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हरियाली घटी, पेड़ कटे, सांस उखड़ी

Sat, 15 Jun 2013 01:15 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Sat, 15 Jun 2013 01:15 PM IST
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greenery decreased

घाटी में अगर हरियाली घट गई, पेड़ कटते रहे तो यकीन मानिये सांस उखड़ जाएगी। पर्यावरण और चिकित्सा विज्ञानियों का कहना है कि पेड़ घाटी के ‘फेफड़े’ हैं, अगर इन्हें नुकसान पहुंचाया गया तो शरीर के फेफड़े बीमार हो जाएंगे। पेड़ कटेंगे और फेफड़ों की ताकत घटती जाएगी।

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प्रदूषण बढ़ रहा है
पेड़ों के कटान और हरियाली घटने से हवा में प्रदूषण बढ़ रहा है। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ विज्ञानी डा. एसएस पाल का कहना है कि पेड़ और हरियाली प्रदूषण सोख लेती हैं। इसके अलावा कार्बन डाई आक्साइड भी सोखते हैं। चिकित्सा विज्ञानियों का कहना है कि प्रदूषित हवा में एलर्जेंट होते हैं, जो सांस की नली में जाकर सूजन पैदा कर देते हैं। इससे सीओपीडी नामक बीमारी हो जाती है। इसके अलावा सांस तंत्र के अन्य संक्रमण हो जाते हैं।
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सांस तंत्र कमजोर होता है
हरियाली घटने पर फेफड़ों पर आने वाले असर के संबंध में इंडियन चेस्ट सोसाइटी के सर्वे में बताया गया कि लोगों का सांस तंत्र कमजोर हो जाता है। जिन लोगों का सांस तंत्र कमजोर होता है, उनकी हालत छोटी सी बीमारी में भी गंभीर हो जाती है। रोगियों की जांच में पाया गया कि कमजोर सांस तंत्र के लोग बहुत जल्दी एक्यूट रेस्पेरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम में जाने लगे थे।
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शरीर में आक्सीजन की कमी होगी
देहरादून चेस्ट फोरम के कोषाध्यक्ष डॉ पुनीत त्यागी ने बताया कि ग्रीन बेल्ट जैसे-जैसे कम होगा प्रदूषण बढ़ता जाएगा। शरीर में आक्सीजन की कमी होगी। इससे अकेले फेफड़ों पर ही दुष्प्रभाव नहीं आएगा। कार्डियो-वैस्कुलर बीमारियां भी बढ़ती जाएंगी। हृदय की दिक्कतें बढ़ेंगी। वायु प्रदूषण का बच्चों पर और ज्यादा खराब असर पड़ेगा।

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