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दयाल के लेखन में संस्कृति की जड़ें : जगूड़ी

Mon, 01 Apr 2019 01:11 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 01 Apr 2019 01:11 AM IST
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दयाल के लेखन में संस्कृति की जड़ें : जगूड़ी
लीलाधर जगूड़ी
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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श्री ललित मोहन दयाल की कृति ‘अथश्री प्रयाग कथा’ का विमोचन रविवार को किरसाली चौक स्थित नवरस भवन में आयोजित कार्यक्रम में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी, डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी व स्वास्थ्य सलाहकार नवीन बलूनी ने दीप जलाकर किया।

इस अवसर पर पद्मश्री लीलाधर जगुड़ी ने कहा कि साहित्य की भाषा वही लेखक सही ढंग से पकड़ सकता है जिसकी समाज के प्रति संवेदनाएं हों। दयाल की लेखन शैली में गजब का ग्रामीण परिवेश है। उनके लेखन में संस्कृति की जड़ें हैं। अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि दयाल की लेखनी से समाज लाभांवित होगा। डीएवी कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा खंडूड़ी ने कहा कि दयाल की पहली पुस्तक खड़क माफी की स्मृतियों से बहुत ही सुंदर सस्मरण लिखे हैं। मंच का संचालन साहित्यकार डॉ. सविता मोहन ने किया। इस अवसर पर विपिन बलूनी, प्रबोध उनियाल, अशोक क्रेजी, शिव प्रसाद बहुगुणा, नरेंद्र दयाल, डॉ. सुशील राणा, विनोद, मधु सुदन दयाल आदि मौजूद रहे।
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