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बदला बाघों को मारने का तरीका

Mon, 17 Jun 2013 10:24 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Mon, 17 Jun 2013 10:24 AM IST
tiger in danger

प्रदेश में करीब एक साल से बाघों के मारने का पैटर्न बदल गया है। प्रोफेशनल शिकारी ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोग भी बाघों को मौत की नींद सुलाने लगे हैं। वर्ष 2013 में जनवरी से जून माह के बीच बाघों की मौत के मामले प्रकाश में आने के बाद अमर उजाला ने पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।



इससे जो तस्वीर बनती है वह भयावह है। यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगा तो बाघों का संरक्षण मुश्किल होगा जाएगा।

कैसे होता था बाघों का शिकार
बाघों की गतिविधियों के बारे में गुज्जरों को जानकारी होती है। गुज्जरों का संपर्क बावरिया और कंजर ग्रुप से होता था। गुज्जर अपने पालतू पशुओं को बाघों से बचाने के लिए बावरियों और कंजर (शिकारी) के संपर्क में आते थे। उन्हें रहने की जगह देते थे। इसके बाद शिकारी फंदा लगाकर बाघों को मारते थे।


बाद में बाघों की खाल और दूसरा अंग बाहर ले जाकर बेच देते थे। 24 मई 2012 को कार्बेट के बिजरानी रेंज में बावरियों ने बाघिन की हत्या कर दी थी। इस प्रकरण के खुलासे के बाद कार्बेट प्रशासन की ओर से बड़े पैमाने पर बावरियों को गिरफ्तार किया गया था। इससे कुछ हद तक बाघों के शिकार पर अंकुश लगा।
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अब कैसे मारे जा रहे बाघ
बाघों का शिकार करने की तकनीक शिकारियों ने अब गुज्जरों को दे दी है। इससे गुज्जर ही बाघों को मौत की नींद सुलाने लगे हैं। पिछले पांच माह में बाघों की मौत के जितने भी मामले सामने आए हैं, उन सब में जहर देकर या लाठी-डंडे से पीटकर हत्या करने की पुष्टि हुई है। सूत्रों का कहना है कि बाघ अगर किसी पशु का शिकार करता है और उसे ऐसा करते गुज्जर देख लेता है तो बाघ के जान पर बन आती है।


शिकार करने के बाद बाघ थोड़ा मांस खाकर चलता बनता है। कुछ देर बाद वह अपने शिकार के पास वापस आता है। इस बीच गुज्जर या ग्रामीण बाघ के शिकार में जहर डाल देते हैं, जिससे बाघों की मौत हो जाती है। राजाजी पार्क के गौहरी रेंज में सात फरवरी 2013 के मामले में इसकी पुष्टि हो चुकी है। लैब की जांच में बाघ और सूअर की मांस में जहर पाया गया था। इसके अलावा अलग से मांस में जहर मिलाकर बाघों के मूवमेंट वाले स्थान पर रख दिया जा रहा है, जिसे खाकर बाघों की मौत हो रही है।

इस साल अब तक हुई बाघों की मौत
- एक जून को आम पोखड़ा में बाघ का शव मिला
- 29 मई को आम पोखड़ा में पांच दिन पुराना बाघ का शव बरामद
- 27 मई को ढेला रेंज में बाघिन का सड़ा-गला शव मिला
- 18 अप्रैल को रामनगर वन प्रभाग में बाघिन का शव बरामद
- एक मार्च में रामनगर वन प्रभाग में बाघ का क्षत-विक्षत शव मिला
- फरवरी 2013 को राजाजी पार्क के गौहरी रेंज में बाघ-सूअर की मौत
- फरवरी में ही तराई वेस्ट वन प्रभाग में बन्ना खेड़ा रेंज में बाघ का शव मिला
- जनवरी 2013 कालागढ़ के पास पतरामपुर में बाघ का शव मिल

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