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छह मार्च को होगा झंडा जी का आरोहण
Updated Tue, 20 Feb 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
दून के प्रसिद्ध झंडा मेला का आगाज छह मार्च को होगा। मेले के आयोजन के लिए श्री दरबार साहिब मेला प्रबंधन समिति ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस क्रम में संगत को प्रसाद वितरित करने के लिए सादे मारकीन के गिलाफ तैयार कर लिए गए हैं। धुलाई-रंगाई के बाद गिलाफों को श्री दरबार साहिब भेजा जा रहा है।
परंपरानुसार झंडा जी पर गिलाफ की तीन परतें चढ़ाई जाती हैं। इसमें सबसे भीतर 41 मारकीन के सादे गिलाफ चढ़ाए जाते हैं। दूसरी परत में 21 शनील के गिलाफ चढ़ाए जाते हैं। सबसे बाहर की ओर एक दर्शनी गिलाफ चढ़ाया जाता है। श्री झंडा जी मेले में शामिल होने के लिए संगत को सादे मारकीन के गिलाफ पर प्रसाद बांधकर दिया जाता है। संगत श्रद्धाभाव के साथ इस प्रसाद को ग्रहण करती है एवं अपने नाते-रिश्तेदारों को देती हैं।
श्री दरबार साहिब के व्यवस्थापक कैलाश चंद्र जुयाल ने बताया कि बीते वर्ष झंडा जी पर मारकीन के जो गिलाफ चढ़ाए गए थे। उन्हें धुलाई-रंगाई कर प्रसाद वितरण के लिए तैयार कर लिया गया है। गिलाफ को दरबार साहिब भेजने का क्रम भी शुरू हो गया है।
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ऐसे हुई शुरुआत
श्री झंडा जी मेले का इतिहास दून के अस्तित्व से जुड़ा है। श्री गुरु राम राय जी का पदार्पण यहां वर्ष 1979 में हुआ था। बताया जाता है कि उन्होंने यहां की रमणीयता से मुग्ध होकर ऊंची-नीची धरती पर जो डेरा बनाया, उसी के अपभ्रंश स्वरूप इस जगह का नाम डेरादीन से डेरादून और फिर देहरादून हो गया। उन्होंने इस जगह को अपनी कर्मस्थली बनाया। गुरु महाराज ने दरबार में लोक कल्याण के लिए विशाल झंडा लगाकर लोगों को इसी ध्वज से आशीर्वाद प्राप्त करने का संदेश दिया। इसके साथ ही झंडा साहिब के दर्शन की परंपरा शुरू हो गई। श्री गुरु राम राय जी महाराज को देहरादून का संस्थापक भी कहा जाता है।
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दून के प्रसिद्ध झंडा मेला का आगाज छह मार्च को होगा। मेले के आयोजन के लिए श्री दरबार साहिब मेला प्रबंधन समिति ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस क्रम में संगत को प्रसाद वितरित करने के लिए सादे मारकीन के गिलाफ तैयार कर लिए गए हैं। धुलाई-रंगाई के बाद गिलाफों को श्री दरबार साहिब भेजा जा रहा है।
परंपरानुसार झंडा जी पर गिलाफ की तीन परतें चढ़ाई जाती हैं। इसमें सबसे भीतर 41 मारकीन के सादे गिलाफ चढ़ाए जाते हैं। दूसरी परत में 21 शनील के गिलाफ चढ़ाए जाते हैं। सबसे बाहर की ओर एक दर्शनी गिलाफ चढ़ाया जाता है। श्री झंडा जी मेले में शामिल होने के लिए संगत को सादे मारकीन के गिलाफ पर प्रसाद बांधकर दिया जाता है। संगत श्रद्धाभाव के साथ इस प्रसाद को ग्रहण करती है एवं अपने नाते-रिश्तेदारों को देती हैं।
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श्री दरबार साहिब के व्यवस्थापक कैलाश चंद्र जुयाल ने बताया कि बीते वर्ष झंडा जी पर मारकीन के जो गिलाफ चढ़ाए गए थे। उन्हें धुलाई-रंगाई कर प्रसाद वितरण के लिए तैयार कर लिया गया है। गिलाफ को दरबार साहिब भेजने का क्रम भी शुरू हो गया है।
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ऐसे हुई शुरुआत
श्री झंडा जी मेले का इतिहास दून के अस्तित्व से जुड़ा है। श्री गुरु राम राय जी का पदार्पण यहां वर्ष 1979 में हुआ था। बताया जाता है कि उन्होंने यहां की रमणीयता से मुग्ध होकर ऊंची-नीची धरती पर जो डेरा बनाया, उसी के अपभ्रंश स्वरूप इस जगह का नाम डेरादीन से डेरादून और फिर देहरादून हो गया। उन्होंने इस जगह को अपनी कर्मस्थली बनाया। गुरु महाराज ने दरबार में लोक कल्याण के लिए विशाल झंडा लगाकर लोगों को इसी ध्वज से आशीर्वाद प्राप्त करने का संदेश दिया। इसके साथ ही झंडा साहिब के दर्शन की परंपरा शुरू हो गई। श्री गुरु राम राय जी महाराज को देहरादून का संस्थापक भी कहा जाता है।