कई अन्य वार्डों में यही खामियां सामने आईं है। यह आरक्षण की नियमावली 2013 के मानकों के विपरीत है। नियमावली के मुताबिक जहां जिस जाति के वोटरों प्रतिशत ज्यादा है, वहां उसी जाति के लिए आरक्षण तय किया जाना चाहिए था।
आरक्षण के लिए कराए गए ओबीसी रैपिड सर्वे के बाद कई वार्डों में नियत किए गए आरक्षण पर सवाल खड़े होने लगे हैं। चंद्रबनी वार्ड की बात करें तो यहां कुल वोटर 9,954 हैं, जिसमें पिछड़ी जाति के 2,858 वोटर हैं, जिनका कुल प्रतिशत 28.71 है। जबकि चंद्रबनी को सामान्य के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं, वार्ड 92 आरकेडिया-1 में कुल वोटर 10367 हैं। इसमें से 2229 वोटर पिछड़ी जाति के हैं, जिनका कुल प्रतिशत 21.50 है। इसके बावजूद आरक्षण में नियमावली के विपरीत आरकेडिया-1 वार्ड को पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
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वार्ड-5 धौरण खास में अनुसूचित जाति के वोटरों का प्रतिशत 16.15 है। इसके बावजूद वार्ड को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं, वार्ड-17 चुक्खूमोहल्ला में अनुसूचित जाति के वोटरों का प्रतिशत 24.38 है, इसके बावजूद वार्ड को अनारक्षित रखा गया है। इसी तरह वार्ड-51 वाणी विहार में 21.22 फीसदी अनुसूचित जाति के वोटर है, फिर भी वार्ड को अनारक्षित रखा है। वार्ड-78 टर्नर रोड में 61.28 अनुसूचित जाति के वोटर है, इसके बावजूद वार्ड को सामान्य घोषित किया गया है।
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आरकेडिया-1 की मौजूदा उप प्रधान गीता बिष्ट का आरोप है कि राजनीतिक दबाव में वार्ड को पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित किया गया है।
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कोट::
आरक्षण को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय में सात दिन तक आपत्तियां सुनी जाएंगी। आरक्षण को लेकर लोग अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही अंतिम अधिसूचना जारी होगी।
विजय कुमार जोगदंडे, नगर आयुक्त
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