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दुष्कर्म के आरोपियों को फांसी का बिल पास करे सरकार : ऊषा
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
सरकार को दुष्कर्म के आरोपियों को फांसी की सजा का बिल जल्द पास करना चाहिए। जिससे ऐसे दरिंदों में खौफ पैदा हो सके। यह बात बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने सोमवार को दून अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान कही। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में बढ़ते दुष्कर्म के मामले पर चिंता व्यक्त की।
बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी व सदस्य शारदा त्रिपाठी की टीम मंगलवार शाम करीब पांच बजे दून महिला अस्पताल पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने लेबर रूम (प्रसव कक्ष) का निरीक्षण किया। इस अवसर पर ऊषा नेगी ने अनदेखी करने वाले डॉक्टर को जमकर फटकार लगाई। इसके बाद उन्होंने सोमवार को अस्पताल में भर्ती हुई नाबालिग व उसकी बच्ची का हाल जाना और पीड़िता के परिजनों से बात भी की। उन्होंने परिजनों को आयोग की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने नाबालिग पीड़िता से आगे की शिक्षा गृहण करने पर भी जोर दिया। बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि आरोपी का पता लगाकर उसकी डीएनए जांच कराई जाएगी। इसके अलावा उचित देखभाल के लिए नवजात को शिशु निकेतन में रखा जाएगा। इस दौरान उन्होंने डॉक्टरों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि मरीजों के इलाज के साथ किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर किसी डॉक्टर व नर्स को कोई समस्या है तो वह अस्पताल की कमियों को लिखित रूप में आयोग में दें। समस्या के समाधान के लिए आयोग की ओर से शासन में वार्ता की जाएगी।
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सरकार को दुष्कर्म के आरोपियों को फांसी की सजा का बिल जल्द पास करना चाहिए। जिससे ऐसे दरिंदों में खौफ पैदा हो सके। यह बात बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने सोमवार को दून अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान कही। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में बढ़ते दुष्कर्म के मामले पर चिंता व्यक्त की।
बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी व सदस्य शारदा त्रिपाठी की टीम मंगलवार शाम करीब पांच बजे दून महिला अस्पताल पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने लेबर रूम (प्रसव कक्ष) का निरीक्षण किया। इस अवसर पर ऊषा नेगी ने अनदेखी करने वाले डॉक्टर को जमकर फटकार लगाई। इसके बाद उन्होंने सोमवार को अस्पताल में भर्ती हुई नाबालिग व उसकी बच्ची का हाल जाना और पीड़िता के परिजनों से बात भी की। उन्होंने परिजनों को आयोग की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने नाबालिग पीड़िता से आगे की शिक्षा गृहण करने पर भी जोर दिया। बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि आरोपी का पता लगाकर उसकी डीएनए जांच कराई जाएगी। इसके अलावा उचित देखभाल के लिए नवजात को शिशु निकेतन में रखा जाएगा। इस दौरान उन्होंने डॉक्टरों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि मरीजों के इलाज के साथ किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर किसी डॉक्टर व नर्स को कोई समस्या है तो वह अस्पताल की कमियों को लिखित रूप में आयोग में दें। समस्या के समाधान के लिए आयोग की ओर से शासन में वार्ता की जाएगी।
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