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सातवें वेतन आयोग का लाभ न मिलने पर बिफरे
Updated Fri, 02 Mar 2018 01:28 AM IST
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सातवें वेतन आयोग का लाभ न मिलने पर बिफरे
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के वैज्ञानिकों ने सातवें वेतन का लाभ न मिलने पर नाराजगी जताते हुए बाजू पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। वैज्ञानिकों ने सरकार से जल्द ही संशोधित वेतन जारी करने की मांग की है।
राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत बृहस्पतिवार को संस्थान कार्यालय में एकत्र हुए वैज्ञानिकों ने बाजू पर काली पट्टी बांधी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक किसानों एवं राष्ट्रहित में बदलते जलवायु और घटते संसाधनों के बावजूद खाद्य सुरक्षा के लिए निरंतर अनुसंधान एवं अन्य प्रयासों में जुटे हैं। इसके बावजूद उनके हितों की अनदेखी हो रही है। विभिन्न संस्थानों में जहां प्रशासनिक अधिकारियों और तकनीकी अधिकारियों को सातवें वेतन का लाभ दिया जा रहा है। वही केंद्रीय संस्थानों के वैज्ञानिकों को छोड़ दिया गया है। डा. आनंद कुमार गुप्ता ने कहा कि सातवें वेतन का लाभ न मिलने से पेंशन पर भी इसका असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली मुख्यालय में जहां सप्ताह में पांच दिन कार्यदिवस के होते हैं। वहीं दून में इसे छह दिन किया गया है। एक ही संस्थान में दो तरह के नियम बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि समान रूप से सप्ताह में पांच दिन कार्यदिवस होना चाहिए। विरोध जताने वालों में संस्थान के डॉ. जेएस तोमर, डॉ. जे जयप्रकाश, डॉ. एसी राठौर, डा. डीएम कदम, डॉ. हर्ष मेहता, डॉ. डी मंडल, डॉ. एनएम आलम, डॉ. धर्मवीर सिंह, डॉ. राजेश कौशल आदि शामिल रहे।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के वैज्ञानिकों ने सातवें वेतन का लाभ न मिलने पर नाराजगी जताते हुए बाजू पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। वैज्ञानिकों ने सरकार से जल्द ही संशोधित वेतन जारी करने की मांग की है।
राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत बृहस्पतिवार को संस्थान कार्यालय में एकत्र हुए वैज्ञानिकों ने बाजू पर काली पट्टी बांधी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक किसानों एवं राष्ट्रहित में बदलते जलवायु और घटते संसाधनों के बावजूद खाद्य सुरक्षा के लिए निरंतर अनुसंधान एवं अन्य प्रयासों में जुटे हैं। इसके बावजूद उनके हितों की अनदेखी हो रही है। विभिन्न संस्थानों में जहां प्रशासनिक अधिकारियों और तकनीकी अधिकारियों को सातवें वेतन का लाभ दिया जा रहा है। वही केंद्रीय संस्थानों के वैज्ञानिकों को छोड़ दिया गया है। डा. आनंद कुमार गुप्ता ने कहा कि सातवें वेतन का लाभ न मिलने से पेंशन पर भी इसका असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली मुख्यालय में जहां सप्ताह में पांच दिन कार्यदिवस के होते हैं। वहीं दून में इसे छह दिन किया गया है। एक ही संस्थान में दो तरह के नियम बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि समान रूप से सप्ताह में पांच दिन कार्यदिवस होना चाहिए। विरोध जताने वालों में संस्थान के डॉ. जेएस तोमर, डॉ. जे जयप्रकाश, डॉ. एसी राठौर, डा. डीएम कदम, डॉ. हर्ष मेहता, डॉ. डी मंडल, डॉ. एनएम आलम, डॉ. धर्मवीर सिंह, डॉ. राजेश कौशल आदि शामिल रहे।
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