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चार वर्ष से अधर में विजयनगर व चंद्रापुरी के पुल
Updated Sun, 02 Jul 2017 09:51 PM IST
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रुद्रप्रयाग (ब्यूरो)। मंदाकिनी नदी पर विजयनगर और चंद्रापुरी में निर्माणाधीन स्टील गार्डर पुल की लागत स्वीकृत राशि से लगभग दोगुनी पहुंच चुकी है, लेकिन कार्य पूरा नहीं हो पाया है।
आपदा में मंदाकिनी नदी पर रुद्रप्रयाग से कालीमठ तक 8 छोटे-बड़े झूला पुल व एक मोटर पुल बह गए थे। अक्तूबर 2013 में तत्कालीन सरकार द्वारा माई की मढ़ी, सिल्ली, विजयनगर, चंद्रापुरी, रेल-फाटा, कालीमठ, रुच्छ महादेव और सोनप्रयाग में स्टील गार्डर पुल निर्माण की स्वीकृति दी गई, लेकिन आजतक नहीं बने। विजयनगर में 60 मीटर स्पान का स्टील गार्डर पुल के अभी तक एबेडमेंट तक नहीं बन पाए, जबकि स्वीकृत लागत 334 लाख रुपये खर्च करने के साथ रिवाइज इस्टीमेट 605 लाख पहुंच चुका है।
उधर, चंद्रापुरी में भी 60 मीटर स्पान का स्टील गार्डल पुल के लिए 290 लाख स्वीकृत किए गए थे। चार वर्ष में लोनिवि पुल के दोनों एबेडमेंट तैयार कर पाया। ईई मनोज दास का कहना है कि पुल को पूरा करने के लिए 211 लाख, 94 हजार रुपये का रिवाइज इस्टीमेट शासन को भेजा जा रहा है, लेकिन धन नहीं मिल रहा। डीएम मंगेश घिल्डियाल का कहना है कि लोनिवि को दो माह में विजयनगर व चंद्रापुरी में पुलों का निर्माण पूरा करने को कहा गया है। ये विभाग की जिम्मेदारी है कि वह कैसे भी कार्य पूरा कराए। अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।
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आपदा में मंदाकिनी नदी पर रुद्रप्रयाग से कालीमठ तक 8 छोटे-बड़े झूला पुल व एक मोटर पुल बह गए थे। अक्तूबर 2013 में तत्कालीन सरकार द्वारा माई की मढ़ी, सिल्ली, विजयनगर, चंद्रापुरी, रेल-फाटा, कालीमठ, रुच्छ महादेव और सोनप्रयाग में स्टील गार्डर पुल निर्माण की स्वीकृति दी गई, लेकिन आजतक नहीं बने। विजयनगर में 60 मीटर स्पान का स्टील गार्डर पुल के अभी तक एबेडमेंट तक नहीं बन पाए, जबकि स्वीकृत लागत 334 लाख रुपये खर्च करने के साथ रिवाइज इस्टीमेट 605 लाख पहुंच चुका है।
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उधर, चंद्रापुरी में भी 60 मीटर स्पान का स्टील गार्डल पुल के लिए 290 लाख स्वीकृत किए गए थे। चार वर्ष में लोनिवि पुल के दोनों एबेडमेंट तैयार कर पाया। ईई मनोज दास का कहना है कि पुल को पूरा करने के लिए 211 लाख, 94 हजार रुपये का रिवाइज इस्टीमेट शासन को भेजा जा रहा है, लेकिन धन नहीं मिल रहा। डीएम मंगेश घिल्डियाल का कहना है कि लोनिवि को दो माह में विजयनगर व चंद्रापुरी में पुलों का निर्माण पूरा करने को कहा गया है। ये विभाग की जिम्मेदारी है कि वह कैसे भी कार्य पूरा कराए। अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।
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