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नगर निगम में शामिल गांवों में लगी वितीय रोक
Updated Fri, 12 Jan 2018 02:05 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
नगर निगम सीमा विस्तार के बाद नगर निगम में शामिल गांवों के ग्राम प्रधानों के बस्ते जमा करवाने की कवायद शुरू हो गई है। पंचायत विभाग के अधिकारियों की टीम बृहस्पतिवार को नगर निगम कार्यालय पहुंची। इस दौरान टीम ने नगर निगम अधिकारियों के साथ ग्राम प्रधानों के बस्ते जमा करने की प्रक्रिया पर चर्चा की। इसके साथ ही पंचायत विभाग ने निगम में शामिल हो चुके गांवों के विकास कार्यों में वित्तीय रोक लगा दी है।
नगर निगम के परिसीमन के बाद देहरादून में वार्डों की संख्या बढ़कर 100 हो गई है। सीमा विस्तार में 72 गांव शामिल हुए हैं। परिसीमन से संबंधित आपत्तियां मांगे जाने के बाद अब सरकार ने नगर निगम में शामिल हो चुके ग्राम प्रधानों के बस्ते जमा करवाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। पंचायत राज निदेशक हरि चंद सेमवाल ने नौ जनवरी को यह आदेश जारी किए हैं। 10 दिन के भीतर ग्राम प्रधानों के बस्ते जमा होने हैं। जिला पंचायत अधिकारियों से पंचायतों से जुड़े सभी अभिलेखों को शहरी निकायों के हस्तांतरित किए जाने को कहा है। इसी के तहत ग्राम प्रधानों के बस्ते और पंचायत संबंधी अभिलेख जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अपर नगर आयुक्त नीरज जोशी के मुताबिक पंचायत विभाग के अधिकारी बृहस्पतिवार को नगर निगम कार्यालय पहुंचे था। इस दौरान अधिकारियों ने बस्ते जमा करवाने के साथ ही पंचायतों के अभिलेखों और भूमि का रिकार्ड नगर निगम को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पर चर्चा की। नीरज जोशी ने बताया कि टीम को नगर निगम में शामिल गांवों की सूची उपलब्ध करा दी गई।
प्रशासक नियुक्त करने की मांग : आरकेड़िया की उप प्रधान गीता बिष्ट ने कहा कि नगर निगम में शामिल गांवों के प्रधानों के अधिकार समाप्त होने के बाद सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था के लिए प्रशासकों की तैनाती करनी चाहिए। जिससे गांवों के विकास कार्यों के साथ जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्रों के अलावा दूसरे जनहित के कार्य हो सकें।
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नगर निगम सीमा विस्तार के बाद नगर निगम में शामिल गांवों के ग्राम प्रधानों के बस्ते जमा करवाने की कवायद शुरू हो गई है। पंचायत विभाग के अधिकारियों की टीम बृहस्पतिवार को नगर निगम कार्यालय पहुंची। इस दौरान टीम ने नगर निगम अधिकारियों के साथ ग्राम प्रधानों के बस्ते जमा करने की प्रक्रिया पर चर्चा की। इसके साथ ही पंचायत विभाग ने निगम में शामिल हो चुके गांवों के विकास कार्यों में वित्तीय रोक लगा दी है।
नगर निगम के परिसीमन के बाद देहरादून में वार्डों की संख्या बढ़कर 100 हो गई है। सीमा विस्तार में 72 गांव शामिल हुए हैं। परिसीमन से संबंधित आपत्तियां मांगे जाने के बाद अब सरकार ने नगर निगम में शामिल हो चुके ग्राम प्रधानों के बस्ते जमा करवाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। पंचायत राज निदेशक हरि चंद सेमवाल ने नौ जनवरी को यह आदेश जारी किए हैं। 10 दिन के भीतर ग्राम प्रधानों के बस्ते जमा होने हैं। जिला पंचायत अधिकारियों से पंचायतों से जुड़े सभी अभिलेखों को शहरी निकायों के हस्तांतरित किए जाने को कहा है। इसी के तहत ग्राम प्रधानों के बस्ते और पंचायत संबंधी अभिलेख जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अपर नगर आयुक्त नीरज जोशी के मुताबिक पंचायत विभाग के अधिकारी बृहस्पतिवार को नगर निगम कार्यालय पहुंचे था। इस दौरान अधिकारियों ने बस्ते जमा करवाने के साथ ही पंचायतों के अभिलेखों और भूमि का रिकार्ड नगर निगम को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पर चर्चा की। नीरज जोशी ने बताया कि टीम को नगर निगम में शामिल गांवों की सूची उपलब्ध करा दी गई।
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प्रशासक नियुक्त करने की मांग : आरकेड़िया की उप प्रधान गीता बिष्ट ने कहा कि नगर निगम में शामिल गांवों के प्रधानों के अधिकार समाप्त होने के बाद सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था के लिए प्रशासकों की तैनाती करनी चाहिए। जिससे गांवों के विकास कार्यों के साथ जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्रों के अलावा दूसरे जनहित के कार्य हो सकें।
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