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'अगर पहाड़ी पर नहीं चढ़ता तो मर जाता'
कोटद्वार/ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jul 2013 09:25 AM IST
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केदारनाथ में आपदा में फंसे गोपाल सिंह 12 दिन भटकते हुए सुरक्षित घर पहुंचे तो उनके चेहरे पर खौफ साफ नजर आ रहा था। 16 जून की रात्रि की आपदा को याद कर बताते हैं कि नदी से पहाड़ी का रुख नहीं करते तो जीवित न बचते।
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पहाड़ की ऊंचाई पर खड़े होकर उन्होंने नदी का रौद्र रूप और विनाशलीला देखी। लोगों की चीखने की आवाजें, कई मंजिला भवनों को नदी में समाते हुए देखा।
16 जून की रात्रि से भटकते हुए 28 की रात्रि घर पहुंचे गोपाल ने बताया वह यात्रियों को लेकर शाम चार बजे गौरीकुंड पहुंचे। यहां पहुंचते ही हालात ठीक नहीं थे इसलिए उन्होंने ऊपर लौटने का निर्णय किया। यही निर्णय उनकी जान बचा गया। गोपाल बताते हैं कि पहाड़ी से गौरी मंदिर, सहित नदी किनारे के कई भवन मिनटों में नदी में समाते देखा।
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संभ्ालने का मौका नहीं मिला
नदी का पानी इतनी तेजी से चढ़ा कि जो भी वहां नीचे था किसी को भी संभलने का मौका नहीं मिला। उन्होंने गौरी गांव में शरण ली और आईटीबीपी के जवानों ने उनको कच्चा पुल बनाकर नदी पार कराई। जिससे वह रुक-रुक कर घर पहुंचे हैं। गोपाल के घर पहुंचने पर बेटों और अन्य परिजनों ने राहत की सांस ली।
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